मेघालय में 4000 टन कोयला गायब: हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई, मंत्री बोले- सारा कोयला भारी बारिश में बह गया
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मेघालय में 4000 टन कोयला गायब होने के बाद हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा है। (सिम्बोलिक इमेज)
मेघालय में 4000 टन कोयला गायब होने के मामले में राज्य के आबकारी मंत्री किरमेन शायला ने हैरान करने वाला दावा किया है। शायला ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि हो सकता है सारा कोयला बारिश के पानी में बह गया हो।
मेघालय में कोयला माइनिंग 2014 से ही बैन है। जस्टिस कटोकी कमेटी की रिपोर्ट में दो गांवों से इतने बड़े पैमाने पर कोयला गायब होने की बात सामने आई थी। यह कमेटी राज्य में कोयला और खनिजों की आवाजाही और अवैध खनन को रोकने के लिए गठित की गई है।
मेघालय हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी
कोयला राजाजू और डिएंगन गांव से गायब हुए थे। इनमें से एक गांव दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स और दूसरा गांव री भोई जिले में हैं। मामला मेघाालय हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कमेटी की रिपोर्ट पर कोर्ट ने 25 जुलाई को सुनवाई की थी।
कोर्ट ने इतनी बड़ी मात्रा में कोयला गायब होने पर सरकार को फटकार लगाई। सरकार से पूछा कि माइनिंग बैन होने के बाद साइट्स पर पड़े कोयले कैसे गायब हो गए। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर एक्शन लेने का निर्देश दिया था।
मंत्री बोले- कोयला बारिश में बह गया होगा
इस फैसले पर रिपोटर्स ने 28 जुलाई को आबकारी मंत्री से सवाल किए। इसके जवाब में उन्होंने कहा- मेघालय में सबसे अधिक बारिश होती है, आपको नहीं पता… बारिश के कारण कोयला बह गया होगा। इसकी संभावना बहुत अधिक है।
हालंकि, जब मीडिया ने पूछा कि क्या वह कोयला गायब होने की बात जायज ठहरा रहे हैं तो सफाई देने लेगे। उन्होंने कहा- मैं यह नहीं कह सकता कि कोयले बारिश के कारण गायब हुए हैं। ऐसा हो भी सकता है या नहीं भी। मेरे पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है।
राज्य में कोयला खनन 2014 से बैन
राज्य में कोयला खनन 2014 से बैन है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कोल माइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगा दी थी। दरअसल, अंधाधुंध कोल माइनिंग से राज्य के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। खनन के स्टैंडर्ड का पालन नहीं करने की वजह से पॉल्यूशन फैल रहा था।
अवैध खनन से कई जिलों के लोगों में बीमारियां फैल रही थीं। राज्य के एनजीओ लगातार अवैध कोयला खनन पर एक्शन लेने की मांग कर रहे थे। बैन के बाद राज्य में अवैध खनन पर नजर रखने के लिए 12 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई थी।

