भोपाल में इंटर्न और जूडा का आंदोलन जारी : बेनतीजा रही कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से बातचीत; कुणाल चौधरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा
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गांधी मेडिकल कॉलेज में कलेक्टर ने जूनियार डॉक्टर्स के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।
भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड (निर्वाह भत्ता) बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच देर रात भोपाल कलेक्टर ने जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। कलेक्टर और डॉक्टरों के डेलिगेशन के बीच मांगों को लेकर लंबी बातचीत हुई, लेकिन स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन सकी। बैठक के बाद भोपाल कलेक्टर ने कहा कि छात्रों की बात उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से सुनी जा रही है। उन्होंने इस चर्चा को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की बात कही और कहा कि एक बार बातचीत विधिवत पूरी हो जाए, तो इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
कलेक्टर ने डॉक्टरों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि सरकार उनकी पालक है। डॉक्टर सरकार से अपेक्षा भी रखते हैं और अपनी नाराजगी भी व्यक्त करते हैं, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि राज्य शासन जब कोई नीतिगत निर्णय लेता है, तो उसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
प्रदर्शन स्थल पहुंचे कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी
इधर, इंटर्न डॉक्टरों के इस आंदोलन को लेकर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत डॉक्टरों से मुलाकात की। उन्होंने सरकार पर इंटर्न डॉक्टरों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। कुणाल चौधरी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और भविष्य के डॉक्टरों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र अपने जायज अधिकारों की बात करते हैं, तो उनके साथ बल प्रयोग किया जाता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा
उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने अस्पतालों में चूहों द्वारा बच्चों को कुतरने और नकली दवाइयों के सेवन से लोगों की मौत होने जैसी गंभीर घटनाओं का भी जिक्र किया। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को जल्द स्वीकार किया जाए और उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए। वहीं, दूसरी ओर देर रात हुई प्रशासनिक अधिकारियों और डॉक्टरों की बैठक के बावजूद स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर फिलहाल गतिरोध बना हुआ है और कोई सहमति नहीं निकल पाई है।
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प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर, भोपाल

