अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को जमानत: दिल्ली छोड़ने पर रोक; NIA ने चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई थीं
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NIA ने 13 मार्च को US सिटीजन मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। उस पर अवैध रूप से म्यांमार जाने और वहां सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने का आरोप है।
नेशनल डेस्क. NIA की स्पेशल कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दे दी है। हालांकि, उसके दिल्ली छोड़ने पर रोक रहेगी। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान जब भी NIA उसे पूछताछ के लिए बुलाएगी, उसे हाजिर होना होगा। वैनडाइक के साथ 6 यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अगर ये लोग जमानत के लिए आवेदन दाखिल करते हैं तो उन्हें भी जमानत का अधिकार है।
दरअसल, NIA ने 13 मार्च को US सिटीजन मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ एयरपोर्ट से और तीन को दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा गया। इनके खिलाफ UAPA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए थे। वहां इन्होंने सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने का काम किया।
चार्जशीट में UAPA के तहत आरोप नहीं
वैनडाइक जब गिरफ्तार हुआ था, अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन हाल ही में NIA ने इन आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट (IFA) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गई थीं। इसके बाद सवाल उठ रहे थे कि क्या जांच एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित आरोप हटा दिए।
कांग्रेस ने भी इस कदम पर सवाल उठाया था और पूछा था कि चार्जशीट में UAPA के प्रावधान क्यों शामिल नहीं किए गए हैं। हालांकि, सरकार ने कहा है कि इन दोनों घटनाओं को आपस में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
सरकार ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने पर केंद्र सरकार ने कहा था कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद की जांच बंद नहीं की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट (IFA) के तहत चार्जशीट दाखिल करने के फैसले का मतलब अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA के तहत जांच बंद करना नहीं है।

कौन है मैथ्यू वैनडाइक
मैथ्यू वैनडाइक को कॉन्फ्लिक्टेड रीजन्स में एक्टिव भाड़े के सैनिक के रूप में जाना जाता है। वह लीबिया और सीरिया जैसे देशों में आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट का हिस्सा रह चुका है। 2011 में लीबिया में उसे युद्धबंदी भी बनाया गया था। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम की संस्था का संस्थापक है, जो खुद को नॉन-प्रॉफिट सिक्योरिटी फर्म बताती है और अलग-अलग ग्रुप्स को ट्रेनिंग देती है।
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वैनडाइक पर क्या आरोप
NIA के मुताबिक आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट जरूरी होता है। इसके बावजूद ये लोग मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन इलाके में अवैध रूप से दाखिल हुए। जांच में सामने आया है कि यह रूट अब ऐसे नेटवर्क के लिए एंट्री प्वाइंट बनता जा रहा है।
आर्म्ड ग्रुप्स को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई
एजेंसी का दावा है कि इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में जातीय आर्म्ड ग्रुप्स को हथियारों की ट्रेनिंग दी। इन समूहों पर नोर्थ-ईस्ट में एक्टिव उग्रवाइी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा आरोप है कि यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप मंगवाकर मिजोरम के जरिए इन ग्रुप्स तक पहुंचाई गई। इससे पूरे मामले में एक ऑर्गनाइज्ड इंटरनेशनल नेटवर्क के तार जुड़े होने की बात सामने आई है।

