नेपाल बाढ़- 1127 की मौत: 4 हजार से ज्यादा अब भी लापता; भारत की नदियों से मिले 17 शव- UN का दल आएगा
Published: Updated:
10 min read

नेपाल की नेशनल डिजास्टर एजेंसी के मुताबिक मुताबिक, अब तक 11227 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,247 लोग लापता हैं।
इंटरनेशनल डेस्क। नेपाल में पिछले हफ्ते आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 1227 हो गया है। तिब्बत में भी 16 मौतें दर्ज की गई हैं। लापता लोगों का आंकड़ा घटकर अब भी तकरीबन 4 हजार है। इससे माना जा रहा है कि मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है। तिब्बत में 546 लोग लापता हैं।
भारत की रेस्क्यू टीम टनल में 185 अंदर तक पहुंची। रिपोर्ट्स के मुताबिक- हमारी टीम ने 34 लोगों को सुरक्षित निकालकर इन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया है। आज UN की एक्पर्ट टीम नेपाल पहुंच रही है। ये हालात का जायजा लेकर आर्थिक और दूसरी मदद का रास्ता सुझाएगी।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भाषण के दौरान भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा- मैंने भारत के प्रधानमंत्री जी से बात की है और उन्होंने हमें हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया है।
275 भारतीय अब भी लापता
लापता विदेशियों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। Daily Sun की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में 275 भारतीय नागरिक और इंडियन ओरिजिन के 128 लोग लापता हैं। अमेरिका के 85, यूक्रेन के 62, मलेशिया के 51, ऑस्ट्रेलिया के 42 और ब्रिटेन के 33 नागरिकों का भी पता नहीं चला है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक सोमवार तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 158 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है। तिब्बत में लापता 546 लोगों में भी 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
टनल में 185 मीटर अंदर पहुंची भारतीय टीम
सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन बाढ़ से तबाह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में चल रहा है। भारत की स्पेशलाइज्ड टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना के साथ चिलिमे और लांगटांग साइट्स पर ऑपरेशन आगे बढ़ाया है। खराब मौसम और मुश्किल रास्तों के बावजूद चिलिमे में टीम टनल के अंदर अपना बेस बनाने और सेफ्टी रोप लगाने में कामयाब हुई। लांगटांग में भारतीय टीम टनल के भीतर 185 मीटर तक जांच कर चुकी है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी अब भी लापता हैं और इनमें से कई के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है।
भारत में नदियों से मिले 17 शव
नेपाल की बाढ़ का असर सीमा पार भारत तक भी पहुंचा है। उत्तर प्रदेश में नेपाल से बहकर आने वाली नदियों से 17 शव बरामद किए गए हैं। आशंका है कि ये नेपाल की बाढ़ में बहकर आए लोगों के शव हो सकते हैं। भारतीय अफसर इनकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। इन 17 शवों को अभी नेपाल के आधिकारिक डेथ टोल में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में पहचान पूरी होने और नेपाल की एजेंसियों से रिकॉर्ड मैच होने के बाद ही यह साफ होगा कि ये लोग नेपाल की बाढ़ के शिकार थे या नहीं।
नेपाल सरकार और रेड क्रॉस ने मिलकर फ्लड विक्टिम्स के लिए काउंसलिंग सेंटर शुरू किए हैं। इसके अलावा अब हाईटेक ड्रोन के मदद से रेस्क्यू किया जा रहा है भारत समेत 4 देशों की रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं। इस बीच वर्ल्ड बैंक ने नेपाल को 25 अरब नेपाली रुपए की मदद करने का ऐलान किया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कंडोलेंस बुक पर साइन किए
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को काठमांडू में इंडियन एम्बेसी पहुंचे। यहां उन्होंने नेपाल बाढ़ त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और कंडोलेंस बुक पर साइन किए। राजनाथ ने एक्स पोस्ट में लिखा- भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से मैं 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं।

