नेपाल बाढ़: अब तक 469 की मौत, करीब 300 भारतीय समेत 1000 लापता; भारत ने लाखों टन राहत सामग्री भेजी
Published: Updated:
14 min read

नेपाल में अब भी हजारों लोग लापता हैं। खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भी दिक्कत आ रही है।
इंटरनेशनल डेस्क। तिब्बत में ग्लेशियर फटने की वजह से नेपाल के उत्तरी इलाके में बुधवार को में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। Kathmandu Post के मुताबिक, नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभिनारायण काफले ने इसकी पुष्टि की। 1000 लोग अभी तक लापता है। इनमें 700 से ज्यादा विदेशी टूरिस्ट शामिल हैं।
अब चीन ने अगले 72 घंटों में नया फ्लैश फ्लड आने को लेकर नया अलर्ट जारी किया है। चीन ने कहा है- नेपाल और तिब्बत में फ्लैश फ्लड की तबाही अभी थमी नहीं है। तिब्बत-नेपाल बॉर्डर के पास मलबे से बनी एक बैरियर लेक पहले ही ओवरफ्लो कर रही है।
इस बीच भारत सरकार ने नेपाल के लिए लाखों टन राहत सामग्री भेजी है। एयरफोर्स का सबसे ताकतवर कार्गो एयरक्राफ्ट c-17 ग्लोबमास्टर लगातार ये सामान पहुंचा रहा है। इनमें दवाइयां, कपड़े, मजबूत टेंट के अलावा कंबल और खाने का सामान शामिल है।

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के मुताबिक, गुरुवार तक इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा था। अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी इसमें पहुंचने का अनुमान है। अगर झील पर प्रेशर बढ़ना तो एक और फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो सकता है।
288 भारतीयों से संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को बताया कि अभी भी 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है।शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीय शामिल हैं।

इसके अलावा तमिलनाडु के 37 और 49 लोगों के दो ग्रुप, पश्चिम बंगाल के 32, अलग-अलग राज्यों के 61 और केरल के 33 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें कई लोग अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के जरिए यात्रा पर गए थे।
भारत ने नेपाल भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
नेपाल में तबाही के बाद भारत ने राहत और मदद का ऑपरेशन तेज कर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को बताया कि भारत की दूसरी फ्लाइट 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और फूड पैकेट लेकर नेपाल के लिए रवाना हुई।

इससे पहले बुधवार रात भारतीय वायुसेना का C-130J एयरक्राफ्ट 10 टन इमरजेंसी सप्लाई लेकर पहुंचा था, जिसमें टेंपरेरी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाइयां शामिल थीं।
फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
काठमांडू में इंडियन एम्बेसी ने कहा- हम नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि फ्लैश फ्लड से प्रभावित भारतीय नागरिकों का जल्द रेस्क्यू किया जा सके और उन्हें राहत पहुंचाई जा सके।भारतीय नागरिक मदद के लिए दूतावास के इमरजेंसी नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
21 भारतीयों को रेस्क्यू किया गया, तिब्बत से 200 भारतीयों ने मदद मांगी
विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 21 भारतीयों को रेस्क्यू किया गया है। ये सभी तमिलनाडु के हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। वहीं,तिब्बत में करीब 200 भारतीयों ने मदद मांगी है।

1000 लोगों से संपर्क नहीं, इनमें 700 से ज्यादा विदेशी टूरिस्ट
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अभी कम से कम 1000 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें स्थानीय लोग, सिक्योरिटी फोर्स के जवान और देशी-विदेशी टूरिस्ट शामिल हैं।

लापता सिक्योरिटी पर्सनल में नेपाल आर्मी के 44, नेपाल पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान हैं। इसके अलावा 644 टूरिस्ट से संपर्क नहीं हो पाया है, जिनमें 700 विदेशी और 127 नेपाली नागरिक हैं। प्रभावित इलाकों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। ऐसे में अफसर मरने वालों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट कर रहे हैं।

तिब्बत बॉर्डर से लगे रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी के पानी का लेवल बुधवार को चंद मिनटों में बढ़ गया। इसके बाद कई गांव, गाड़ियां, पुल और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बह गए। रसुवा काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर है और यहां करीब 50 हजार लोग रहते हैं।
अब तक 239 लोगों को एयरलिफ्ट किया
Kathmandu Post के मुताबिक, नेपाल में बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अब तक प्रभावित इलाकों से 239 लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 211 लोगों को नेपाली सेना के हेलिकॉप्टरों ने, जबकि 28 लोगों को प्राइवेट हेलिकॉप्टरों ने एयरलिफ्ट किया।

