बिहार चुनाव 2025: वोटर लिस्ट संशोधन पर मचा बवाल, चुनाव आयोग ने मांगे कौन से 11 दस्तावेज; जानें सबकुछ
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11 दस्तावेज में से कोई एक दस्तावेज नहीं होने लोग वोट नहीं डाल पाएंगे।
बिहार चुनाव की तैयारियों को लेकर चुनाव आयोग वोटर्स वेरिफिकेशन कर रहा है। चुनाव आयोग ने जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं हैं, उन लोगों से 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज मांगा है। उन्हें अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए 11 में से कोई एक दस्तावेज को जमा करना होगा। बिहार में ऐसे वोटर्स की संख्या 2.93 करोड़ है।
इन दस्तावेजों में पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और शिक्षा बोर्ड का प्रमाण पत्र सहित कई डॉक्यूमेंट हैं, हालांकि जिन मान्य दस्तावेजों की चुनाव आयोग ने लिस्ट जारी की है, उनमें आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग बिहार की 20 प्रतिशत गरीब जनता से उनके वोटिंग का अधिकार छीनना चाहती है।
चुनाव आयोग ने 24 और 30 जून को जारी किए गए 2 स्टेटमेंट के पीछे कारण के बताए हैं। जिसमें विदेशी अवैध अप्रवासी, बार- बार प्रवास होना, युवा नागरिक जो वोट डालने के पात्र है और मौत की जानकारी नहीं देना शामिल है।
चुनाव आयोग ने 24 जून से 25 जुलाई तक विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) के निर्देश दिए है। चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं से जरुरी दस्तावेज जमा करने के लिए कहा था।
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, 11 दस्तावेज की सूची सांकेतिक है, संपूर्ण नहीं। क्योंकि जनप्रतिनिधि अधिनियम 1950 के तहत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (EROs) को ही निर्वाचन नामावली बनाने का अधिकार है और चुनाव आयोग केवल गाइडलाइन जारी कर सकता है। अंतिम फैसला ERO का ही होता है।
चुनाव आयोग के अनुसार लोगों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इन 11 में से एक दस्तावेज की जरुरत होगी।
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केंद्रीय सरकार/ राज्य सरकार/ पीएसयू के नियमित कर्मचारी/ पेंशनभोगी को जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र/ पेंशन पेमेंट आदेश:
बिहार के कास्ट सर्वे-2022 के अनुसार 20.49 लाख लोग सरकारी जॉब करते हैं। यह बिहार की जनसंख्या का 1.57 प्रतिशत है। इन लोगों के पास ही यह डॉक्युमेंट मिल पाएंगे।
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01.07.1987 से पहले भारत सरकार/ स्थानीय प्राधिकरण/ बैंक/ डाकघर/ LIC/ पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाणपत्र/दस्तावेज शामिल हैं।
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सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र:
जन्म प्रमाण पत्र राज्य सरकार के नियुक्ति स्थानीय रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव, ब्लॉक विकास अधिकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अधिकारी जन्म प्रमाण पत्र बनाता है। शहरों में नगर निगम, नगर पालिका और परिषद बनाती हैं। 2000 में भारत सरकार ने जन्म रजिस्ट्रर डाटा रिकॉर्ड करना शुरु किया था, उस साल बिहार में 1.19 लाख लोगों का बर्थ रजिस्ट्रर हुआ था। यह बिहार में अनुमानित बर्थ का सिर्फ 3.7 था। ऐसे में कई लोगों के पास बर्थ सर्टिफिकेट नहीं होगा। -
पासपोर्ट
भारत का विदेश मंत्रालय पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी करता है। 2023 तक बिहार में कुल 27.44 लाख लोगों के पास पासपोर्ट है। यह राज्य की जनसंख्या का सिर्फ 2 प्रतिशत है। इस तरह कई लोग यह दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने नहीं रख पाएंगे। -
मान्यता प्राप्त बोर्ड/ यूनिवर्सिटी द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र/ शैक्षणिक प्रमाण पत्र:
बिहार की जाति जनगणना 2022 के मुताबिक 14 प्रतिशत लोग 10वीं पास हैं। इस तरह से कई लोगों के पास यह दस्तावेज भी नहीं मिल पाएंगे। -
स्थायी निवास सर्टिफेकट
यह दस्तावेज प्रमाणित करता है कि आवेदक यहां का स्थायी निवासी है। स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, शिक्षा विभाग का प्रमाण पत्र और शपथ पत्र की जरुरत होती है। फॉर्म विकासखंड अधिकारी या फिर कार्यकारी मजिस्ट्रेट के यहां जमा करना होता है। जिसमें 15 दिन से अधिक का समय लगता है। -
वन अधिकार सर्टिफेकट
जनजातीय कार्य मंत्रालय के डाटा के अनुसार, 1 जून 2025 तक बिहार 191 लोगों को वनअधिकार सर्टिफिकेट प्राप्त हुए हैं। -
OBC, SC और ST का जाति सर्टिफिकेट
बिहार के कास्ट सर्वे 2022 के अनुसार 2022 तक बिहार की टोटल पॉपुलेशन 13.7 करोड़ हैं। इसमें OBC 3.54 करोड़ (27%), आर्थिक रुप से पिछड़ा वर्ग (EBCs) 4.70 करोड़ (36%), SC 2.6 करोड़ (20%) और ST 22 लाख (1.6%) हैं। हालांकि कितने लोगों के पास कास्ट सर्टिफिकेट मौजूद है, इसका डाटा उपलब्ध नहीं है। -
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC):
बिहार में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू नहीं है। इसलिए यह दस्तावेज किसी के पास नहीं मिलेगा। -
राज्य सरकार द्वारा जारी परिवार रजिस्ट्रर ID:
परिवार आईडी के लिए ग्राम पंचायत या फिर म्यूनिसिपल ऑफिस में डॉक्यूमेंट जमा करना होता है। इसके लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, बर्थ सर्टिफिकेट और मैरिज सर्टिफिकेट की जरुरत होती है। अधिकारी वेरिफिकेशन के लिए फील्ड वीजिट भई करते हैं। -
सरकार द्वारा जारी किसी भी जमीन का सर्टिफिकेट
बिहार की एक बड़ी आबादी के पास खुद की जमीन नहीं है। 2011 की जनगणना के मुताबिक 65.58 ग्रामीण आबादी में से 1.78 करोड़ लोगों के पास खुद की जमीन नहीं है।
अगर किसी के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलता है, EC के निर्देश के पैराग्राफ के 5B के अनुसार, संबंधित अधिकारी नागरिकता अधिनियम के तहत ‘संदिग्ध विदेशी नागरिकता मामलों’ के पास शिकायत कर सकता है।

