10 मई को खत्म नहीं हुआ ऑपरेशन सिंदूर: आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने कहा-सीजफायर के बाद भी जारी रही जंग; 88 घंटों में सेना ने दिखाई बेहतरीन तालमेल
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आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को अपनी किताब ‘ऑपरेशन सिंदूर: बिफोर एंड बियॉन्ड’ के लॉन्च के मौके पर भारत-पाकिस्तान जंग को लेकर कई खुलासे किए। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क। आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है पाकिस्तान के साथ जंग 10 मई के सीजफायर के साथ खत्म नहीं हुई। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स अपनाया, यानी एक्शन पूरी तरह माप-तौल कर, स्टेज बाई स्टेज और टारगेट पर फोकस करते हुए लिया गया। 88 घंटे की जंग में सेना ने बेहतरीन तालमेल दिखाई। साथ ही यह भी कहा कि कुछ अहम बातें फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।
हर छोटे-बड़े कदम पर सोचना पड़ा
जनरल द्विवेदी ने कहा- लोग सोचते हैं कि 10 मई को जब सीजफायर हुआ तो जंग खत्म हो गई, लेकिन ऐसा नहीं है। यह जंग लंबे समय तक चली, क्योंकि हमें हर छोटे-बड़े कदम पर सोचना पड़ा।कई फैसलों का असर सालों तक रहने वाला है, इसलिए हर एक्शन और नॉन-एक्शन पर लगातार चर्चा हुई। उन्होंने शुक्रवार को अपनी किताब ‘ऑपरेशन सिंदूर: बिफोर एंड बियॉन्ड’ के लॉन्च के मौके पर यह बात कही।
पहले जंग लड़ चुके अफसरों से संपर्क किया
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- असली चुनौती केवल जवाबी कार्रवाई करने की नहीं थी, बल्कि यह तय करने की थी कि कब शुरुआत हो, कब रोकें, कितना दबाव बनाएं और किस मोर्चे पर कितना असर डाला जाए। इस दौरान वेटरन्स यानी पहले जंग लड़ चुके अफसरों से बातचीत कर कई विकल्पों पर चर्चा की गई। आर्मी चीफ ने कहा। 88 घंटों की जंग में सब-कुछ इतने तालमेल से हुआ कि फॉर्मल प्लानिंग मीटिंग्स या लंबे ऑर्डर्स का इंतजार नहीं करना पड़ा।
यूनिट्स की जिम्मेदारियों पहले से तय थी। टारगेट, टाइमिंग और रिर्सोसेज तय थे। सेना ने एक लय में तालमेल के साथ काम किया। सीमित समय में सटीक ढंग से ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने पर फोकस रहा। ऑपरेशन सिंदू भारतीय सेना की प्रोफेशनलिज्म और इंटीग्रेशन का बेहतरीन नमूना रहा।

