बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन: चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार; 10 जुलाई को होगी सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
सुप्रीम कोर्ट बिहार में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट रिवीजन कराने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस मामले में 10 जुलाई को सुनवाई होगी।
दरअसल, बिहार में इस साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले 24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) कराने का ऐलान किया था। इसे लेकर राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है।
SIR की जरूरत क्यों
चुनाव आयोग के मुताबिक, लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने, तेजी से बढ़ते शहरीकरण की दृष्टि से वोटर लिस्ट रिवीजन कराना जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट को गलतियों रहित बेहतर बनाया जा सकेगा। EC का कहना है कि वह संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के तहत दिए नियमों के अनुसार काम कर रहा है।
विपक्ष कर रहा विरोध
चुनाव आयोग के इस फैसले का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि इससे बीजेपी और RSS बिहार में गरीबों के मतदान का अधिकार खत्म करना चाहती है। इतना ही नहीं इस प्रक्रिया में आधार कार्ड को मान्य न करने पर भी तेजस्वी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, एक तरफ चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से आधार लिंक करने की कवायत कर रहा है तो दूसरी ओर रिवीजन में इसे मान्य दस्तावेज नहीं माना है। यह उनकी अप्रोच को दर्शाता है। वहीं, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तो इसे चुनाव आयोग द्वारा गुप्त तरीके से एनआरसी लागू करना बताया है।
पिछले दिनों 10 विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी और इस मुद्दे को उठाया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया से बिहार के 2 करोड़ से ज्यादा लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
चुनाव आयोग ने मांगे ये 11 दस्तावेज
- कोई भी पहचान पत्र या केंद्र या राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों या पेंशन भोगियों को मिलने वाला पेंशन भुगतान आदेश
- 1 जुलाई 1987 से पहले जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र/ प्रमाण पत्र/ सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफ़िस, एलआईसी या पीएसयू की ओर से जारी कोई भी दस्तावेज
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- मान्यता प्राप्त बोर्ड/ यूनिवर्सिटी द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र/ शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- राज्य सरकार की किसी संस्था की ओर से जारी मूल निवास प्रमाण पत्र
- ओबीसी, एससी या एसटी का जाति प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- राज्य सरकार या स्थानीय निकाय का फैमिली रजिस्टर
- सरकार की ओर से जारी घर या जमीन का प्रमाण पत्र
- एनआरसी ( बिहार में लागू नहीं)

