'घुसपैठियों को वोट का अधिकार नहीं देंगे': अमित शाह ने बिहार के सीतामढ़ी में सीता मंदिर का भूमिपूजन किया, निर्माण पर 900 करोड़ खर्च होंगे
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार के सीतामढी में 900 करोड़ की लागत से बनने वाले सीता मंदिर की आधारशिला रखी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार के सीतामढ़ी में मां सीता मंदिर का शिलान्यास किया। इस मंदिर को 900 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। काशी और जनकपुर से आए आचार्यों ने मंदिर के शिलान्यास से जुड़ी पूजा करवाई। शाह ने माता सीता की प्राकट्य स्थली पुनौराधाम मंदिर में कई विकास योजनाओं की शुरुआत भी की। कार्यक्रम में अमित शाह ने बिहार में मतदाता सूची को लेकर SIR को लेकर विपक्ष पर तंज कसा।
घुसपैठियों को वोट का अधिकार नहीं देंगे
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि मतदाता सूची के रिविजन की प्रक्रिया देश में पहले भी कई बार हुई है, लेकिन तब किसी ने विरोध नहीं किया। आने वाले बिहार चुनावों में अपनी हार देखकर और घुसपैठियों को बचाने के लिए लालू जी की पार्टी और कांग्रेस पार्टी इसका विरोध कर रही है।
जो घुसपैठिए बिहार के युवाओं की नौकरियां छीन लेते हैं, उन्हें लालू प्रसाद यादव जी और राहुल गांधी SIR का विरोध कर बचाना चाहते हैं। घुसपैठियों का वोट लेने वालों को बिहार की जनता कभी स्वीकार नहीं करे।
मंदिर मिथिलांचल के भाग्योदय की शुरुआत- अमित शाह
कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि मिथिलांचल, जहां राजा जनक हुए, याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी हुए, जहां शंकराचार्य और मंडन मिश्र ने शास्त्रार्थ को चरम सीमा पर पहुंचाया, जहाँ मुनि अष्टावक्र ने अष्टावक्र गीता का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि मां जानकी की जन्मस्थली पर जो यह भव्य मंदिर बनने जा रहा है, यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मिथिलांचल के भाग्योदय की शुरुआत है।
31 नदियों के जल से हुई पूजा
विशेष पूजन के लिए 31 नदियों का जल और 31 तीर्थों की मिट्टी मंगवाई गई थी। मंदिर की आधारशिला रखने के बाद शाह सीतामढ़ी- दिल्ली अमृत भारत ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इस मौके पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री विजय सिन्हा, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।
67 एकड़ में बनेगा मंदिर
माता सीता मंदिर को राम मंदिर की तरह प्रोजेक्ट किया जा रहा है। 67 एकड़ में बनने वाले मंदिर परिवार में भव्य मंदिर के अलावा सीता वाटिका और लवकुश वाटिका बनाई जाएगी। यहां संग्रहालय, ऑडिटोरियम, सीता वाटिका के साथ ही प्ले एरिया, मिथिला हाट, और डोरमेट्री जैसी सुविधाएं भी होंगी। मंदिर तीन साल में बनकर होगा। पुनौराधाम मंदिर को माता सीता का प्राकट्य स्थली माना जाता है।
मिथिलांचल पर पकड़ बनाने की कोशिश
बीजेपी इस मंदिर के जरिए सीतामढ़ी के अलावा पूरे मिथिलांचल पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इस क्षेत्र में बिहार की 60 सीटें आती है।इनमें से 40 सीटों पर मौजूदा समय में NDA (BJP-JDU) का कब्जा है। मंदिर के बनने से BJP-JDU के लिए वोट बैंक मजबूत होने की संभावना है। मंदिर का शिलान्यास ऐसे वक्त में किया जा रहा है जब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक है।
लोकसभा चुनाव के दौरान शाह ने किया था ऐलान
अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के दौरान सितंबर 2023 में ही सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में माता सीता मंदिर बनाने की घोषणा की थी। तब बिहार कैबिनेट की बैठक में इस मंदिर के लिए 72 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे।
मंदिर बनवाने का क्रेडिट लेने में जुटी पार्टियां
मां सीता मंदिर का शिलान्यास बिहार की राजनीति में टर्निंग प्वाइंट हो सकता है। आरजेडी, बीजेपी और जेडीयू तीनों में ही इस मंदिर को बनवाने का क्रेडिट लेने की होड़ मची है। एक ओर जहां नीतीश कुमार कह रहे हैं कि मंदिर निर्माण को मंजूरी दिलवाने में उनकी भूमिका है, वहीं, राष्ट्रीय जनता दल का दावा है कि मंदिर के प्रोजेक्ट को उस समय मंजूरी मिली, जिस समय आरजेडी और जेडीयू गठबंधन की सरकार थी।
हर बिहारी का सपना पूरा हो रहा है- चिराग
केंद्रीय चिराग पासवान ने कहा कि माता जानकी का मंदिर स्वागत योग्य कदम है। यह जिले के लोगों ने एक लंबे समय से इस संपने को संजोया था, आज वह सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने इसे राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह हर बिहारी की बहुत लंबे समय से इच्छा थी, वह आज पूरी हो रही है। बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट को हर मंच पर जगह मिल रही है।
वैदिक काल से है मिथिला का इतिहास
पुनौराधाम को इतिहास में तिरहुत और तिरभुक्ति भी कहा जाता था। मिथिला वैदिक काल (1500-500 ईसा पूर्व) में भारत के 16 जनपदों में से एक था। इसमें बिहार और नेपाल के क्षेत्र आते थे।

वाल्मीकी रामायण में मिथिला का जिक्र
वाल्मीकी रामायण के मुताबि, एक बार मिथिला में भयंकर अकाल पड़ा। वहां के पुजारी ने राजा जनक (माता सीता के पिता) को हल जोतने की सलाह दी। जब राजा जनक हल जोत रहे थे, तब धरती से एक घड़ा निकला, जिसमें माता सीता शिशु अवस्था में थी। पुनौराधाम में इसी जगह को माता सीता की जन्म स्थली के रूप में जाना जाता है।

