CJP Protest: 4 राज्यों की SC में अर्जी, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द करने की मांग; केंद्र के कदम का दिया साथ
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सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
नेशनल डेस्क. जुलाई में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शनों को लेकर दर्ज केस को खत्म करने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग आवेदन दाखिल कर अपने-अपने राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की अनुमति मांगी। ये आवेदन केंद्र सरकार की उस पहल के बाद आए हैं, जिसमें दिल्ली में दर्ज 13 FIR को खत्म करने की मांग की गई है।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने चारों राज्यों की अर्जियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को रद्द करने के लिए अलग आवेदन दाखिल किए गए हैं और सभी मामलों को दोपहर 2 बजे एक साथ सूचीबद्ध करने की अपील की।
CJI सूर्यकांत ने मामलों को एक साथ सुनने पर सहमति जताई, लेकिन राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनकी अर्जियों में कोई कमी न हो।
केंद्र पहले ही 13 FIR रद्द करने की मांग कर चुका है
चार राज्यों की अर्जियों से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर दिल्ली में CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग की थी। ये प्रदर्शन 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर समेत दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में हुए थे।
केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से इन मामलों को खत्म करने की असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करने की अपील की है। दिल्ली पुलिस ने भी कहा है कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद वह इन 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR होगी
हालांकि, केंद्र ने 2,873 लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने का प्रस्ताव दिया है। पुलिस के अनुसार ये ऐसे लोग हैं, जिनके बारे में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटा में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की जानकारी मिली है। नई FIR में इन लोगों की व्यक्तिगत भूमिका की जांच की जाएगी।
राज्यों में FIR वापसी को लेकर क्या हुआ?
प्रदर्शन खत्म होने के बाद CJP की ओर से लगातार दावा किया गया कि केंद्र के साथ बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अगस्त को स्पष्ट किया था कि उसके 28 जुलाई के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि राज्य सरकारें कानून के मुताबिक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी कार्यवाही बंद या वापस नहीं ले सकतीं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके पहले के आदेश में इस्तेमाल किए गए “criminal antecedents” शब्द का मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों से है।
अब महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार की अर्जियों से यह मुद्दा सीधे सुप्रीम कोर्ट के सामने आ गया है कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को किस तरह खत्म किया जाए।
5 सितंबर के मार्च से पहले बढ़ी हलचल
सुप्रीम कोर्ट में राज्यों की ओर से दाखिल ये अर्जियां ऐसे समय आई हैं जब CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। CJP का आरोप है कि जुलाई में आंदोलन वापस लेते समय केंद्र की ओर से किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया गया। CJP ने इसी मुद्दे को लेकर दोबारा प्रदर्शन का ऐलान किया है।

