जापान की ये बिल्ली क्यों वायरल : क्या जानवरों को नैचुरल डिजास्टर्स का अहसास हो जाता है- ये कहानी कुछ कहती है
Published:
4 min read

इंटरनेशनल डेस्क। जापान में 28 जुलाई को आए 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद एक बिल्ली का वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में बिल्ली भूकंप आने से कुछ सेकंड पहले अचानक बेचैन होकर इधर-उधर भागने लगती है। जैसे ही जमीन हिलती है, वह तेजी से कमरे से बाहर निकल जाती है।
हमेशा से चूहों, कुत्तों, हाथियों, सांपों और पक्षियों के ऐसे कई किस्से सामने आते रहे हैं। माना जाता है कि जानवरों को पहले ही प्राकृतिक आपदा का आभास हो जाता है। यानी अगर कोई नैचुरल डिजास्टर जैसे भूकंप या ज्वालामुखी फटने वाले हैं तो वो भांप जाते हैं और उनकी हरकतें अचानक बदल जाती हैं।
लंबे वक्त से इस बारे में रिचर्स जारी हैं। हालांकि, कोई पुख्ता या ठोस नतीजा सामने आया….ये नहीं कहा जा सकता। मीडिया रिपोर्ट्स जरूर इस बारे में कई दावे करती हैं। ‘राज एक्सप्रेस’ के इस स्पेशल इंटरनेशनल एक्सप्लेनर में आज बात इसी रोचक, लेकिन संवेदनशील मुद्दे पर…चलिए शुरू करते हैं…
पहले भी होते रहे हैं ऐसे दावे...
असल में ऐसी बातें पहली बार नहीं कही जा रहीं। इतिहास में भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी फटने से पहले जानवरों के एबनॉर्मल बिहेवियर के सैकड़ों दावे मिलते हैं। सबसे ज्यादा चर्चित उदाहरण चूहों का है। माना जाता है कि जमीन के नीचे होने वाली हलचल शुरू होते ही चूहे अपने बिल छोड़कर बाहर निकलने लगते हैं।

कुत्तों के बारे में भी किए जाते हैं ऐसे दावे
सिर्फ चूहे ही नहीं, कुत्तों के बारे में भी ऐसे कई दावे किए जाते हैं। कई लोगों का कहना है कि भूकंप आने से पहले कुत्ते बिना वजह लगातार भौंकने लगते हैं, बेचैन होकर भागते हैं या घर से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। BBC Future की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई देशों में पेट ओनर्स ने ऐसे एक्सपीरिएंस शेयर किए हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके कुत्ते भूकंप से कुछ मिनट पहले अजीब हरकतें करने लगे थे।

हाथियों की कहानियां भी कम दिलचस्प नहीं हैं। 2004 की हिंद महासागर सुनामी के दौरान श्रीलंका और थाईलैंड में कई लोगों ने दावा किया था कि हाथी समुद्र की तरफ जाने के बजाय ऊंची जगहों की ओर भागने लगे थे। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि हाथियों ने सुनामी आने से काफी पहले ही समुद्र तट छोड़ दिया था।
इसी तरह सुनामी से पहले हिरण, भैंस और दूसरे जंगली जानवर भी जंगल के ऊंचे इलाकों की तरफ जाते देखे गए थे। बाद में जब सुनामी आई तो जिन इलाकों में हजारों लोग मारे गए, वहां जंगली जानवरों के मरने की संख्या बेहद कम थी। इसके बाद भी यह सवाल उठा था कि क्या जानवरों के पास कोई ऐसी नैचुरल क्षमता होती है, जो इंसानों में नहीं होती। हालांकि अभी तक ऐसा कोई सॉलिड साइंटिफिक प्रूफ नहीं मिला है। साइंटिस्ट्स आज भी इस टॉपिक पर रिसर्च कर रहे हैं।

साइंटिस्ट्स पूरी तरह से दावों को नजरअंदाज नहीं कर रहे
इसके बावजूद साइंटिस्ट्स जानवरों से जुड़े दावों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। इटली, जर्मनी, जापान और चीन में कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जहां गाय, भेड़, कुत्तों और दूसरे जानवरों की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। उनके गले में GPS ट्रैकर और सेंसर लगाए जाते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि क्या किसी बड़े भूकंप से पहले उनके व्यवहार में कोई कॉमन पैटर्न बनता है। अगर भविष्य में ऐसा कोई भरोसेमंद पैटर्न मिलता है, तो उसे मौजूदा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के साथ जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।
जानवरों के बिहेवियर पर रिसर्च हो रहा
BBC Future की रिपोर्ट के मुताबिक, एंजिला रस्किन यूनिवर्सिटी (Anglia Ruskin University) की प्रोफेस डॉ. रेचल ग्रांट जानवरों के बिहेवियर और भूकंप पर कई साल से रिसर्च कर रही हैं। डॉ ग्रांट का कहना है कि भूकंप से पहले चट्टानों पर पड़ने वाला प्रेशर हवा, पानी और जमीन में ऐसे बदलाव ला सकता है, जिन्हें कुछ जानवर इंसानों से पहले महसूस कर लेते हैं। हालांकि, अभी इसे भूकंप का प्रिडिक्शन नहीं माना जाता सकता।
कैसे काम करती है भूकंप पता लगाने वाली टेक्नोलॉजी
इसीलिए आज दुनिया के सबसे एडवांस भूकंप अलर्ट सिस्टम टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं। जापान में हजारों सिस्मिक सेंसर जमीन के अंदर होने वाली हल्की से हल्की हलचल रिकॉर्ड करते हैं। जैसे ही सेंसर शुरुआती P-Wave पकड़ते हैं, सिस्टम कुछ सेकंड के भीतर मोबाइल फोन, टीवी, रेडियो, ट्रेन नेटवर्क और सरकारी एजेंसियों को अलर्ट भेज देता है। इसके बाद आने वाली S-Wave ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। कई बार यही कुछ सेकंड लोगों की जान बचाने के लिए काफी होते हैं। जापान, अमेरिका और दूसरे देशों में यही सिस्टम सबसे भरोसेमंद माना जाता है।

