असम में नाव से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे: मरीजों और प्रेगनेंट महिलाओं को भी दिक्कत; लाली और बुरी साउती नदी पर लंबे समय ये पुल नहीं
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लाली नदी और बुरी साउती नदी पार करते हुए स्टूडेंट्स।
एजुकेशन डेस्क. असम के धेमाजी जिले के चेंगाजन गोवाला गांव में आज के समय में भी स्कूली बच्चों नदी पार करके स्कूल जा रहे हैं। दरअसल गांव में लाली नदी और बुरी साउती नदी पर अब तक कोई पुल नहीं बनाया गया, जिसके कारण बच्चों को नाव के जरिए इसे पार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना नाव से नदी पार करना न सिर्फ परेशानी भरा है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
यह गांव जोनाई विधानसभा क्षेत्र के अंदर आता है। चेंगाजन कैवर्त एमई स्कूल के छात्रों के साथ-साथ आसपास के इलाकों के बच्चे भी स्कूल जाने के लिए इन नदियों को नाव से ही पार करते हैं।
पानी में गिरने का डर हमेशा बना रहता है
स्थानीय निवासी चंदन माझी ने ANI से बातचीत में बताया कि नदी में तेज बहाव और नावों की सीमित संख्या के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा- जब बच्चों को छोटी नाव से नदी के पार ले जाया जाता है, तो हमेशा डर बना रहता है कि कहीं वे पानी में न गिर जाएं। वहीं जब बच्चों के पास कोई नाव उपलब्ध नहीं होती है, तो उन्हें स्कूल जाने में देरी का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है।
सभी लोगों को करना पड़ता है नाव का इंतजार
यह समस्या सिर्फ स्कूली बच्चों तक सीमित नहीं है। मरीज, गर्भवती महिलाएं, किसान, व्यापारी और बाकी स्थानीय लोग भी नदी पार करने के लिए नावों पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय नाव नहीं मिलने से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना या दवाइयां लाना मुश्किल हो जाता है। इसी के साथ स्थानीय लोगों ने इलाके में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की भी मांग की है। इनमें सब-हेल्थ सेंटर और वेटरनरी सर्विस शामिल हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि लाली नदी और बुरी साउती पर पुल बनने से आवाजाही सुरक्षित होगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

