बिहार इलेक्शन से पहले चुनाव आयोग का फरमान: नए सिरे से वोटर लिस्ट की जांच होगी; वैरिफाइड डॉक्यूमेंट वाले ही वोट डाल पाएंगे
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बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में जरूरी परिवर्तन करने का निर्देश दिया है। इसके लिए विशेष जांच प्रक्रिया (Special Intensive Revision) की घोषणा की गई है। इसके तहत सिर्फ उन व्यक्तियों के ही नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे, जिनके पास भारतीय नागरिक होने के पुख्ता सबूत और वैरिफाइड डॉक्यूमेंट होंगे।
इसके अलावा जो लोग 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं थे, उन्हें वोटर बनने के लिए अपनी जन्म-तिथि और जन्म-स्थान का प्रमाण पत्र देना होगा। खासकर वे लोग, जो 1 जुलाई 1987 के बाद पैदा हुए हैं। अभी यह बदलाव सिर्फ बिहार में लागू होगा, बाद में अन्य राज्यों में भी किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के तहत ये बदलाव होंगे..
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जिनका नाम 2003 की वोटिंग लिस्ट में नहीं था, उन्हें आवेदन के लिए एक फॉर्म भरना होगा।
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वोटर्स को खुद से साइन किया हुआ (सेल्फ-अटेस्टेड) नागरिकता का घोषणा पत्र देना होगा।
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जन्म-तिथि और जन्म-स्थान साबित करने के लिए 11 में से कोई एक दस्तावेज देना होगा जैसे, बर्थ सर्टिफिकेट या पासपोर्ट।
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1 जुलाई 1987 से पहले जन्में लोगों को सिर्फ अपना बर्थ सर्टिफिकेट देना होगा।
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1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्में लोगों को बर्थ डेट और बर्थ प्लेस सर्टिफिकेट दोनों देने होंगे। साथ ही माता या पिता में से किसी एक का डॉक्यूमेंट सबमिट करना होगा।
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2 दिसंबर 2004 के बाद पैदा हुए लोगों को अपने साथ-साथ माता और पिता दोनों के दस्तावेज देने जरूरी होंगे।

ऐसा क्यों किया जा रहा है
बीते कुछ सालों में शहरीकरण, माइग्रेशन और अप्रवासी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़ने से कई समस्याएं सामने आई हैं। इससे वोटर लिस्ट में गलत नाम जुड़ जाते हैं। कई बार तो मृतकों के नाम भी नहीं हटाए जाते। राजनीतिक दलों ने भी वोटर लिस्ट में धांधली का मुद्दा उठाया था।
प्रक्रिया कैसे चलेगी
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बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर लोगों की जानकारी और दस्तावेज चेक करेंगे।
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संबंधित अधिकारी जमा किए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर फील्ड में जाकर पुष्टि भी करेंगे।
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सभी जांच के बाद अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
अभी सिर्फ बिहार में शुरू होगी
यह प्रक्रिया पहले बिहार में शुरू होगी, क्योंकि साल के अंत में यहां चुनाव होने हैं। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में भी यह सुधार प्रक्रिया चलाई जाएगी। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत उठाया गया है। इस अनुच्छेद के तहत सिर्फ भारतीय नागरिकों को वोट देने का अधिकार है।

