ट्रम्प की तस्वीर वाला 1 डॉलर कॉइन कानूनी कैसे: 1866 में लगा था जिंदा शख्स पर बैन; 2020 के जिस कानून ने रास्ता खोला, उस पर खुद साइन किए थे
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यूएस मिंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाली एक डॉलर की कॉइन की बिक्री शुरू कर दी है।
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर अब ऑफिशियली एक डॉलर के कॉइन पर आ गई है। अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर यूएस मिंट ने 2 सितंबर से इस गोल्डन कलर के कॉइन की बिक्री शुरू की है। इसकी एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है और दूसरी तरफ प्रेसिडेंशियल सील बनाई गई है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में जिंदा व्यक्ति, खासकर किसी सीटिंग प्रेसिडेंट की तस्वीर करंसी पर लगाने के खिलाफ करीब 160 साल पुराना कानून है। साथ ही 2020 में बने जिस कानून के तहत ट्रम्प की तस्वीर कॉइन पर छापी गई है उस कानून पर खुद ट्रम्प ने ही अपने पहले प्रेसिडेंशियल टेन्योर में साइन किए थे।
ऐसे में सवाल है कि ट्रम्प की तस्वीर एक डॉलर के कॉइन पर कैसे आ गई और क्या ऐसा करना अमेरिकी कानून के खिलाफ है? इसका जवाब 1866 के कानून और 2020 में बने एक दूसरे कानून के बीच छिपा है। आइए, जानते हैं...क्या है पूरा मामला, ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने किस कानूनी कमी का फायदा उठाया...
1866 में क्यों लगा था जिंदा शख्स की तस्वीर पर बैन
इस कहानी की शुरुआत 1860 से होती है। उस समय नेशनल करंसी ब्यूरो के सुपरिंटेंडेंट स्पेंसर एम. क्लार्क ने पांच सेंट के फ्रैक्शनल नोट पर अपनी तस्वीर लगवा दी थी। मामला अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंचा और सांसद इससे नाराज हो गए।
इसके बाद 1866 में कानून बनाकर अमेरिकी करंसी और सिक्योरिटीज पर जिंदा शख्स की तस्वीर लगाने पर रोक लगा दी गई। इसके पीछे एक सोच यह भी रही कि अमेरिका की करंसी किसी जिंदा रूलर या लीडर के की पर्सनैलिटी का सिम्बल नहीं बने। यही वह कानून है, जिसका हवाला आज भी जिंदा राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी करंसी पर नहीं लगाने को लेकर दिया जाता है।

फिर ट्रम्प की तस्वीर वाला डालर कॉइन गैरकानूनी क्यों नहीं
यहीं से मामला थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड हो जाता है। नोट और कॉइन से जुड़े अमेरिकी कानून पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। ट्रम्प कॉइन के लिए सर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रिडिजाइन एक्ट 2020 ( Circulating Collectible Coin Redesign Act of 2020) का इस्तेमाल किया गया। इस कानून ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए 2026 में सर्कुलेटिंग कॉइन्स के डिजाइन बदलने का अधिकार दिया।
इस स्पेशल कानून में एक डॉलर के कॉइन के रिवर्स यानी पिछले हिस्से पर किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति का पोर्ट्रेट लगाने से रोक है। लेकिन ट्रम्प की तस्वीर रिवर्स पर नहीं, ऑबवर्स यानी कॉइन के सामने वाले हिस्से पर है।

जिस कानून से कॉइन बना, उस पर ट्रम्प ने ही किए थे साइन
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प बात है। जिस 2020 के कानून के तहत अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए स्पेशल कॉइन्स डिजाइन करने का रास्ता खुला, उसे ट्रम्प ने ही अपने पहले प्रेसिडेंशियल टेन्योर में कानून बनाया था। अब अपने दूसरे टेन्योर में उसी कानून के आधार पर अपनी ही तस्वीर के साथ कॉइन जारी करवा लिया। आलोचकों का कहना है कि अब आने वाले समय में भी यह ट्रेंड फॉलो किया जाने लगेगा। इससे अमेरिकी करंसी पर जिंदा नेताओं की तस्वीर नहीं छापने की पुरानी परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।
100 साल पहले कूलीज की तस्वीर भी कॉइन पर छपी थी
ट्रम्प किसी अमेरिकी कॉइन पर नजर आने वाले पहले मौजूदा राष्ट्रपति नहीं हैं। इससे ठीक 100 साल पहले 1926 में तत्कालीन राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर भी एक कॉइन पर लगाई गई थी। अमेरिका की आजादी के 50 साल पूरे होने पर जारी हाफ-डॉलर पर जॉर्ज वॉशिंगटन के साथ कूलिज का पोर्ट्रेट था और उस समय वह अमेरिका के सीटिंग प्रेसिडेंट थे।

ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे अपने फैसले को सही ठहराने के लिए एक उदाहरण के तौर पर पेश किया है। लेकिन दोनों मामलों में एक बड़ा फर्क है। कूलिज वाला कॉइन कमेमोरेटिव था, जबकि ट्रम्प वाला एक डॉलर के कॉइन सर्कुलेटिंग फिनिश वाला लीगल टेंडर है।

कीमत 1 डॉलर, लेकिन खरीदने के लिए देने होंगे ज्यादा पैसे
कॉइन की फेस वैल्यू एक डॉलर यानी करीब 88 रुपए है और यह लीगल टेंडर है। लेकिन यूएस मिंट इसे एक-एक कॉइन के रूप में एक डॉलर में नहीं बेच रहा। 25 कॉइन्स का रोल 61 डॉलर यानी करीब 5,400 रुपए और 100 कॉइन्स का बैग एक डॉलर 54.50 यानी करीब 13,600 रुपए में बेचा जा रहा है। इस हिसाब से रोल खरीदने पर एक कॉइन की कीमत 2.44 डॉलर यानी करीब 215 रुपए पड़ती है। यूएस मिंट ने 4 जुलाई को 2.50 लाख स्पेशल कॉइन्स भी तैयार किए थे, जिन पर जुलाई 4 का खास निशान है। इन्हें नॉर्मल रोल और बैग में रैंडम तरीके से शामिल किया गया है।
250 डॉलर के नोट पर ट्रम्प की तस्वीर लगाना इतना आसान नहीं
ट्रम्प की तस्वीर वाला एक डॉलर के कॉइन अकेला प्रस्ताव नहीं है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने मई में ट्रम्प की तस्वीर वाला 250 डॉलर का बैंकनोट लाने की तैयारियों की बात भी कही थी। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं होगा। बैंकनोट पर जिंदा शख्स की तस्वीर लगाने पर मौजूदा समय में बैन लागू है। अगर ट्रम्प की तस्वीर नोट पर छापनी है तो इसके लिए कानून बदलना पड़ेगा।

कानून बदलने के लिए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन को कांग्रेस यानी संसद की मंजूरी लेनी होगी। यानी एक डॉलर के कॉइन के मामले में एडमिनिस्ट्रेशन 2020 के स्पेशल कॉइन कानून का सहारा ले सकता है, लेकिन ट्रम्प की तस्वीर वाला 250 डाॅलर का नोट इस कानून के सहारे नहीं लाया जा सकता।
कानूनी से ज्यादा अमेरिकी परंपरा पर विवाद
ट्रम्प कॉइन को लेकर विवाद सिर्फ यह नहीं है कि कानून इसकी इजाजत देता है या नहीं। बड़ा सवाल अमेरिका की उस पुरानी पॉलिटिकल ट्रैडिशन को लेकर है, जिसमें जीवित लीडर्स की तस्वीरों को कॉइन या बैंकनोट पर छापने से अब तक परहेज किया जाता रहा है। आलोचक अपनी बात सही ठहरा रहे हैं और ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन अपनी।
आलोचकों का तर्क है कि मौजूदा राष्ट्रपति का चेहरा एक डॉलर के ऐसे कॉइन पर लगाया गया है जिसे लीगल टेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर यह एक कॉमोरेटिव कॉइन होता तो ज्यादा दिक्कत की बात नहीं थी। यह अमेरिका की पुरानी परंपरा के खिलाफ है।
वहीं ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन अपने पक्ष में 2020 का स्पेशल कॉइन कानून और 1926 का कूलिज की मिसाल दे रहा है। ट्रम्प के समर्थकों का कहना है कि यह कानून तोड़कर ट्रम्प की तस्वीर छापने का दावा गलत है।

