बिहार चुनाव: 'बिहार में गुपचुप लागू हो रहा NRC', ओवैसी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
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AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (फाइल फोटो)
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बिहार में गुपचुप तरीके से नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) को इलेक्शन से पहले लागू कर रहा है।
ओवैसी ने कहा कि इसकी वजह से कई भारतीय नागरिक अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाएंगे और इसकी वजह से चुनाव आयोग से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
उन्होंने कहा, 'नए नियम के अनुसार लोगों को भारतीय नागरिकता साबित करनी होगी, जिसके लिए अपना और अपने माता-पिता के जन्म से जुड़े डॉक्यूमेंट चुनाव आयोग को देने होंगे। कई गरीब परिवारों के पास इस तरह का कोई दस्तावेज नहीं है। खास कर जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं।
अगर आपकी जन्मतिथि जुलाई 1987 से पहले की है, तो आपको जन्म की तारीख और/या जन्म स्थान दिखाने वाला कोई एक दस्तावेज़ देना होगा (11 में से एक)।
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) June 27, 2025
अगर आपका जन्म 01.07.1987 और 02.12.2004 के बीच हुआ है, तो आपको अपना जन्म प्रमाण (तारीख और स्थान) दिखाने वाला एक दस्तावेज़ देना होगा, और साथ ही… https://t.co/DXP5E02s68
AIMIM अध्यक्ष ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स(X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'अगर आपकी जन्मतिथि जुलाई 1987 से पहले की है, तो आपको जन्म की तारीख और/या जन्म स्थान दिखाने वाला कोई एक दस्तावेज़ देना होगा (11 में से एक)। अगर आपका जन्म 01.07.1987 और 02.12.2004 के बीच हुआ है, तो आपको अपना जन्म प्रमाण (तारीख और स्थान) दिखाने वाला एक दस्तावेज़ देना होगा, और साथ ही अपने माता या पिता में से किसी एक की जन्म तारीख और जन्म स्थान का दस्तावेज भी देना होगा।'
उन्होंने कहा, 'अगर आपका जन्म 02.12.2004 के बाद हुआ है, तो आपको अपनी जन्म तारीख और स्थान के दस्तावेज के साथ-साथ, दोनों माता-पिता के जन्म की तारीख और स्थान को साबित करने वाले दस्तावेज़ भी देने होंगे। अगर माता या पिता में से कोई भारतीय नागरिक नहीं है, तो उस समय के उनका पासपोर्ट और वीज़ा भी देना होगा। चुनाव आयोग (ECI) हर वोटर की जानकारी एक महीने (जून-जुलाई) में घर-घर जाकर इकट्ठा करना चाहता है। बिहार जैसे राज्य, जो बहुत बड़ी आबादी और कम कनेक्टिविटी वाला है, वहां इस तरह की प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से करना लगभग असंभव है।'
AIMIM अध्यक्ष ने X पर 1995 के लाल बाबू हुसेन केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में लिखा कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से बिना सूचना और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता।ओवैसी ने आगे लिखा- चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह बताएं कि किसी व्यक्ति को विदेशी क्यों माना जा रहा है। कोर्ट ने ये भी कहा कि नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेजों की एक सीमित सूची नहीं हो सकती, हर तरह के सबूत को स्वीकार किया जाना चाहिए।