भारत-नेपाल एक दूसरे के सुख-दुख के साथी
राजनाथ ने कहा- यह एक बेहद दुख प्राकृतिक आपदा है। इससे नेपाल के साथ भारत और दूसरे कई देशों के नागरिक पीड़ित हुए हैं। मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की काम करना करता हूं। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है उनके प्रति संवेदना। एक सुख-दुख का साथी होने के नाते भारत हमेशा से नेपाल के साथ खड़ रहा है। इस दुख की घड़ी में भी हम अपने नेपाली भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और नेपाल के सर्च रेस्क्यू और रिहैबिलेशन की कोशिशों में साथ साथ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रसुवा जिले में तीन भारतीयों को रेस्क्यू किया गया
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन कुमार श्रीवास्तव ने कहा- सोमवार को रसुवा जिले के चिलिमे गांव से चार लोगों को रेस्क्यू किया गया। इनमें से तीन भारतीय हैं। श्रीवास्तव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- तीन भारतीय नागरिकों और उनके नेपाली दोस्तों से मिला जिन्हें रसुवा से रेस्क्यू किया गया है। हम नेपाली आर्मी को मदद के लिए धन्यवाद कहते हैं। बता दें कि भारत ने 11 मेंबर वाली रेस्क्यू टीम को नेपाल भेजा है।

चीन ने समय से जानकारी नहीं देने की खबरों को फेक बताया
चीन ने नेपाल को समय से पहले बाढ़ की चेतावनी नहीं देने की बात से इनकार किया है। चीन ने कहा कि समय से सूचना नहीं देने से जुड़ी खबरें आधारहीन और बेबुनियाद हैं। चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि हम फ्लड और मडस्लाइड से जुड़ी इन्फॉर्मेशन आगे बढ़ाने में ट्रांसपेरेंट रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में हमारे खिलाफ गलत कैंपेनिंग की जा रही है। हम ऐसे आधारहीन और इमेज को नुकसान पहुंचाने वाले दावों को खारिज करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया ने मदद करने का ऐलान किया।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को नेपाल को मदद करने का ऐलान किया। एक एक्स पोस्ट में अल्बनीज ने कहा- आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलियान एयर फोर्स C-17A ह्यूमैनिटेरियन सप्लाई, इक्विपमेंट और जवानों के साथ नेपाल जाएगा।

अल्बनीज ने कहा- हम दुख की इस घड़ी में उन ऑस्ट्रेलियन परिवारों के साथ खड़े हैं जिनके अपने नेपाल बाढ़ त्रासदी के बाद से लापता हैं। हम नेपाल सरकार के साथ मिलकर हर संभव मदद करने की कोशिश करेंगे।

सबसे ज्यादा 272 शव चितवन में मिले
NDRRMA के मुताबिक, अब तक सबसे ज्यादा 272 शव चितवन में मिले हैं। नवलपरासी ईस्ट में 207, नवलपरासी वेस्ट में 151, नुवाकोट में 95, गोरखा में 62, धादिंग में 55, तनहूं में 37 और रसुवा में 24 शव बरामद हुए हैं। Kathmandu Post के मुताबिक, कई शव बाढ़ के तेज बहाव में सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच गए थे। लापता 4,247 लोगों में नुवाकोट के 1,558 और रसुवा के 865 लोग शामिल हैं। इसके अलावा 592 विदेशी नागरिक भी अभी लापता हैं।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 933 लोगों का पता नहीं
Reuters के मुताबिक इस समय रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे बड़ा फोकस बाढ़ से ब्लॉक हुई हाइड्रोपावर टनल्स पर है। NDRRMA के मुताबिक, अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 933 लोग अभी लापता हैं। इंडियन और चाइनीज एक्सपर्ट्स की मदद से नेपाली सेना करीब 6 टनल्स के आसपास ऑपरेशन चला रही है। मिट्टी, बड़े पत्थर और मलबे की मोटी परत के कारण टनल के एंट्री पॉइंट तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। अर्थ मूविंग मशीनों और सैनिकों की मदद से रात में भी मलबा हटाने का काम जारी है।

