UNSC में भारत की दावेदारी को चार और देशों का साथ: 5 में से 4 परमानेंट मेंबर पहले ही सपोर्ट में, चीन की चुप्पी सबसे बड़ी अड़चन; क्या है समीकरण
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V4 यूरोप के चार देशों का एक समूह है। इसमें हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं। इस समूह ने UN में भारत की परमानेंट मेंबरशिप का सपोर्ट किया है।
नेशनल डेस्क। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में परमानेंट मेंबरशिप के लिए भारत की कोशिश को एक और बड़ा सपोर्ट मिला है। हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य यानी Visegrad Group (V4) के चारों देशों ने भारत को इस काउंसिल में परमानेंट सीट देने की मांग का समर्थन किया है।
न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) के 81वें सत्र से इतर हुई पहली V4-India विदेश मंत्रियों की बैठक में चारों देशों ने भारत की दावेदारी को सपोर्ट किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बड़ी ताकत के तौर पर भारत को UNSC में परमानेंट मेंबर के तौर पर जगह मिलनी चाहिए।
पहले समझिए-UNSC में स्थायी सीट का मतलब क्या है?
UNSC में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें 5 परमानेंट और 10 टेंपररी मेंबर होते हैं। अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस परमानेंट मेंबर हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है। यानी सिक्योरिटी काउंसिल के किसी बड़े फैसले पर इनमें से कोई एक देश वीटो कर दे तो प्रस्ताव पास नहीं हो सकता।
बाकी 10 सदस्य देशों को दो साल के लिए चुना जाता है। भारत भी अब तक 8 बार अस्थायी मेंबर रह चुका है। आखिरी बार भारत 2021-22 में UNSC का सदस्य था।
भारत क्यों चाहता है परमानेंट सीट?
भारत का कहना है कि UNSC की मौजूदा व्यवस्था आज की दुनिया की तस्वीर नहीं दिखाती। यूनाइटेड नेशंस की स्थापना 1945 में हुई थी। उस वक्त एशिया और अफ्रीका के कई देश यूरोपीय देशों के अधीन थे। आज UN के सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 193 हो चुकी है, लेकिन सिक्योरिटी काउंसिल के परमानेंट मेंबर्स की संख्या 80 साल बाद भी नहीं बदली।
भारत अपनी दावेदारी के पक्ष में कई बातें रखता है। इनमें भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था, UN शांति अभियानों में योगदान और दुनिया की राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका शामिल है।
भारत अकेले इस मांग को नहीं उठा रहा है। G4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) के चारों देश एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।

कौन-कौन देश भारत के साथ?
भारत को मौजूदा स्थायी सदस्यों में से अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन का समर्थन मिल चुका है।
फ्रांस: फरवरी 2026 में फ्रांस ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में UNSC में भारत की परमानेंट मेंबरशिप के लिए अपना मजबूत समर्थन दोहराया।
ब्रिटेन: 2024 में ब्रिटेन ने UN जनरल असेंबली में कहा कि वह सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सीटें बढ़ाने का समर्थन करता है और भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान को स्थायी सीट दिए जाने के पक्ष में है।
अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग भी कुछ मौकों पर कह चुका है कि वह ऐसे सुधार वाले UNSC का समर्थन करता है, जिसमें भारत को परमानेंट मेंबर बनाया जाए।
रूस: रूस भी लंबे अरसे से भारत की परमानेंट मेंबरशिप की दावेदारी के पक्ष में रहा है।
UNSC के इन परमानेंट मेंबर्स के अलावा भी दुनियाभर के कई देश भारत के पक्ष में अपनी बात रखते रहे हैं। इस लिस्ट में अब हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य जैसे नए नाम शामिल हुए हैं।
सिर्फ भारत को सीट मिलना ही मुद्दा नहीं
UNSC सुधार की बहस में एक और बड़ा सवाल है- नई स्थायी सीटें कितनी हों और किन देशों को मिलें?
भारत और G4 चाहते हैं कि स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सीटें बढ़ाई जाएं। वहीं अफ्रीकी देश भी सिक्योरिटी काउंसिल में अपने लिए स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। इसलिए भारत के समर्थन में आने वाला हर देश जरूरी नहीं कि UNSC के फाइनल मॉडल पर भारत से पूरी तरह सहमत हो।

परमानेंट सीट मिलने पर भारत को क्या मिलेगा?
अगर भारत परमानेंट मेंबर बनता है तो सबसे पहला बदलाव यह होगा कि भारत को हर दो साल बाद सीट खाली नहीं करनी होगी। वह लगातार UNSC की मेज पर रहेगा। इससे भारत को युद्ध, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, प्रतिबंध, शांति अभियानों और दूसरे बड़े सुरक्षा मामलों पर लगातार चर्चा और फैसलों में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।
स्थायी सदस्य यह तय करते हैं कि दुनिया के किस हिस्से में सैन्य हस्तक्षेप करने की जरूरत है, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन कहां भेजे जाएंगे और किस देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ऐसे में दुनिया के छोटे से लेकर बड़े मसलों पर लिए जाने वाले फैसलों में भारत का मत अहम होगा।
इस पद के जरिए भारत अपने रणनीतिक और कूटनीतिक हितों के खिलाफ आने वाले किसी भी इंटरनेशनल फैसले या प्रस्ताव को आसानी से रोक सकता है। भारत का राजनीतिक कद भी काफी बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में उसकी स्थिति मजबूत होगी।
सबसे महत्वपूर्ण ताकत 'वीटो पावर' है। अगर यह ताकत है तो दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों के एकजुट होकर लिए गए फैसले को भी भारत रोकने में सफल रहेगा। हालांकि यह भी चर्चा है कि अब जो भी नए परमानेंट मेंबर चुने जाएंगे उन्हें अभी वीटो पावर नहीं दिया जाएगा। G-4 समूह इस तरह के प्रस्ताव का विरोध भी करता रहा है।
आखिर फैसला इतना मुश्किल क्यों?
नई स्थायी सीट बनाने के लिए सिर्फ देशों का समर्थन काफी नहीं है। UN Charter में बदलाव करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई वोट यानी UN के दो-तिहाई सदस्य देशों की मंजूरी चाहिए। साथ ही मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों को भी इसे मंजूर करना होगा।
यही वजह है कि UNSC में सुधार की चर्चा कई सालों से चल रही है, लेकिन ठोस बदलाव अब तक नहीं हो पाया।
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