लखनऊ के एक आर्य समाज मंदिर में शादी पर रोक लगी: बिना उम्र जाने मैरिज सर्टिफिकेट बांट रहे थे; इलाहाबाद हाईकोर्ट की नजर में कैसे आया मामला
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लखनऊ के अलीगंज में स्थित एक आर्य समाज मंदिर पर यह बैन लगा है। (सिम्बॉलिक इमेज)
नेशनल डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते लखनऊ के एक आर्य समाज मंदिर पर शादी कराने और मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी। शुरुआती जांच में सामने आया था कि मंदिर बिना सही उम्र की जांच-पड़ताल किए शादियां करवा रहा था।
यह मामला एक ऐसे कपल की याचिका से जुड़ा है, जिसने शादी के बाद पुलिस प्रोटेक्शन की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट की नजर शादी के सर्टिफिकेट में दर्ज दूल्हे की उम्र पर गई, जिसके बाद पूरा मामले का खुलासा हुआ।
आधार में उम्र 19 साल, सर्टिफिकेट में लिख दी 22
कोर्ट ने पाया कि शादी के सर्टिफिकेट में लड़के की उम्र 22 साल लिखी गई थी, जबकि उसके आधार कार्ड के मुताबिक उसकी उम्र करीब 19 साल थी। इस पर कोर्ट ने मंदिर के जिम्मेदार अधिकारी को तलब किया और पूछा कि आखिर उम्र किस आधार पर लिखी गई।
मंदिर के सचिव ने कोर्ट को बताया कि लड़के की मां ने हलफनामा देकर बेटे की उम्र 22 साल बताई थी। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि शादी से पहले उम्र साबित करने वाला कोई सरकारी दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड नहीं देखा गया।
कोर्ट ने इस पर सवाल भी किया कि जब आधार कार्ड या कोई दूसरा दस्तावेज मांगा ही नहीं गया तो सिर्फ हलफनामे के भरोसे शादी कैसे करा दी गई? सचिव इसका कोई ठोस कारण नहीं बता पाए।
एक जैसे फॉर्म और एक ही लिखावट पर भी कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शादी से जुड़े सभी हलफनामे और मैरिज रजिस्टर को देखा। कोर्ट ने पाया कि सभी हलफनामे पहले से छपे हुए फॉर्म पर थे, जिससे ऐसा लगा कि किसी भी हालत में शादी कराने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।
कोर्ट ने यह भी देखा कि मैरिज रजिस्टर की सभी एंट्रियां एक ही पेन और एक जैसी लिखावट में थीं, जबकि मंदिर में शादी के लिए आए लोगों को अपनी-अपनी एंट्री दर्ज करनी होती है। इस पर सचिव ने कहा कि सारी एंट्रियां संस्था का एक कर्मचारी लिखता है। कोर्ट इस तर्क से भी संतुष्ट नहीं हुआ।
कोर्ट बोला- नाबालिग की शादी कराना अपराध
हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि संस्था बिना यह जांच किए शादी करा रही थी कि लड़का-लड़की शादी की कानूनी उम्र पूरी कर चुके हैं या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर शादी की तय उम्र से पहले शादी कराई जाती है तो इसमें शामिल सभी लोग अपराध के दायरे में आते हैं।
आर्य समाज के सिद्धांतों का भी किया जिक्र
कोर्ट ने कहा कि आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने सच और समाज के हित के सिद्धांतों पर की थी। लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ आर्य समाज संस्थाएं उन सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही हैं और यह मामला भी उसी तरह का दिखाई देता है।
पुलिस सुरक्षा की मांग भी नहीं मानी
कपल ने कोर्ट से पुलिस सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उनके पास किसी वास्तविक खतरे का कोई ठोस सबूत नहीं है। सिर्फ आशंका के आधार पर सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में कोई धमकी या दबाव बनाया जाता है तो दोनों स्थानीय पुलिस और सीनियर अफसरों से संपर्क कर सकते हैं।
हाईकोर्ट का सख्त आदेश
कोर्ट ने आखिरी में आर्य समाज मंदिर के लिए कहा कि जब तक संस्था शपथपत्र देकर यह नहीं बताती कि शादी कराने के लिए कौन-कौन से नियम अपनाए जाएंगे और उम्र की जांच कैसे सुनिश्चित की जाएगी, तब तक उसे शादी कराने या मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने की परमिशन नहीं होगी। यानी लखनऊ में अलीगंज के इस आर्य समाज मंदिर में अगली सुनवाई तक कोई शादी नहीं कराई जा सकेगी।

