उपराष्ट्रपति चुनाव-2769: केआर नारायणन के नाम दर्ज सबसे बड़ी जीत, क्या धनखड़ का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे राधाकृष्णन
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केआर नारायणन (बीच में) को उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत मिली है। जबकि धनखड़ (दाएं) इस मामले में तीसरे नंबर पर हैं।
नेशनल डेस्क. 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है। INDIA गठबंधन ने NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ रिटायर जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उताकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, नंबर गेम को ध्यान में रखते हुए सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में राधाकृष्णन के सामने चुनौती है कि क्या वे जगदीप धनखड़ से बड़ी जीत हासिल कर उनका रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे।
उपराष्ट्रपति चुनाव में 3 बड़ी जीत
⦁ उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत केआर नारायणन के नाम दर्ज है। 1992 में उनके सामने निर्दलीय काका जोगिंदर सिंह उतरे थे। 790 सांसदों में 711 ने वोट डाला था। इनमें से 10 वोट अमान्य घोषित हो गए। जोगिंदर को सिर्फ 1 वोट मिला, जबकि केआर नारायणन को 700 वोट मिले।
⦁ दूसरी बड़ी जीत निर्दलीय उम्मीदवार जाकिर हुसैन के नाम है। 1962 के चुनाव में जाकिर हुसैन को 97.59 फीसदी यानी 568 वोट मिले, जबकि सामंतसिंहार को मात्र 14 वोट मिले।
⦁ 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ को 74.37% यानी 528 वोट मिले। जबकि उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे विपक्ष के उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 25.63% यानी 182 वोट मिले थे।
अब तक कौन कौन चुना गया निर्विरोध
देश की आजादी के बाद पहली बार 1952 में उपराष्ट्रपति चुनाव करवाए गए।
1952 और 1957 में लगातार दो बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सर्वपल्ली राधाकृष्णन निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुने गए।
1969 में भी निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल स्वरूप पाठक उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध चुने गए।
1979 में मोहम्मद हिदायतुल्लाह उपराष्ट्रपति चुने गए।
1987 में कांग्रेस के शंकर दयाल शर्मा निर्विरोध उपराष्ट्रपति बने।
क्या जगदीप धनखड़ का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे राधाकृष्णन
मौजूदा समय में NDA के पास 55 प्रतिशत वोट हैं। गठबंधन का लक्ष्य इस आंकड़े को 60 प्रतिशत के ऊपर ले जाना है। हालांकि, पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव की बराबरी करना मुश्किल माना जा रहा है। 2022 में NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 74.4 प्रतिशत वोट मिले थे, जो उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में 3 दशक में सबसे बड़ी जीत थी।
NDA ने उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां तेज की
इससे पहले बीजेपी की अगुआई वाले NDA गठबंधन ने वोटिंग की तैयारी तेज कर दी है। उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को जीत दिलाने की रणनीति बनाई जा रही है। NDA की कोशिश है कि वोटिंग के दौरान उसके सभी सांसद सदन में मौजूद रहें। NDA ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को हर राज्य में निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। ये नेता तय करेंगे कि उनके राज्य के एनडीए सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग से गैर हाजिर नहीं रहें।
जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र के दौरान अचानक इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इलेक्शन डेट का ऐलान किया था। NDA ने सीपी राधाकृष्णन जबकि INDIA गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
तीन दिन का वर्कशॉप कराएगा NDA
चुनाव से पहले NDA सांसदों के लिए तीन दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। इनमें सांसदों को वोटिंग प्रोसेस के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा बताया जाएगा कि बैलेट पेपर पर कैसे सही निशान लगाना है, चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए पेन का कैसे इस्तेमाल करना है और वोटों को अमान्य होने से बचाने के लिए कैसे बैलेट पेपर को फोल्ड करना है। NDA का फोकस क्रॉस वोटिंग को कम करने पर है क्योंकि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता।
YSR ने समर्थन देने का ऐलान किया
उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए दोनों सदनों में 391 वोट की जरूरत है। जबकि NDA के पास 425 सांसद हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSR ने भी राधाकृष्णन को समर्थन देने का ऐलान किया है। ऐसे में इस आंकड़े में 11 सांसद और जुड़ गए हैं।
बीजेपी ओडिशा की BJD और तेलंगाना की BRS का समर्थन लेने की कोशिश में भी जुटी है। BJD के पास 7 सांसद हैं, पार्टी ने अभी तक यह नहीं बताया कि वह किसे समर्थन करेगी। ऐसे में NDA और INDIA गठबंधन दोनों ही बीजद को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे हैं।

