5 साल से छोटे बच्चों को भी 5 लाख का मुफ्त इलाज मिले: 60+ बुजुर्गों को भी दायरे में लाने की मांग; आयुष्मान भारत के लिए संसदीय समिति की सिफारिशों की लिस्ट
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2018 में आयुष्मान भारत योजना लॉन्च की गई थी। इस योजना का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
नेशनल डेस्क। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) का दायरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि 5 साल से कम उम्र के सभी बच्चों और 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को इस योजना में शामिल किया जाए।
'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पैनल ने कहा है कि इसके लिए परिवार की आर्थिक स्थिति या व्यक्ति के शहर-गांव में रहने की शर्त नहीं होनी चाहिए। यानी समिति चाहती है कि इन दोनों आयु वर्गों को बिना किसी आर्थिक या भौगोलिक भेदभाव के हेल्थ कवर मिले।
पैनल का मानना है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की बीमारियों पर होने वाला इलाज का खर्च कई परिवारों पर भारी पड़ता है। इसलिए इन दोनों वर्गों को योजना के दायरे में लाना देश में सभी के लिए इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

अभी 70+ उम्र के बुजुर्गों को मिल रहा है लाभ
आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसके तहत आर्थिक तौर पर पिछड़े परिवारों को हर साल 5 लाख रुपए तक का अस्पताल में इलाज का कवर मिलता है। योजना गंभीर बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले इलाज को कवर करती है।
बाद में सरकार ने 70 साल और उससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को इसका हितग्राही बना दिया। इसके लिए कोई आर्थिक स्थिति की शर्त नहीं रखी गई। इसके बाद योजना का लाभ 37 लाख से ज्यादा ASHA, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों तक भी बढ़ाया गया।
अब संसदीय समिति ने इस दायरे को और बढ़ाकर 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को शामिल करने की सिफारिश की है। साथ ही 5 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को भी इसके दायरे में लाने की सलाह दी है। समिति के मुताबिक, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार को पर्याप्त बजट रखना होगा। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों का नाम योजना में जोड़ने की प्रोसेस आसान बनानी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें वक्त पर इलाज मिल सके।
सिर्फ अस्पताल का इलाज नहीं, दवाइयां और जांच भी कवर हों
रिपोर्ट में कहा गया है कि संसदीय समिति ने आयुष्मान भारत योजना के मौजूदा दायरे को लेकर भी अहम सुझाव दिए हैं। समिति चाहती है कि योजना में महज अस्पताल में भर्ती होने के इलाज का खर्च ही नहीं, बल्कि डॉक्टर से OPD में जांच और सलाह, जरूरी डायग्नोस्टिक टेस्ट, दवाइयों का खर्च,
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद का इलाज और देखभाल को भी शामिल किए जाएं।

सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने पर भी जोर
पैनल ने प्राइवेट हॉस्पिटल पर योजना की ज्यादा निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई है। पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज की कैपिसिटी अभी पर्याप्त नहीं है। इसके कारण PM-JAY के तहत इलाज कराने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा प्राइवेट अस्पतालों में जाता है।
समिति ने सुझाव दिया कि सरकारी अस्पतालों, खासकर बड़े और विशेषज्ञ इलाज देने वाले अस्पतालों की क्षमता तेजी से बढ़ाई जानी चाहिए। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी और सरकारी हेल्थ सिस्टम मजबूत होगा।
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