BJP के एक और सहयोगी दल ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब: JDS लीडर कुमारस्वामी बोले- बताएं क्या हुआ, जवाबदेही बनती है
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JDS पार्टी केन्द्र की NDA सरकार का हिस्सा है। एचडी कुमारस्वामी के पास हेवी इंडस्ट्री और स्टील मंत्रालय है।
नेशनल डेस्क। चुनाव आयोग (EC) में मतभेद के खुलासे पर अब एक और BJP के सहयोगी दल ने सवाल उठाए हैं। जनता दल (सेक्युलर) के स्टेट प्रेसिडेंट और मोदी सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर एचडी कुमारस्वामी ने इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से खुलकर सफाई देने को कहा है।
कुमारास्वामी ने कहा है कि यह किसी पार्टी या नेता की मांग का सवाल नहीं है। चुनाव आयोग खुद बताए कि उसके अंदर असल में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया में जो खबरें आ रही हैं और आयोग के अंदर की असली स्थिति, दोनों में फर्क है तो उसे आयोग के सदस्यों को देश के सामने रखना चाहिए।
इससे पहले BJP के तीन सहयोगी दलों से भी इसी तरह का रिएक्शन आ चुका है। LJP सुप्रीमो चिराग पासवान, RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा और TDP की ओर से सांसद लावु श्रीकृष्णा देवरायलु ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से खुद आकर सफाई देने की मांग की थी।
कुमारस्वामी ने क्या कहा?
कुमारस्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग एक महत्वपूर्ण और स्वतंत्र संस्था है। ऐसे में उसके तीनों सदस्यों के बीच अगर किसी मुद्दे पर कोई समस्या या मतभेद है तो इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा-क्या हो रहा है? इन तीनों चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच क्या समस्या है? गलती कहां हुई है? अगर कुछ है तो उन्हें उसे बताया जाना चाहिए।
यानी कुमारस्वामी का कहना है कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तस्वीर साफ नहीं हो सकती। आयोग के सदस्यों को खुद सामने आकर बताना चाहिए कि अंदर की वास्तविक स्थिति क्या है।
एक रिपोर्ट ने छेड़ दिया सियासी संग्राम
'द इंडियन एक्सप्रेस' की बुधवार (23 सितंबर) को आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में EC के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति जताई थी। इनमें SIR के दौरान वोटरों के नाम जोड़ने-हटाने, वोटर डेटा और नए वोटरों के लिए Form 6 से जुड़े बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे।
विपक्ष ने इस खुलासे को अपने 'वोट चोरी' और 'SIR' के खिलाफ अभियान से जोड़ते हुए पेश किया। तमाम विपक्षी पार्टियों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि वे कई सालों से चुनावों में हो रही धांधली की शिकायत कर रहे थे और अब नए खुलासे से साबित हो गया कि चुनाव आयोग केन्द्र की मोदी सरकार के दबाव में काम कर रहा है। इस मद्दे पर विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
हालांकि चुनाव आयोग इस रिपोर्ट को खारिज कर रहा है। खुलासे के फौरन बाद EC की ओर से सफाई के तौर पर एक प्रेस रिलीज जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि किसी मुद्दे पर चर्चा और अलग-अलग राय होना कामकाज की सामान्य प्रोसेस का हिस्सा है। आयोग का दावा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए।
यानी विपक्ष जहां इन आपत्तियों को गंभीर सवाल मान रहा है, वहीं आयोग का कहना है कि अंदर चर्चा होना किसी विवाद या फैसले में टूट का सबूत नहीं है।
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BJP के किस सहयोगी ने क्या कहा?
केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष क्या कह रहा है, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि विपक्ष का काम राजनीति करना है। लेकिन चुनाव आयोग को जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। अगर चुनाव आयोग पर ऐसे सवाल उठ रहे हैं तो आयोग और खास तौर पर CEC की जिम्मेदारी है कि वह मजबूती से अपना पक्ष रखें। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्शन प्रोसेस को लेकर अगर लोगों के मन में शक पैदा होता है तो यह ठीक नहीं है।
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा- SIR से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। इसे एड्रेस करने की जरूरत है। कंफ्यूजन दूर करने के लिए चुनाव आयोग को बिना देर किए सफाई देना चाहिए।
TDP की ओर से सांसदलावु श्रीकृष्णा देवरायलु ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे हमारे लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसलिए, जब भी कोई सवाल उठाता है, तो आयोग को स्पष्टीकरण देना जरूरी है। संस्था में पारदर्शिता बनाए रखने से जनता के विश्वास को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

