भारत-स्विट्जरलैंड के बीच 5 अहम समझौते: मोदी- पारमेलिन की मीटिंग में 10 लाख डायरेक्ट जॉब्स पर चर्चा; 9 लाख करोड़ के इनवेस्टमेंट का प्लान
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भारत और स्विट्जरलैंड ने सोमवार को 5 अहम समझौतों पर साइन किए।
इंटरनेशनल डेस्क। भारत और स्विट्जरलैंड ने अपनी स्ट्रैटेजिक और इकोनॉमिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के लिए सोमवार को कई अहम फैसले किए। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन के बीच डेलिगेशन लेवल बातचीत हुई। इसके बाद दोनों देशों के बीच माइग्रेशन एंड मोबिलिटी, यंग प्रोफेशनल्स, ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी, साइंस और इनोवेशन से जुड़े 5 एग्रीमेंट्स हुए।
दोनो देशों के बीच डिफेंस प्रोडक्शन, मिलिट्री एक्सचेंज और सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। आइए, जानते हैं किन समझौतों पर बात बनी है...
सबसे पहले समझिए- कौन सा FTA हुआ है
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अलग से कोई बाइलेटरल FTA साइन नहीं हुआ है। जिस ट्रेड डील की बात हो रही है, वह भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन यानी EFTA के चार देशों- स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के बीच ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप प्रोग्राम (TEPA) है। यह 10 मार्च 2024 को साइन हुआ था और 1 अक्टूबर 2025 से लागू है। PM मोदी ने कहा- यूरोप के किसी इकोनॉमिक ब्लॉक के साथ भारत का यह पहला FTA है।

9.6 लाख करोड़ इनवेस्टमेंट का प्लान
TEPA के तहत EFTA देशों ने अगले 15 साल में भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 9.6 लाख करोड़ रुपए) के इनवेस्टमेंट का टारगेट रखा है। इसके साथ भारत में करीब 10 लाख डायरेक्ट जॉब्स पैदा करने का भी टारगेट है। TEPA में इनवेस्टमेंट के लिए पहले 10 साल में 50 बिलियन डॉलर (4.3 लाख करोड़ रुपए) और अगले 5 साल में एक्स्ट्रा 50 बिलियन डॉलर (4.3 लाख करोड़ रुपए) का टारगेट रखा गया है। यानी यह सिर्फ टैरिफ कम करने वाली ट्रेड डील नहीं है, बल्कि इनवेस्टमेंट और रोजगार को भी इससे जोड़ा गया है।
भारत के किन प्रोडक्ट्स को स्विस मार्केट में फायदा
इस पार्टनरशिप का फायदा इंडियन एक्सपोर्टर्स को मिल सकता है। PM मोदी के मुताबिक भारत के एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स, फार्मा, टेक्सटाइल्स और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए स्विट्जरलैंड के मार्केट में एक्सेस बढ़ेगा। दूसरी तरफ भारत में बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे सेक्टर्स में स्विस इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की कोशिश होगी। TEPA के तहत EFTA ने अपने 92.2% टैरिफ लाइन्स पर मार्केट एक्सेस दिया है, जो भारत के एक्सपोर्ट्स के 99.6% हिस्से को कवर करता है।

चलिए अब जानते हैं पांच बड़े एग्रीमेंट्स कौन से
पहला बड़ा एग्रीमेंट- माइग्रेशन और मोबिलिटी
भारत और स्विट्जरलैंड ने माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (Migration and Mobility Partnership) यानी MMP पर MoU किया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच लीगल माइग्रेशन और मोबिलिटी को आसान बनाना है। इसमें 5 साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रॉविजन है, जिसमें हर विजिट पर 6 महीने तक रहने की सुविधा दी जा सकती है। स्टूडेंट्स के लिए 1 साल के रिन्यू होने वाले परमिट का भी प्रावधान रखा गया है। साथ ही इर्रेगुलर माइग्रेशन, ह्यूमन एक्सप्लॉयटेशन और ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।

