वर्चुअल डेबिट कार्ड क्या है: कैसे करता है काम, फायदे और इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी बातें; समझें पूरी A टू Z जानकारी यहां
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वर्चुअल डेबिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट करना आसान और सुविधाजनक हो सकता है। (फोटो सोर्स- कैनवा)
बिजनेस डेस्क। आज ऑनलाइन शॉपिंग, सब्सक्रिप्शन और डिजिटल पेमेंट हमारी लाइफ का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में बैंक पेमेंट के नए और आसान तरीके दे रहे हैं। वर्चुअल डेबिट कार्ड (Virtual Debit Card) इन्हीं में से एक है। यह दिखने में प्लास्टिक वाले डेबिट कार्ड जैसा नहीं होता, बल्कि बैंक के ऐप या इंटरनेट बैंकिंग में डिजिटल रूप में मौजूद रहता है। इसमें कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और CVV जैसी जानकारी होती है।
आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं वर्चुअल डेबिट कार्ड क्या है, इसके क्या फायदे हैं और इसका इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...
सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड क्या होता है?
जवाब- यह डेबिट कार्ड का डिजिटल वर्जन है। इसमें कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और CVV जैसी जानकारी होती है। फर्क इतना है कि यह प्लास्टिक कार्ड के रूप में नहीं होता। इसे बैंक के ऐप और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट के लिए किया जा सकता है।
सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
जवाब- अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग ज्यादा करते हैं तो वर्चुअल डेबिट कार्ड सुविधाजनक हो सकता है। इसके लिए हर समय फिजिकल डेबिट कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ बैंक अपने ऐप में वर्चुअल कार्ड बनाने और उसे मैनेज करने की सुविधा देते हैं। इनमें टेम्पररी कार्ड नंबर बनाने, खर्च की लिमिट तय करने या इस्तेमाल नहीं होने पर कार्ड को क्लोज करने जैसे फीचर मिलते हैं।

सवाल- क्या वर्चुअल डेबिट कार्ड ऑनलाइन पेमेंट को सुरक्षित बनाता है?
जवाब- यह ऑनलाइन पेमेंट में अतिरिक्त कंट्रोल दे सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
मान लीजिए आप किसी ऐसी वेबसाइट से सामान खरीद रहे हैं। जिसका इस्तेमाल आपने पहले नहीं किया है। ऐसे में अलग वर्चुअल कार्ड का इस्तेमाल करने से आपके डेबिट कार्ड की जानकारी सीधे उस मर्चेंट तक जाने से बच सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि फ्रॉड की संभावना खत्म हो जाएगी। अगर कोई व्यक्ति फेक वेबसाइट, फिशिंग मैसेज या नकली पेमेंट लिंक के जरिए धोखा देता है और आप अपनी जानकारी शेयर कर देते हैं, तो वर्चुअल कार्ड भी आपको नहीं बचा सकता।
सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड और टोकनाइजेशन में क्या अंतर है?
जवाब- टोकनाइजेशन में असली कार्ड की जानकारी की जगह एक यूनिक टोकन का इस्तेमाल किया जाता है। यह टोकन किसी खास ट्रांजैक्शन या मर्चेंट के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
RBI के नियमों के मुताबिक, कार्ड पेमेंट चेन में कार्ड जारी करने वाले बैंक और कार्ड नेटवर्क को छोड़कर दूसरी संस्थाएं कार्ड-ऑन-फाइल का वास्तविक डेटा स्टोर नहीं कर सकतीं। वहीं, वर्चुअल डेबिट कार्ड खुद एक पेमेंट कार्ड होता है, जो आपके बैंक अकाउंट से जुड़ा रहता है।
सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड से पैसे कहां से कटते हैं?
जवाब- वर्चुअल डेबिट कार्ड आपके बैंक अकाउंट से लिंक होता है। अगर कार्ड से कोई पेमेंट किया जाता है तो कार्ड की शर्तों के मुताबिक अमाउंट बैंक अकाउंट से ही डेबिट होता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि वर्चुअल कार्ड इस्तेमाल करने से फ्रॉड होने पर पैसे का नुकसान नहीं होगा।

सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
जवाब- इसका सबसे बड़ा फायदा कंट्रोल माना जा सकता है। अगर आपका बैंक कार्ड की ट्रांजैक्शन लिमिट तय करने या ऐप से कार्ड को बंद करने की सुविधा देता है, तो आप जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जब कार्ड की जरूरत न हो तो उसे क्लोज भी किया जा सकता है।
सवाल- क्या वर्चुअल कार्ड से हर तरह का पेमेंट किया जा सकता है?
जवाब- नहीं, हर जगह इसकी सुविधा जरूरी नहीं है। सभी वर्चुअल डेबिट कार्ड हर मर्चेंट पर स्वीकार किए जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ कार्ड में इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन और रिकरिंग पेमेंट को लेकर लिमिट हो सकती हैं।
इसके अलावा ATM से कैश निकालने और ऑफलाइन खरीदारी में भी कुछ वर्चुअल कार्ड काम नहीं कर सकते हैं। ये सुविधाएं बैंक और कार्ड के नियमों पर निर्भर करती हैं। इसलिए वर्चुअल कार्ड इस्तेमाल करने से पहले बैंक की शर्तें जरूर देखनी चाहिए।
सवाल- वर्चुअल डेबिट कार्ड इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- वर्चुअल कार्ड इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। बैंक की तरफ से मिलने वाले ट्रांजैक्शन अलर्ट ऑन रखें और अपने अकाउंट को नियमित रूप से चेक करते रहें।
अगर आपका बैंक कार्ड को जरूरत के हिसाब से ऑन या ऑफ करने और ट्रांजैक्शन लिमिट तय करने की सुविधा देता है, तो इसका इस्तेमाल करें। साथ ही किसी अनजान वेबसाइट या व्यक्ति के साथ कार्ड की जानकारी शेयर न करें।
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