विधानसभा चुनाव 2025: बिहार की राजनीति में क्यों टूटते हैं गठबंधन? 28 साल में 14 बड़े अलायंस बने, इनमें से 12 टूटे
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बिहार की राजनीतिक देश के बाकी हिस्सों से काफी अलग हैं। यहां गठबंधन की राजनीति का खूब बोलबाला रहा। 2025 में भी जदयू-बीजेपी गठबंधन वाले NDA का सामना राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से होगा।
बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 तक है। इससे पहले राज्य में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। 2020 में 29 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच तीन चरणों में चुनाव हुए थे। चुनाव आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां तेज कर दी है। उधर, जदयू, राजद, बीजेपी, कांग्रेस और एलजेपी समेत तमाम राजनीतिक दलों ने भी तैयारी तेज कर दी है। ज्यादातर राजनीतिक दल गठबंधन को लेकर भी स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
महागठबंधन (राजद, कांग्रेस और वाम दल) ने दो सीट शेयरिंग पर भी चर्चा शुरू कर दी है। वहीं, नीतीश कुमार बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने का पूरे दमखम के साथ दावा कर रहे हैं। हालांकि, बिहार में गठबंधन राजनीति का पुराना इतिहास रहा है। यहां जितनी तेजी से गठबंधन बने, उतनी ही तेजी से गठबंधन टूटे। 1996 से अब तक बिहार में 14 गठबंधन बने, इनमें से 12 टूटे। आइए बिहार में गठबंधन के इतिहास के बारे में जानते हैं...
अभी किस पार्टी का किससे गठबंधन?
| गठबंधन | NDA | महागठबंधन |
| पार्टियां | BJP, JDU, HAM, LJP (रामविलास), RLM (उपेंद्र कुशवाहा) | RJD, कांग्रेस, वीआईपी, वाम दल (भाकपा-माले (लिबरेशन), CPI, CPI(M)) |
1- 1995: समता पार्टी का वामपंथी दल (CPI-ML) के साथ गठबंधन
- 1994 में जनता दल से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार समेत कुछ अन्य नेताओं ने मिलकर समता पार्टी बनाई।
- 1995 के विधानसभा चुनाव में समता पार्टी और CPI(ML) ने कुछ विधानसभा सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया।
- यह गठबंधन कुल 30–35 सीटों पर सीमित था
कब और क्यों टूटा?
वैचारिक मतभेद और NDA से समता पार्टी की करीबी की वजह से ये गठबंधन 1996 आते-आते टूट गया।
2- 1996 में समता पार्टी/जदयू + NDA गठबंधन, 2013 में टूटा
- समता पार्टी ने 1996 में ही NDA के साथ गठबंधन किया। 2003 में समता पार्टी का विलय जदयू में हो गया। विलय के बाद जदयू-NDA का गठबंधन बना।
- नीतीश कुमार 1996 से 2013 के बीच तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। वे 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000, 24 नवंबर 2005 से 26 नवंबर 2010 और 6 नवंबर 2010 से 17 मई 2014 तक सीएम रहे।
- वे 1996 से 2004 के बीच NDA सरकार में रेल मंत्री, कृषि मंत्री, और भूतल परिवहन मंत्री जैसे अहम मंत्रालयों में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
कब और क्यों टूटा?
गठबंधन 2013 में टूटा। बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को पीएम चेहरा घोषित किया। इससे नाराज होकर नीतीश कुमार ने अपनी राहें अलग कर लीं।
3- 1998 में राजद-कांग्रेस का गठबंधन
- चारा घोटाले में नाम आने के बाद लालू यादव को जनता दल से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 5 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का गठन किया।
- 1998 में लालू यादव की राजद ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया।
कब और क्यों टूटा?
बिहार में 2000 में विधानसभा चुनाव हुए। राजद और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी। लेकिन कुछ समय बाद ही राजद और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया। इसके पीछे मुख्य वजह सत्ता बंटवारे को लेकर असहमति थी।
4- 2004 में साथ आए RJD, LJP और कांग्रेस
- 2004 लोकसभा चुनाव में NDA को सत्ता से बाहर रखने के लिए राजद, राम विलास पासवान की एलजेपी और कांग्रेस ने गठबंधन किया।
- इस गठबंधन का उद्देश्य बिहार के मुस्लिम, यादव और दलित वोटरों को एक साथ लाने का था।
कब और क्यों टूटा?
ये गठबंधन 2005 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान नेतृत्व की जंग, सीट बंटवारे में असहमति की वजह से टूट गया।
5- 2010 में फिर करीब आए RJD और LJP
- नीतीश कुमार को बिहार की सत्ता से बेदखल करने के लिए लालू यादव की राजद और राम विलास पासवान की एलजेपी ने गठबंधन किया।
- गठबंधन के तहत राजद ने 168 और एलजेपी ने 75 सीटों पर चुनाव लड़ा। लेकिन चुनाव में जदयू-एनडीए की जोड़ी के सामने गठबंधन को बुरी हार का सामना करना पड़ा।
- दोनों पार्टियां मिलकर सिर्फ 25 सीटें जीत सकीं, जबकि जदयू-एनडीए को 206 सीटों पर जीत मिली।