दूसरा एग्रीमेंट- यंग प्रोफेशनल्स के लिए नए मौके
दोनों देशों ने यंग प्रोफेशनल स्कीम (Young Professionals Scheme) पर भी एग्रीमेंट किया है। इसके तहत भारत और स्विट्जरलैंड के यंग प्रोफेशनल्स दूसरे देश में टेंपरेरी रोजगार लेकर अपने प्रोफेशनल और लैंग्वेज स्किल्स को बढ़ा सकेंगे। शुरुआत में हर साल दोनों देशों से 300-300 लोगों का एक्सचेंज होगा, जिसे आगे बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है।
तीसरा एग्रीमेंट- ट्रांसपोर्ट, मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत और स्विट्जरलैंड ने ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीस (Transportation Technologies), मोबिलिटी सिस्टम (Mobility Systems) और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर MoU किए हैं। इसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, टनल्स और दूसरे ट्रांसपोर्ट सेक्टर्स में टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर कोऑपरेशन बढ़ाने की बात है।

PM मोदी ने कहा- वाराणसी रोप-वे, नोएडा के जेवर एयरपोर्ट और पहाड़ी इलाकों में रेलवे और टनलिंग प्रोजेक्ट्स को भारत-स्विट्जरलैंड इंफ्रास्ट्रक्चर कोऑपरेशन के उदाहरण हैं। भारत ने स्विस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को यहां इनवेस्टमेंट, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग में हिस्सा लेने का न्योता भी दिया है।
चौथा एग्रीमेंट- साइंस एंड रिसर्च
भारत के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) साइन हुआ है। इसका मकसद दोनों देशों के रिसर्चर्स और साइंटिफिक इंस्टीट्यूशंस के बीच लॉन्ग टर्म कोऑपरेशन बढ़ाना है। इसके जरिए हेल्थ, क्लीन एनर्जी और स्पेस जैसे हाई-टेक सेक्टर्स में जॉइंट रिसर्च और नए प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।

पांचवां एग्रीमेंट- इनोवेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
DST और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट हुआ है। इसके तहत इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप्स के लिए इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी काम होगा, ताकि रिसर्च को टेक्नोलॉजी और फिर बिजनेस सॉल्यूशन में बदलने का रास्ता आसान हो सके।
डिफेंस और न्यूक्लियर एनर्जी पर भी बढ़ा फोकस
मोदी-पारमेलिन की बातचीत में सिर्फ ट्रेड और टेक्नोलॉजी पर ही चर्चा नहीं हुई। दोनों देशों ने मिलिट्री एक्सचेंज और डिफेंस प्रोडक्शन में कोऑपरेशन की नई संभावनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने ग्लोबल पीस, स्टेबिलिटी और ग्लोबल इंस्टीट्यूशंस में रिफॉर्म जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। PM मोदी ने यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में शांति के लिए की जा रही कोशिशों को सपोर्ट करने की बात भी कही।
स्विट्जरलैंड के लिए भारत क्यों अहम
स्विट्जरलैंड पहले से भारत का बड़ा ट्रेड और इन्वेस्टमेंट पार्टनर है। 2024 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 330 से ज्यादा स्विस कंपनियां काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने 1.66 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा किए। इन कंपनियों की मौजूदगी इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, केमिकल्स और R&D जैसे सेक्टर्स में है। अब TEPA और सोमवार को हुए नए समझौतों के जरिए दोनों देश इस मौजूदा बेस को और बड़ा करना चाहते हैं।
पारमेलिन तीन दिन की इंडिया विजिट में क्या-क्या करेंगे
स्विस राष्ट्रपति गाय पारमेलिन 5 से 7 अक्टूबर तक भारत के स्टेट विजिट पर हैं और उनके साथ बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भी आया है। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें राष्ट्रपति भवन में सेरेमोनियल वेलकम दिया गया और उन्होंने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी उनसे मुलाकात की। 7 अक्टूबर को भारत-EFTA बिजनेस लीडर्स के साथ प्रॉस्पेरिटी समिट (Prosperity Summit) होगी। इस समिट में TEPA के तहत तय इनवेस्टमेंट और ट्रेड टारगेट्स को रियल बिजनेस प्रोजेक्ट्स में बदलने पर फोकस रहेगा।

