40 साल बाद कनाडा ने सच कबूला: खुफिया एजेंसी ने कहा- एयर इंडिया की फ्लाइट में खालिस्तानियों ने ही बम रखा था; 323 मौतें हुई थीं
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Canada की खुफिया एजेंसी CSIS ने 40 साल बाद माना है कि कनिष्क बम धमाके में खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था।
इंटरनेशनल डेस्क। कनाडा ने 40 साल बाद पहली बार मान लिया है कि 1985 में हुए एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकी थे। यह बात कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपने ऑफिशियल बयान में कही है। इस धमाके को कनिष्क बॉम्बिंग (Kanishka Bombing) भी कहा जाता है। इस धमाके में प्लेन में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें ज्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे। भारत कई सालों से यही कहता रहा है कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन पर रची गई थी। अब कनाडा की अपनी एजेंसी ने भी इस पर मुहर लगा दी है।
CSIS ने क्या कहा
कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने कहा कि 23 जून 1985 को कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों ने एयर इंडिया फ्लाइट 182 में बम रखा था। एजेंसी ने इसे कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला बताया। उसने कहा कि इस घटना ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के काम करने का तरीका बदल दिया। CSIS ने यह भी कहा कि पिछले चार दशकों से एजेंसी पॉलिटिकल, रिलीजियस और दूसरी तरह की हिंसा से कनाडाई नागरिकों की सुरक्षा करने में जुटी हुई है।

कैसे हुआ था एयर इंडिया ब्लास्ट
एयर इंडिया का बोइंग 747 प्लेन टोरंटो से मुंबई आ रहा था। रास्ते में इसकी लैंडिंग लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर होनी थी। जांच में सामने आया कि बब्बर खालसा से जुड़े एक शख्स ने प्लेन के लगेज में बम रखा था। वह खुद फ्लाइट में नहीं बैठा। हीथ्रो पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले बम फट गया। धमाके के बाद प्लेन अटलांटिक महासागर में गिर गया। हादसे के बाद सिर्फ 131 शव ही बरामद किए जा सके।

भारत का दावा अब सही साबित हुआ
भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले के पीछे कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी थे। भारत ने कई बार कनाडा से ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग भी की। लेकिन लंबे समय तक कनाडा ने इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहा। अब CSIS के बयान के बाद भारत का पुराना दावा सही साबित हुआ है। यह पहली बार है जब कनाडा की किसी सरकारी एजेंसी ने साफ शब्दों में माना कि हमला कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों ने किया था।

जांच में क्या सामने आया था
2010 में इस मामले की जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों से कई बड़ी गलतियां हुई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को लंबे समय तक सिर्फ भारत से जुड़ा मुद्दा समझा गया। इसी वजह से जांच और सुरक्षा में कई चूक हुईं। उसी साल तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी भी मांगी थी। उन्होंने माना था कि सरकार और एजेंसियां इस हमले को रोकने और बाद में परिवारों को न्याय दिलाने में पूरी तरह कामयाब नहीं रहीं।

भारत-कनाडा रिश्तों के लिए क्यों अहम है बयान
2023 में हरदीप सिंह निज्जर मामले के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में तल्खी आ गई थी। भारत लगातार कहता रहा कि कनाडा खालिस्तानी आतंकियों को खुली छूट दे रहा है। मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर पटरी पर आने लगे। ऐसे समय में CSIS का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। जानकार मानते हैं कि इससे आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ सकता है और आगे सुरक्षा के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है।
चलते-चलते जान लीजिए, इस मामले में कब, क्या हुआ


