प. बंगाल में बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट कलेक्टर जारी करेंगे: चीफ सेक्रेटरी बोले- रिटायरमेंट के बाद भी जिम्मेदारी तय की जा सकेगी; ये फैसला क्यों- इनसाइड स्टोरी
Published:
4 min read

नेशनल डेस्क (एक्सप्लेनर). पश्चिम बंगाल में अब बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट सिर्फ कलेक्टर (DM या district magistrates) ही जारी कर सकेंगे। चीफ सेक्रेटरी मनोज अग्रवाल के मुताबिक- सरकार के इस फैसले का मकसद जिम्मेदारी तय करना है।
इसके पहले लोकल बॉडी चीफ या पंचायत जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र (birth and death certificates) जारी करती थीं।
सुवेंदु अधिकारी सरकार ने आखिर यह फैसला क्यों किया? इसके पीछे क्या सोच है? इसका राज्य और देश की इंटरनल सिक्योरिटी पर क्या असर होगा….ऐसे ही कई बेहद अहम सवाल हैं….चलिए इस नेशनल एक्सप्लेनर के जरिए इनके जवाब तलाश करते हैं…

पुलिस एक्शन खास क्यों
पश्चिम बंगाल पुलिस ने राज्य के कई जिलों में लोकल बॉडीज द्वारा जारी बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट की जांच की। इस दौरान बड़े पैमाने पर धांधली का पता लगा।
कोलकाता, बीरभूम, कूच बिहार, पश्चिमी बर्दवान, हुगली, नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना से इस तरह की कई शिकायतें सरकार को मिल रहीं थीं। इसके बाद यहां जांच शुरू की गई थी।
डिजिटल रिकॉर्ड्स पर फोकस
- चीफ सेक्रेटरी ने कहा- सरकार ने एक एक्शन प्लान पर अमल शुरू किया है। हम चाहते हैं कि तमाम बर्थ और डेथ सर्टिफिकेशन को डिजिटली स्टोर किया जाए। इसके लिए हर ग्राम पंचायत, म्यूनिसपिलटी और म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन से रिकॉर्ड मांगे गए हैं।
- अग्रवाल ने कहा- एक बार जब ये रिकॉर्ड डिजिटली सेव कर लिए जाएंगे तो इनकी जांच की जाएगी। इससे ये पता लगेगा कि इन सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल आधार, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने में किया गया है या नहीं। ये भी पुख्ता किया जा सकेगा कि सरकार की बेनिफिशियरी स्कीम्स का फायदा कौन उठा रहा है, वो इसे डिजर्व करता भी है या नहीं।

ग्राम पंचायतें कब से जारी कर रहीं थी सर्टिफिकेट्स
- ‘द टेलिग्राफ इंडिया’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ग्राम पंचायतों को जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार 1997 में दिया गया था। तीन साल बाद यानी साल 2000 में सिविक बॉडीज को भी इस दायरे में लाया गया।
- चीफ सेक्रेटरी के मुताबिक- सरकार को बर्थ सर्टिफिकेट में धांधली से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसलिए सैम्पल सर्वे के तौर पर 46 हजार मामलों की जांच की गई। इनमें से 11 हजार 390 सर्टिफिकेट्स में गड़बड़ी पाई गई। अब इनकी और गहराई से जांच की जा रही है।
- 11.24 लाख सर्टिफिकेट का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। 1.80 लाख में गड़बड़ी पाई गई है।

रूल्स क्या कहते हैं
- 2015 से 2022 के रिकॉर्ड को केंद्र के CRS (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्ट पर अपलोड किया जा चुका है।
- रूल्स के मुताबिक- अगर लोकल बॉडी चीफ जैसे ग्राम प्रधान या नगरपालिका अध्यक्ष बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर देता है तो इसे CRS पर अपलोड किया जाना जरूरी है। खास बात ये है कि 2022 के बाद कोई डेटा इस पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया गया।
- इसकी बजाए उस वक्त की ममता बनर्जी सरकार ने अपना पोर्टल ‘जन्म-मृत्यु तथ्य’ बना लिया।
- एक अफसर ने कहा- इसकी आड़ में धांधली का शक है। ये जांच में सामने आएगा कि SIR और विधानसभा चुनाव के दौरान इससे जुड़ी कोई गड़बड़ी तो नहीं की गई।

शाह की मीटिंग का असर
- रिपोर्ट में एक सोर्स के हवाले से कहा गया- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों कोलकाता और सिलीगुढ़ी में मीटिंग के दौरान अफसरों को इस बारे में जांच करने को कहा था।
- शाह ने कहा था- देश की आंतरिक सुरक्षा यानी इंटरनल सिक्योरिटी के लिहाज से यह मामला बहुत गंभीर है। इस मामले की बारीकी से जांच होनी चाहिए और जो भी लोग धांधली में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त एक्शन होना चाहिए।