अकेले रसुवा के तिमुरे से 123 लोगों को निकाला गया है। इनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं। इनमें रसुवा में 43, नुवाकोट में 27 और धादिंग में 3 लोग घायल हुए। घायलों के इलाज के लिए नेपाली सेना, नेपाल पुलिस, आर्म्ड पुलिस फोर्स, नेशनल ट्रॉमा सेंटर, बीर हॉस्पिटल और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल की मेडिकल टीमें नुवाकोट डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में तैनात की गई हैं।

चितवन में सबसे ज्यादा 108 शव मिले
अब तक चितवन में सबसे ज्यादा 108 शव मिले हैं। इसके अलावा नवलपरासी ईस्ट में 62, धादिंग में 27, गोरखा में 20, रसुवा में 17, नवलपरासी वेस्ट में 15, नुवाकोट में 12 और तनहूं में 9 शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ रसुवा से होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते निचले इलाकों तक पहुंची, जिससे कई बस्तियां, सड़कें, पुल और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हुआ है।

मोदी ने नेपाल PM से बात की
PM मोदी ने X पर पोस्ट कर बताया, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

नेपाल की बाढ़ का पानी बिहार पहुंचने का अनुमान
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का असर अब बिहार में भी पड़ने की आशंका है। अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल का बाढ़ का पानी त्रिशूली और देवघाट रिवर सिस्टम से होते हुए गंडक नदी में मिलेगा और इसके बाद बिहार में दाखिल होगा। पानी सबसे पहले वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने का अनुमान है।
गंडक बैराज से बिहार की तरफ पानी का फ्लो 2.5 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। फिलहाल बैराज से करीब 80 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यानी पीक फ्लो मौजूदा डिस्चार्ज के तीन गुना से ज्यादा हो सकता है। इसे देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय ने बिहार के लिए एडवाइजरी जारी कर अफसरों को अलर्ट रहने को कहा है।

भारत मदद के लिए तैयार, एयरफोर्स के C-130 और C-17 प्लेन स्टैंडबाय पर
बाढ़ के बाद भारत ने तुरंत मदद की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन एयरफोर्स का C-130 विमान आज शाम 7 बजे टेंट, कंबल और दूसरी जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए उड़ान भरेगा। इसके बाद गुरुवार सुबह 6 बजे C-17 विमान की एक और फ्लाइट भेजने की तैयारी है।

NDRF की फ्लड रेस्क्यू टीम को भी गुरुवार सुबह तैनाती के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। हालांकि भारतीय रेस्क्यू टीम नेपाल तभी जाएगी, जब नेपाल सरकार इसकी फार्मल मंजूरी देगी। केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत बाढ़ के इस मुश्किल वक्त में नेपाल के लोगों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
अमेरिका ने जताया दुख, नेपाल सरकार के संपर्क में
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही पर अमेरिका ने भी दुख जताया है। नेपाल में US एम्बेसी ने X पर कहा- रसुवा जिले और नदी के निचले इलाकों में भोटे कोशी की बाढ़ से हुई मौतों और तबाही से हम बेहद दुखी हैं। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। हमारी संवेदनाएं इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। हम हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं और नेपाली अफसरों के लगातार संपर्क में हैं।

भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए इंडियन एम्बेसी ने दो इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। एम्बेसी ने X पर लिखा-, नेपाल में आज आई फ्लैश फ्लड से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए इमरजेंसी नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क किया जा सकता है।

बाढ़ की वजह आइस एवलांच, ल्हेंडे नदी ब्लॉक होने की आशंका
काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और क्लाइमेट रिसर्चर रिजन भक्त कायस्थ कायस्थ ने कांतिपुर से कहा- जानकारी मिली है कि नेपाल की तरफ से एक आइस एवलांच टूटकर ल्हेंडे नदी में गिरा और उसने नदी का रास्ता ब्लॉक कर दिया। इससे पीछे पानी जमा होता गया और फिर अचानक तेज फ्लो के साथ नीचे की तरफ निकला, जिससे भोटेकोशी नदी में फ्लैश फ्लड आ गई।

