इंस्टाग्राम पर लिखा- पाकिस्तान का समर्थन करूंगा: आरोपी को जमानत, इलाहाबाद HC ने कहा- पोस्ट में देश का अपमान नहीं
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
पाकिस्तान के समर्थन में पोस्ट डालने वाले एक शख्स को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, किसी भी विशेष घटना का जिक्र और भारत का नाम लिए बिना पाकिस्तान के समर्थन में पोस्ट करना BNS की धारा 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना) के तहत अपराध नहीं है।
दरअसल, रियाज नाम के शख्स ने इंस्टग्राम पर एक पोस्ट में पाकिस्तान का समर्थन किया था। उसने लिखा था- चाहे जो हो जाए, समर्थन तो बस पाकिस्तान का करेंगे। इस पोस्ट को लेकर रियाज पर यूपी सरकार ने एक्शन लिया था। आरोपी पर BNS की धारा 152 और 196 के तहत केस दर्ज कराया गया था। 25 मई से वह जेल में था।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार देशवाल ने कहा, रिकॉर्ड देखकर ये पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जिससे देश के प्रति अनादर दिखता हो। किसी अन्य देश के समर्थन में एक पोस्ट करने से देश के नागरिकों में गुस्सा और वैमनस्यता जरूर पैदा कर सकता है और यह BNS की धारा 196 (धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत अपराध हो सकता है। लेकिन यह धारा 152 का उल्लंघन नहीं है।
BNS की धारा 196 में 7 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि धारा 152 के तहत दोषी पाए जाने पर उम्रकैद या 7 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। धारा 152 गैर जमानती है। जस्टिस अरुण ने कहा, धारा 152 लगाते समय विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यह नई धारा है और इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
संप्रभुता, एकता और अखंडता को ठेस नहीं पहुंचाई- वकील
इससे पहले सुनवाई के दौरान रियाज के वकील ने कोर्ट में कहा कि आरोपी ने सोशल मीडिया पोस्ट से देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को ठेस नहीं पहुंचाई है। साथ ही इसमें न तो भारतीय ध्वज, न ही देश का नाम या कोई ऐसी तस्वीर थी, जिससे भारत का अपमान हुआ हो। कोई देश का दुश्मन ही क्यों न हो, अगर वो बिना अपमान किए किसी दूसरे देश का समर्थन करता है तो BNS की धारा 152 के तहत इसे अपराध नहीं माना जाता है।
'ऐसी पोस्ट अलगावाद की भावना उत्पन्न करती है'
राज्य सरकार ने आरोपी को जमानत देने का विरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इस तरह की पोस्ट अलगाववाद की भावना पैदा करती है। लेकिन हाईकोर्ट ने शख्स को जमानत देते हुए कहा कि उस पोस्ट में ऐसी किसी बात का उल्लेख नहीं है, जिससे उसे देशद्रोही समझा जा सके।