भारत-चीन और साउथ कोरिया की टीमें मैदान में
नेपाल ने शुरुआत में विदेशी रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं होने की बात कही थी, लेकिन अब स्पेशलाइज्ड ऑपरेशन में दूसरे देशों की मदद ली जा रही है। नेपाल की फॉरेन मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत, चीन और साउथ कोरिया के टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स को नेपाली सेना के साथ लगाया गया है। भारत की 11मेंबर की स्पेशलाइज्ड टनल टीम और चीन की 9 मेंबर वाली टीम ऑपरेशन में शामिल है। भारत के 18 फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम भी नेपाल पहुंच चुकी है। यह टीम DNA एनालिसिस के जरिए शवों की पहचान में मदद कर रही है।
भारत ने भेजी 68 टन से ज्यादा राहत सामग्री
भारत ने रेस्क्यू एक्सपर्ट्स के साथ नेपाल को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भी भेजी है। चार मिलिट्री फ्लाइट्स के जरिए अब तक करीब 68.5 टन इमरजेंसी राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। इसमें टेंपरेरी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें शामिल हैं। भारत टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक टीम के अलावा बेली ब्रिज और उन्हें लगाने के लिए टेक्निकल सपोर्ट भी दे रहा है।

149 भारतीयों का रेस्क्यू, चीन से 598 नेपाल पहुंचे
भारत की फॉरेन मिनिस्ट्री (MEA) के रविवार शाम 5:30 बजे तक के अपडेट के मुताबिक, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 149 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इससे पहले MEA ने बताया था कि चीन की तरफ फंसे 598 भारतीय दो दिनों में बॉर्डर पार कर सुरक्षित नेपाल पहुंच गए।

फ्लैश फ्लड से पहले करीब 900 भारतीय चीन की तरफ मौजूद थे, लेकिन उन्हें सुरक्षित और उनके संपर्क में होने की जानकारी दी गई थी। शनिवार रात तक 275 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग लापता बताए गए थे। भारतीय नागरिकों को ट्रेस करने के लिए MEA और भारतीय एम्बेसी नेपाल और चीन की अथॉरिटीज के साथ कोऑर्डिनेशन कर रही हैं।

वर्ल्ड बैंक से मिल सकती है 25 अरब नेपाली रुपए की मदद
नेपाल को इंटरनेशनल लेवल पर आर्थिक मदद भी मिल रही है। Kathmandu Post के मुताबिक, World Bank के नेपाल कंट्री डायरेक्टर डेविड सिसलेन ने नेपाल के फाइनेंस मिनिस्टर स्वर्णिम वाग्ले को बताया था कि अलग-अलग सोर्स से इमरजेंसी मदद के तौर पर 25 अरब नेपाली रुपए तक जुटाए जा सकते हैं। यह करीब 16.35 करोड़ डॉलर के बराबर है।
हालांकि यह रकम ग्रांट होगी, लोन होगा या किसी दूसरे फाइनेंसिंग मॉडल के तहत दी जाएगी, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिका ने 5 लाख डॉलर की मदद का ऐलान किया है, जबकि ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड देने की बात कही है।
तिब्बत में 16 मौतें, 546 लोग लापता
Reuters के मुताबिक, इस तबाही का असर नेपाल तक सीमित नहीं है। चीन के तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता बताए गए हैं। चीन ने अपने इलाके में 2,100 से ज्यादा रेस्क्यू पर्सनल तैनात किए हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अफसरों को लापता लोगों की तलाश और रेस्क्यू के लिए हर संभव कोशिश करने का निर्देश दिया है। नेपाल में भी करीब 21 हजार सिक्योरिटी पर्सनल और दूसरे रेस्क्यू वर्कर्स ऑपरेशन में लगे हैं। रेड क्रॉस के मुताबिक, इस डिजास्टर से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
ग्लेशियर टूटने के बाद आया था बर्फ-पत्थरों का सैलाब
वैज्ञानिकों की शुरुआती जांच में इस बाढ़ की वजह एक बड़े आइस-रॉक एवलांच को माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे आया। यह मलबा नदी सिस्टम में पहुंचा और फिर तेज बहाव के साथ कस्बों, गांवों, ब्रिज और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को अपनी चपेट में लेता गया। अब नेपाल के सामने एक साथ तीन बड़ी चुनौतियां हैं—4,247 लापता लोगों की तलाश, टनल्स में फंसे लोगों तक पहुंचना और दोबारा फ्लैश फ्लड के खतरे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखना।