फाइनल वजह पता चलने में कुछ दिन लग सकते हैं
कायस्थ ने कहा- यह नॉर्मल बाढ़ नहीं थी। जिस तरह अचानक पानी आया, उससे लगता है कि ऊपर कहीं जमा पानी एक साथ तेजी से नीचे आया। हालांकि,यह शुरुआती आकलन है और इसकी फाइनल वजह पता लगाने में कुछ दिन लग सकते हैं।

बाढ़ के वक्त तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप भी आया
कायस्थ के मुताबिक, जिस समय फ्लैश फ्लड आया, उसी दौरान तिब्बत की तरफ भूकंप भी आया था। US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका सेंटर गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में था। हालांकि अभी यह साबित नहीं हुआ है कि भूकंप और आइस एवलांच के बीच कोई सीधा कनेक्शन था।

ग्लेशियल लेक फटने की आशंका भी
कायस्थ ने कहा- इस इलाके में कई बड़ी ग्लेशियल लेक हैं। पिछले साल भी ल्हेंडे नदी इसी तरह ब्लॉक हुई थी। इस बार शुरुआती आकलन यही है कि आइस एवलांच और संभवतः ग्लेशियल लेक फटने से बाढ़ आई। किसी ग्लेशियल लेक के फटने की पुष्टि करने में कई दिन लग सकते हैं। इसकी जांच इसलिए भी की जा रही है, क्योंकि इसी इलाके में पहले भी ग्लेशियल लेक फट चुकी हैं।

डिजास्टर अथॉरिटी बोली- हमें भी नदी ब्लॉक होने की जानकारी मिली
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की प्रवक्ता शांति महत ने भी आइस एवलांच वाली शुरुआती जानकारी की पुष्टि की। उन्होंने कहा- हमें अभी कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं मिली है, लेकिन ICIMOD ने दूसरी तरफ से मिली जानकारी हमारे साथ शेयर की है। यह अभी सिर्फ शुरुआती आकलन है। फिलहाल हमारा पूरा फोकस रेस्क्यू और रिलीफ पर है। बाढ़ की असली वजह धीरे-धीरे साफ होगी।

नेपाल से सटे बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट
बिहार के सीतामढ़ी,शिवहर,मुजफ्फरपुर, वैशाली, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण में बाढ़ की आशंका को देखते हुए हाईअलर्ट जारी किया गया है। इन सभी जिलों में NDRF को तैनात किया गया है।

सुबह 9 बजे अचानक बढ़ा नदी का पानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। शुरुआती जानकारी में पानी तिब्बत की तरफ से आने की बात कही गई है। रसुवा के डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स (Reuters) से कहा- हमें गांवों और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साइट्स के बह जाने की रिपोर्ट मिली है। बड़े पैमाने पर लोगों की मौत या प्रॉपर्टी का नुकसान हो सकता है, लेकिन अभी मैं इसे कन्फर्म नहीं कर सकता।

रसुवा में बारिश नहीं, तिब्बत से पानी आया
Kathmandu Post ने नेपाल के डिपार्टमेंट ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड मेटियोरोलॉजी के हवाले से लिखा है कि रसुवा में हुई बारिश इसकी वजह नहीं है। पानी अचानक तिब्बत की तरफ से भोटे कोशी नदी में आया। मंगलवार और बुधवार को रसुवा में इतनी भारी बारिश नहीं हुई, जिससे ऐसी बाढ़ आ सके। अब इस बात की भी जांच हो रही है कि आइस एवलांच के साथ कोई ग्लेशियल लेक भी फटी थी या नहीं।
अब अफसर इसकी वजह पता लगाने में जुटे हैं और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर के पास बनी झील के अचानक फटने की संभावना की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

गाड़ियां-सामान बहा, नया बना पुल भी टूटा
नेपाल आर्मी के मुताबिक, टिमुरे और स्याफ्रुबेसी में बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। पानी के तेज बहाव में गाड़ियां, कमर्शियल सामान और दूसरी प्रॉपर्टी बह गई।

