ब्लू ड्रम मर्डर केस: फैसले के बाद जज ने पेन डस्टबिन में फेंका; निब तोड़ना या पेन फेंकना- ये नियम है या परंपरा- आज सब समझिए
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मेरठ के ब्लू ड्रम मर्डर केस में फांसी की सजा के बाद जज द्वारा पेन फेंकने की चर्चा क्यों है?
नेशनल डेस्क. तारीख…14 अक्टूबर 2026…जगह- मेरठ की जिला अदालत…फैसला- सौरभ राजपूत मर्डर केस के दोनों दोषियों (पत्नी मुस्कान और बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला) को सजा-ए-मौत यानी फांसी।
3 मार्च 2025 का यह मामला मेरठ के ब्लू ड्रम मर्डर केस के तौर पर नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया की सुर्खियों में रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- फैसला सुनाने के बाद माननीय जज अरविंद कुमार मिश्रा ने अपना पेन डस्टबिन में फेंक दिया।
अक्सर सुना जाता है, कई पुरानी फिल्मों में भी यह दिखाया गया है कि जज किसी मुजरिम को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ देते हैं या उसे डस्टबिन में फेंक देते हैं।
आखिर माननीय जज ऐसा क्यों करते हैं? क्या ऐसा करना कानूनन जरूरी है? अगर नहीं तो ये शुरू कैसे हुआ? क्या अब भी होता है….आपके जेहन में ये सवाल उठना लाजिमी हैं।
तो चलिए….‘राज एक्सप्रेस’ के इस नेशनल एक्सप्लेनर में आज बात कोर्ट्स से जुड़े इसी मसले पर। शुरू से शुरू करते हैं….