कब और क्यों टूटा गठबंधन?
2010 विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह गठबंधन कमजोर हो गया। 2014 में एलजेपी गठबंधन से बाहर हो गई।
6- 2014 में बीजेपी और एलजेपी का गठबंधन
- 2013 में नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपना 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद बीजेपी को बिहार में नए साथी की तलाश थी।
- राम विलास पासवान ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले NDA में शामिल होकर यह तलाश पूरी कर दी।
खटास हुई, लेकिन अभी भी गठबंधन बरकरार
रामविलास पासवान के निधन (2020) के बाद, पार्टी में नेतृत्व को लेकर मतभेद उभरे। पशुपति पारस (चाचा) ने 5 में से 4 सांसदों को लेकर LJP को विभाजित कर दिया। चिराग पासवान अकेले सांसद रह गए, लेकिन उन्होंने खुद को "LJP (रामविलास)" का असली वारिस बताया। BJP ने शुरू में दोनों गुटों (पारस और चिराग) से बराबर दूरी बनाए रखी। 2021 में पारस गुट की NDA में एंट्री हुई, उन्हें मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया।
7- उपेंद्र कुशवाहा की RLSP ने NDA से गठबंधन किया
- उपेंद्र कुशवाहा को 2007 में जदयू से बाहर किया गया था। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2009 में राष्ट्रीय समता पार्टी (RSP) का गठन किया। हालांकि, नवंबर 2009 में उन्होंने अपनी पार्टी का विलय जदयू में कर लिया।
- 2013 में उन्होंने जदयू से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) बनाई। उधर, नीतीश 2013 में एनडीए से अलग हो चुके थे। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की RLSP NDA में शामिल हो गई। RLSP ने NDA के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा और तीनों सीटों पर जीत हासिल की। उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय मंत्री बने।
कब और क्यों टूटा गठबंधन?
दिसंबर 2018: सीट बंटवारे में उपेक्षा और अपमान का आरोप लगाकर कुशवाहा ने NDA से नाता तोड़ा और केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद वे महागठबंधन के साथ शामिल हो गए। 2019 लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी सीटें हार गए।
8- 2015 में बिहार में महागठबंधन बना, जदयू-राजद और कांग्रेस साथ आईं
- नीतीश कुमार ने 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ा था। इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जदयू 40 में से सिर्फ 2 सीटें जीतने में सफल रही।
- इसके बाद 2015 चुनाव के लिए नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी।

कब और क्यों टूटा गठबंधन?
2017 में नीतीश कुमार ने RJD के तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर गठबंधन तोड़ा। एनडीए में शामिल हुए.
9- 2017 में नीतीश कुमार फिर बीजेपी के साथ आए
- 2017 में महागठबंधन से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार फिर एनडीए में शामिल हो गए और बीजेपी के समर्थन से सीएम बने।
- 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा और फिर सीएम बने।
कब और क्यों टूटा गठबंधन?
2022 में नीतीश कुमार ने बीजेपी पर जदयू को तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया और गठबंधन तोड़ दिया।

10- 2020 में मुकेश सहनी की VIP पार्टी NDA में शामिल हुई
- 2020 में मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी महागठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हुई। विधानसभा चुनाव में जदयू, बीजेपी, वीआईपी और हम साथ चुनाव लड़ी।
- मुकेश सहनी की पार्टी को 11 सीटें दी गईं। वीआईपी ने चार सीटें जीतीं। मुकेश सहनी खुद चुनाव हार गए। इसके बावजूद नीतीश सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया।
कब और क्यों टूटा गठबंधन?
2021–2022 में बीजेपी और वीआईपी में टकराव बढ़ने लगे। मुकेश सहनी खुद को दलित निषाद नेता के रूप में पेश करने लगे। उन्होंने यूपी में भी बीजेपी के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे। उधर, मार्च 2022 में BJP ने VIP के तीन विधायक अपने पाले में कर लिए। मुकेश सहनी से मंत्रिपद छीन लिया गया। इसके बाद वीआईपी एनडीए से बाहर हो गई।
11- LJP और JDU में तकरार
- 2019 में बीजेपी, जदयू और एलजेपी ने साथ में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन 2020 तक जदयू और एलजेपी के रिश्तों में तकरार आ गई।
- 2020 विधानसभा चुनाव में चिराग ने नीतीश मुक्त बिहार का नारा दिया था। जबकि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे। इसके बावजूद चिराग पासवान ने JDU के खिलाफ 40 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे। भले ही चिराग की पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई, लेकिन इसके चलते जदयू को भारी नुकसान हुआ।
12- 2022 में JDU फिर महागठबंधन में शामिल हुई
- 2022 में एनडीए से नाता तोड़ने के बाद जदयू ने राजद, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के साथ हाथ मिलाया और सीएम बने।
कब और क्यों टूटा गठबंधन?
यह गठबंधन भी नीतीश कुमार को रास नहीं आया। उन्होंने जनवरी 2024 में अपमान का मुद्दा बताकर महागठबंधन से नाता तोड़ लिया और फिर बीजेपी के साथ आ गए।
13- चिराग पासवान गुट NDA में शामिल
- 2020 में चिराग पासवान गुट ने भले ही जदयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन बीजेपी को लेकर उनका रुख हमेशा नरम रहा।
- चिराग पासवान ने खुद को पीएम मोदी का हनुमान भी बताया। 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च में वे एनडीए में शामिल हुए। उनके गुट को बिहार में 5 लोकसभा सीटें मिलीं।
- इन सभी पर एलजेपी (रामविलास पासवान) ने जीत हासिल की। वहीं, उनके चाचा पशुपति पारस एनडीए का हिस्सा तो रहे लेकिन उन्हें गठबंधन में एक भी सीट नहीं मिली।
यह गठबंधन अभी भी बरकरार है।
14- 2024 में नीतीश फिर एनडीए में हुए शामिल
- जनवरी 2024 में नीतीश कुमार फिर एनडीए में शामिल हो गए। अभी वे बीजेपी के समर्थन से सीएम हैं. इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव 2024 में भी उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और केंद्र में एनडीए सरकार का हिस्सा हैं।

