अहमदाबाद प्लेन क्रैश-1819: पीड़ितों के मुआवजे में देरी, वकील ने कहा- रतन टाटा अगर जिंदा होते तो ऐसा नहीं होता
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अमेरिकी अटॉर्नी माइक एंड्रयूज (फोटो: x/@ANI)
अहमदाबाद प्लेन क्रैश में पीड़ित परिवार के वकील अमेरिकी अटॉर्नी माइक एंड्रयूज ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा मिलने में देरी पर नाराजगी जताई है। एंड्रयूज ने रविवार को कहा - अगर रतन टाटा आज जिंदा होते तो पीड़ितों को समय से मुआवजे की रकम मिल गई होती।
एंड्रयूज हादसे के 65 से ज्यादा मृतकों के परिवार के वकील हैं। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन जिंदा होते तो पीड़ित परिवारों से चक्कर नहीं कटवाया जाता। उन्हें इतना परेशान नहीं होना पड़ता। उन्हें उनका हक समय पर मिल जाता।
हम रतन टाटा के वर्क एथिक्स के बारे में जानते हैं: एंड्रयूज
एंड्रयूज ने कहा- हम अमेरिका के लोग भी जानते हैं कि रतन टाटा कौन थे। हमें उनके वर्क एथिक्स और कर्मचारियों का ध्यान रखने के बारे में थोड़ा बहुत पता है। वे बहुत विनम्र थे और छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखते थे।
हादसे में बिमार मां ने इकलौता बेटा खो दिया
एंड्रयूज ने कहा - एक बीमार मां ने इकलौता बेटा हादसे में खो दिया। आज वे बिमार बिस्तर पर पड़ी हैं। वह इलाज के लिए पूरी तरह अपने बेटे पर निर्भर थी। उस मां का एकमात्र सहारा चला गया। उन्हें अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला। ऐसे में इलाज करवाने में कठिनादयाें का सामना करना पड़ रहा है।
टाटा समूह का 1 करोड़ देने का वादा
टाटा समूह ने हादसे में मरने वालों के परिवार को 1 करोड़ देने का वादा किया है। प्लेन में सवार 229 में से 147 लोगों को मुआवजे की पहली किश्त के तौर पर 25 लाख रुपए दे दिए गए हैं। हादसे की चपेट में आए मेडिकल कॉलेज में मौजूद 19 मृतकों को भी मुआवजे की पहली किश्त दे दी गई है।
टाटा ग्रुप ने मुआवजे के पेमेंट के लिए 'एआई-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट' की स्थापना की गई है। टाटा ग्रुप ने कहा है कि मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग की मरम्मत भी करवाई जाएगी।
हादसे में कुल 260 लोगों की मौत
12 जून को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के करीब हादसा हुआ। एयरपोर्ट से बोइंग 787-8 प्लेन ने उड़ान भरी जिसके थोड़ी दूरी पर प्लेन क्रैश हो गया। ऐसा दावा किया गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद प्लेन के दोनों इंजन बंद हो गए। हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी।

