गैंगस्टर अरुण गवली का बायकुला में जोरदार स्वागत: 18 साल से जेल में था, BMC चुनाव के ठीक पहले मिली जमानत; जानें किसे होगा फायदा?
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अरुण गवली एक मिल वर्कर से गैंगस्टर बना। इसके बाद वह विधायक का चुनाव भी जीता। शिवसेना के एक पार्षद के मर्डर मामले में वह सजा काट रहा है। (फोटो सोर्स: PTI)
नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 सितंबर) को गैंगस्टर अरुण गवली को जमानत दे दी। वह बीते 18 साल से जेल में था। जब वह अपने इलाके यानी दक्षिण मुंबई के बायकुला में पहुंचा तो लोगों ने उसका जोरदार स्वागत किया।
बृहन्मुंबई म्युंसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के चुनाव के ठीक पहले उसकी मुंबई में वापसी बेहद सुर्खियों में है। ऐसा इसलिए क्योंकि बायकुला में अरुण गवली का आज भी प्रभाव है। यहां के लोगों के बीच वह ‘डेडी’ नाम से फेमस है।
किसे होगा फायदा?
अरुण गवली 1980 के दशक में एक मिल वर्कर से गैंगस्टर बना था। उसकी BRA गैंग ने मर्डर, एक्सटॉर्शन और किडनैपिंग जैसे कई अपराध किए लेकिन इसके बावजूद वह अपने इलाके में रॉबिन हूड की तरह फेमस था। उसकी छवी जरूरतमंदों के मददगार की थी। 18 साल तक जेल में रहने के बाद भी उसकी यह छवि कायम है। बायकुला और खासकर दगड़ी चाल (अरुण गवली के हेडक्वार्टर के नाम से मशहूर) में उसे लोगों का बहुत प्यार मिलता है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि उसकी वापसी से BMC चुनाव में बायकुला इलाके के वोटर्स प्रभावित होंगे। बायकुला में 3.5 लाख से ज्यादा वोटर हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को इससे अच्छा फायदा होने की बात कही जा रही है। हालांकि गवली के संबंध शिवसेना के साथ ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं।
किस केस में जेल में बंद थे गवली?
शिवसेना पार्षद कमलाकर जमसांदेकर के मर्डर के मामले में अरुण गवली की गिरफ्तारी हुई थी। 2008 में वह पहली बार जेल भेजा गया। 2012 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वह अब तक यह सजा काट रहा है। कुछ एक मौकों पर परोल मिलने पर ही वह अपने इलाके में नजर आया।
मिल वर्कर से गैंगस्टर कैसे बना?
गवली मुंबई की एक टेक्सटाइल मिल में वर्कर था। 1982 की स्ट्राइक में कई फैक्ट्रियां बंद हुईं। सैकड़ों लोग बेरोजगार हुए। गवली ने ऐसे कुछ बेरोजगार लोगों को एकजुट कर अपनी गैंग बनाई। उसका किडनैपिंग, मर्डर और एक्सटॉर्शन का धंधा चल पड़ा। डॉन दाउद इब्राहिम के साथ भी उसकी दुश्मनी का लंबा दौर चला।
1997 में गवली ने अखिल भारतीय सेना नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई। 2004 में वह चिंचपोकली विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी चुना गया। उसकी पत्नी और बेटी भी पार्षद बनी। लेकिन शिवसेना से विवाद के चलते गवली का ग्राफ फौरन नीचे गिरता गया।

