फाइटर पायलट भावना कंठ को क्यों कहा जा रहा ‘टॉप गन’: इस शब्द का मतलब क्या, देश की पहली महिला स्क्वाड्रन लीडर ने अब क्या नया कीर्तिमान रचा
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भावना कंठ भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट शामिल होने वाली सबसे पहली तीन महिलाओं की लिस्ट में शामिल हैं।
नेशनल डेस्क। भारतीय वायुसेना की फाइटर पायलट स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक और बड़ा कीर्तिमान रच दिया है। वह इंडियन एयरफोर्स के बेहद मुश्किल Fighter Combat Leader कोर्स को पूरा करने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं। करीब 20 हफ्ते की खास ट्रेनिंग के बाद भावना अब उन चुनिंदा पायलटों में शामिल हो गई हैं, जिन्हें बेहद मुश्किल कॉम्बैट मिशन की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार किया जाता है।
भावना ने ग्वालियर स्थित Tactics and Air Combat Development Establishment (TACDE) से यह कोर्स पूरा किया है। TACDE को एयरफोर्स की सबसे खास और कठिन ट्रेनिंग सेंटर में गिना जाता है।
20 हफ्ते के इस कोर्स में पायलटों को हवा में लड़ाई के दौरान सही फैसला लेने, हथियारों का सटीक इस्तेमाल, अलग-अलग एयर कॉम्बैट तकनीक और फ्रंटलाइन ऑपरेशन की तैयारी कराई जाती है। औसतन एयरफोर्स के करीब 100 पायलटों में से सिर्फ एक को इस पांच महीने के बेहद चुनिंदा कोर्स के लिए चुना जाता है।

भावना कंठ को क्यों कहा जा रहा ‘टॉप गन’
सोशल मीडिया से लेकर हर जगह भावना कंठ के लिए ‘टॉप गन’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि TACDE को भारत का टॉप गन कहा जाता है और यहां से FCL कोर्स पूरा करने वाले पायलट को भी यह नाम दे दिया जाता है। हालांकि यह कोई ऑफिशियल पद या नाम नहीं है। इसके पीछे एक अलग स्टोरी है।
दरअसल, 1986 में टॉम क्रूज की एक मूवी आई थी। नाम था TOP GUN। इसमें वह एक फाइटर पायलट की भूमिका में थे। इसी मूवी ने इस शब्द को फेमस किया था। इसी दौरान अमेरिका का United States Navy Strike Fighter Tactics Instructor program (SFTI) 'टॉप गन' के नाम से फेमस हुआ। इस प्रोग्राम में फाइटर पायलट बेहद एडवांस तकनीक और बारीकियां सीखते हैं। हालांकि यहां पर पायलटों को इंस्ट्रक्टर के तौर पर तैयार किया जाता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी खास ऑपरेशन की जिम्मेदारी मिलती है। यही कारण है कि 80 के दशक के बाद दुनियाभर में एलिट फाइटर पायलट प्रोग्राम को इस नाम की संज्ञा दे दी जाती है।

देश की पहली महिला फाइटर की तिकड़ी में नाम
भावना कंठ बचपन से ही फाइटर पायलट बनना चाहती थीं। यह सपना उन्होंने तब देखा, जब भारत में महिलाओं के हाथ में फाइटर प्लेन देने का रिवाज नहीं था। 2016 में उन्होंने यह परंपरा तोड़ी और देश की पहली तीन महिला फाइटर में खुद का नाम दर्ज कराया। अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ वह भी भारतीय वायुसेना में बतौर फायटर पायलट शामिल हुईं। उस वक्त भावना ने कहा था कि उन्होंने बचपन के सपने को मौका मिलते ही हासिल कर लिया।
भावना ने नवंबर 2017 में फाइटर स्क्वाड्रन जॉइन किया। वह ऐसा करने वाली पहली महिला थी। मार्च 2018 में उन्होंने MiG-21 Bison से अपनी पहली सोलो उड़ान भरी। इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स के सबसे ताकतवर फाइटर जेट्स में शामिल Sukhoi-30MKI को भी उड़ाया। उनका सफर आगे भी इसी तरह जारी रहा।
‘रिपब्लिक डे’ पर रचा इतिहास
2021 में भावना कंठ ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह रिपब्लिक डे की परेड और फ्लाईपास्ट में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। यानी जिस कॉकपिट में कभी महिलाओं के लिए जगह नहीं थी, उसी कॉकपिट से भावना ने गणतंत्र दिवस के दिन आसमान में अपनी ताकत दिखाई।

विदेश में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया
2024 में भावना कंठ सऊदी अरब के रियाद में आयोजित World Defence Show में भारत की तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों के एक डेलिगेशन का हिस्सा थीं। वहां उन्होंने महिलाओं को डिफेंस फोर्सेज में ज्यादा मौके देने और उन्हें बड़े नेतृत्व वाले पदों तक पहुंचाने की जरूरत पर बात की थी।
भावना सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहतीं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 11 हजार फॉलोअर्स हैं और उनका अकाउंट प्राइवेट है। उनके प्रोफाइल से पता चलता है कि फाइटर जेट्स के अलावा उन्हें खाना, फिटनेस और घूमना-फिरना भी पसंद है।
एक के बाद एक रिकॉर्ड बनाती गईं भावना
पहली तीन महिला फाइटर पायलटों में शामिल होने से लेकर MiG-21 की पहली सोलो उड़ान, गणतंत्र दिवस पर फाइटर पायलट के तौर पर फ्लाईपास्ट और अब एयरफोर्स के सबसे मुश्किल कॉम्बैट कोर्स को पूरा करने तक भावना कंठ ने लगातार नए मुकाम हासिल किए हैं।
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