रसुवा के चीफ कस्टम्स ऑफिसर राजेंद्र धुंगाना के मुताबिक, कस्टम्स परिसर में खड़ी कई गाड़ियां और वहां रखा सामान भी पानी में बह गया। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी फ्लड में तबाह हो गया। सड़कों और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है।
41 सुरक्षाकर्मी लापता, 12 लोगों को बचाया गया
बाढ़ के बाद 41 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। इनमें नेपाल पुलिस के 32 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 9 जवान शामिल बताए गए हैं। दूसरी तरफ नेपाल आर्मी ने प्रभावित इलाके से अब तक 33 लोगों को बचाया है। बाढ़ से कितना बड़ा इलाका प्रभावित हुआ और कितने लोग फंसे हैं, इसका पूरा आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। इसी वजह से प्रशासन ने फिलहाल किसी फाइनल कैजुअल्टी नंबर की पुष्टि नहीं की है।

रेस्क्यू में 12 हेलिकॉप्टर, MI-17 से मेडिकल टीम भेजी
नेपाल सरकार ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। नेपाल आर्मी, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। नेपाल आर्मी ने रसुवा और आसपास के इलाकों में रेस्क्यू और रिलीफ के लिए 12 हेलिकॉप्टर लगाए हैं।
एक MI-17 हेलिकॉप्टर से इमरजेंसी मेडिकल रेस्क्यू टीम को त्रिशूली के डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की तरफ भेजा गया है। एक्स्ट्रा एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें भी प्रभावित इलाकों के लिए रवाना की गई हैं।

प्राइवेट हेलिकॉप्टर को परमिशन की जरूरत नहीं
हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने रेस्क्यू, सर्च और रिलीफ में लगाए जाने वाले प्राइवेट हेलिकॉप्टर के लिए पहले से परमिशन लेने की जरूरत हटा दी है।
नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने काठमांडू से नुवाकोट के त्रिशूली के लिए एविएशन फ्यूल का टैंकर भी भेजा है। वहीं रेस्क्यू और कोऑर्डिनेशन आसान बनाने के लिए नेपाल टेलीकॉम ने धादिंग, नुवाकोट, रसुवा और चितवन में फोन और डेटा सर्विस फ्री कर दी है।

5 जिलों में अलर्ट, निचले इलाकों से लोगों को हटाने का आदेश
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रसुवा के साथ नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया है। नेपाल पुलिस ने कहा- तिब्बत की तरफ से रसुवा की भोटे कोशी नदी में बड़ी बाढ़ आने के कारण त्रिशूली रिवर बेसिन के नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा और आसपास के इलाकों के लोग बेहद सतर्क रहें और अगले आदेश तक सुरक्षित जगहों पर रहें।

PM शाह ने बुलाई नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने हालात की समीक्षा के लिए नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है। शाह ने कहा कि पुलिस, सेना और रिलीफ टीमों को मौके पर भेज दिया गया है। उन्होंने कहा- निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी सरकार, पॉलिटिकल पार्टियों और सामाजिक संगठनों से बाढ़ प्रभावित लोगों के रेस्क्यू और रिलीफ ऑपरेशन को तेज करने की अपील की है।

पिछले साल भी इसी नदी में बाढ़ आई थी
भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है और यही नदी आगे भारत में गंडक के नाम से बहती है। पिछले साल भी भोटे कोशी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस समय 9 लोगों की मौत हुई थी और 24 लोग लापता बताए गए थे।

पिछले साल बाढ़ के बाइ नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था, जिससे बाद कई महीनों तक ट्रांसपोर्ट और ट्रेड बंद रहा था। रीजनल क्लाइमेट मॉनिटर के मुताबिक, उस समय तिब्बत में एक सुप्राग्लेशियल लेक से अचानक पानी निकलने की वजह से बाढ़ आई थी।

नेपाल-चीन बॉर्डर पर भी लैंडस्लाइड
इसी बीच नेपाल-चीन बॉर्डर पर तिब्बत में हुए लैंडस्लाइड से कई लोगों के मारे जाने और लापता होने की आशंका है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह करीब 10:30 बजे नेपाल की तरफ लैंडस्लाइड हुआ, जिसका असर तिब्बत के शिगात्से शहर के ग्यिरोंग काउंटी स्थित ग्यिरोंग पोर्ट पर पड़ा।

लैंडस्लाइड के बाद नेपाल से तिब्बत की तरफ जाने वाली सड़कें बंद हो गईं। कम्युनिकेशन और बिजली सप्लाई पर भी असर हुआ है। सर्च और रेस्क्यू टीमें मौके पर भेजी गई हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों को खोजने और बचाने के लिए हर संभव कोशिश करने का निर्देश दिया है।

