राम मंदिर ट्रस्ट का CEO कौन होगा: बुधवार को 3 नामों पर होगा विचार; चंदा चोरी की घटना के बाद तीसरी मीटिंग
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चंदा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की यह तीसरी मीटिंग है। इसी मीटिंग में CEO के नाम का ऐलान किया जाएगा।
नेशनल डेस्क. अयोध्या में बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मीटिंग होगी। इस बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट CEO का नाम तय करेगा। बैठक 2 शिफ्ट में आयोजित होगी। पहली शिफ्ट दोपहर 2 बजे से 3 बजे और दूसरी शिफ्ट 4 से शाम 6 बजे के बीच होगी। इस मीटिंग में 12 प्वाइंट पर चर्चा होगी।
चंदा चोरी की घटना के बाद ये ट्रस्ट की तीसरी मीटिंग है। CEO के अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरु हुई थी। कमेटी ने 5,585 कैंडिडेट में से 111 के ऑनलाइन इंटरव्यू लिए गए। जबकि 16 कैंडिडेट को फेस टू फेस इंटरव्यू के लिए बुलाया था।
स्क्रीनिंग कमेटी ने 3 कैंडिडेट सलेक्ट किए
स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमेन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और साइंटिस्ट-इंडस्ट्रियलिस्ट सुरेश हवारे सोमवार देर रात अयोध्या पहुंचे। कमेटी ने ट्रस्ट चेयरमेन महंत नृत्य गोपाल दास महाराज को सीलबंद लिफाफे में 3 शॉर्ट लिस्ट नाम सौंपे हैं। इन 3 शॉर्ट लिस्ट पर मीटिंग में विचार किया जाएगा। और बुधवार को ही CEO के नाम की घोषणा हो जाएगी।
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'पारदर्शिता लाने के लिए CEO जरूरी'
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने कहा- प्रोफेशनल एडमिनिस्ट्रेशन और पारदर्शिता लाने के लिए एक फुल-टाइम CEO का होना बहुत जरूरी है। ट्रस्ट ने कहा- वह CEO के अधिकार तय करेगा और इसमें सरकार का कोई दखल नहीं होगा। CEO ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे और उनसे लंबे समय के लिए योजनाएं बनाएंगे।
CEO के लिए क्या हैं शर्तें?
ट्रस्ट ने इस पद के लिए कुछ खास शर्तें तय की हैं। इनके मुताबिक, उम्मीदवार का हिंदू धर्म को मानने वाला और हिंदू परंपराओं और नियमों का पालन करने वाला होना जरूरी है। शुद्ध शाकाहारी होना और शराबी न होना भी इसके पैमाने हैं। इसी आधार पर छंटनी हुई और 3 कैंडिडेट को सलेक्ट किया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी सिर्फ मंदिर के रोजमर्रा के काम देखने तक सीमित नहीं है। वह राम मंदिर के प्रशासन, मैनेजमेंट और ट्रस्ट से जुड़े बिजनेस को भी संभालेगा।
राम मंदिर ट्रस्ट को CEO की जरूरत क्यों पड़ी?
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO नियुक्त करने का फैसला ऐसे वक्त में लिया गया, जब जून के पहले हफ्ते में मंदिर के दान की रकम में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। डोनेशन काउंटिंग से लेकर मंदिर के मैनजमेंट में हुई अनियमितताओं को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया। ट्रस्ट को उम्मीद है कि CEO की नियुक्ति से मंदिर के प्रशासन और आर्थिक मामलों को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सकेगा।

