पुतिन-मोदी की मुलाकात के 3 दिन बाद यूक्रेन पहुंचे जयशंकर: बोले- जंग से कुछ नहीं होगा; भारत हर तरह से मदद को तैयार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को यूक्रेन पहुंचे।यहां उन्होंने यूक्रेन के फॉरेन मिनिस्टर से मुलाकात की। (इमेज AI की मदद से इनहेंस की गई है।)
इंटरनेशनल डेस्क। प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात के तीन दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को यूक्रेन पहुंचे। कीव में उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री साइबिहा से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में जयशंकर ने रूस-यूक्रेन जंग खत्म कराने के लिए भारत की तरफ से मदद की पेशकश की। उन्होंने कहा- अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है तो हम मौजूद हैं।
भारत कई बार कह चुका है कि इस कॉन्फ्लिक्ट का समाधान जंग के मैदान में नहीं निकाला जा सकता। अंतिम समाधान बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए ही संभव है। जयशंकर के इस स्टेटमेंट का मैसेज यह है कि रूस-यूक्रेन की सहमति होने पर भारत पीस टॉक में मददगार या मीडिएटर की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

3 दिन पहले मोदी ने पुतिन से की थी बात
जयशंकर का यूक्रेन दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे सिर्फ तीन दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। SCO समिट के दौरान हुई इस मीटिंग में मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग का मुद्दा उठाया था। मोदी ने कहा था कि दुनिया को एंडलेस वॉर से एंड ऑफ वॉर की तरफ बढ़ना होगा यानी रूस-यूक्रेन की जंग खत्म होनी चाहिए।

जेलेंस्की कर चुके हैं मीडिएटर बनने की पेशकश
मोदी ने पुतिन के साथ बातचीत में डिप्लोमेसी के जरिए समाधान निकालने की भारत की पुरानी पोजिशन दोहराई थी। अब जयशंकर की कीव विजिट को भारत के रूस और यूक्रेन दोनों के साथ डिप्लोमैटिक कॉन्टैक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी यह बात कह चुके हैं कि अगर भारत कोशिश करे तो रूस और यूक्रेन की जंग खत्म करवाई जा सकती है।
ब्लैक सी में जहाजों पर हमले का मुद्दा भी उठा
जयशंकर और साइबिहा की बातचीत में ब्लैक सी के बिगड़ते हालात परन भी चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों पर दोनों पक्षों ने विस्तार से चर्चा की। ब्लैक सी में हाल के दिनों में कमर्शियल जहाजों और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बढ़े हैं। यह मुद्दा भारत के लिए अहम है क्योंकि समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों की मौत भी हुई है।

भारत पहले भी कमर्शियल जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है। ब्लैक सी में कई कार्गो और टैंकर जहाज अब ड्रोन अटैक से बचने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्लैक सी में चार ऐसे जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है जिन पर भारतीय सेलर्स सवार थे।
जयशंकर का यूक्रेन दौरा भारत के लिए अहम क्यों
जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की विजिट पर हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस विजिट का मकसद दोनों देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय समस्याओं और आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करना है। यूक्रेन के बाद जयशंकर पोलैंड जाएंगे और वहां के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से बातचीत करेंगे। खास बात यह है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क में है।
जंग खत्म होने की संभावना पर पुतिन का भी बयान
इसी बीच गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी जंग खत्म करने की संभावना पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए समझौते की संभावना मौजूद है, लेकिन अंतिम समाधान रूस और यूक्रेन को ही निकालना होगा। हालांकि दोनों देशों के बीच फॉर्मल पीस टॉक फरवरी से रुकी हुई है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हवाई और समुद्री हमले बढ़े हैं। ऐसे माहौल में जयशंकर का कीव पहुंचना और भारत का किसी भी तरह मदद के लिए तैयार होने का बयान अहम है। भारत ने एक बार फिर बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिये जंग खत्म करने की वकालत की है।

