क्या UPI पेमेंट पर चार्ज लग सकता है: सरकार कानून बदलने की तैयारी में, आम लोगों पर इसका क्या असर होगा; जानें सबकुछ
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बिजनेस डेस्क। सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 मे कुछ बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इस कानूनी कदम से फ्यूचर में बड़े मर्चेंट्स के लिए UPI पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) चार्ज लगाने का रास्ता साफ हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल आम यूजर्स या छोटे दुकानदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और UPI पहले की तरह ही फ्री रहेगा। वहीं बुधवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगेगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इस बिल पर अभी विचार-विमर्श जारी है और इस समय RBI का पूरा ध्यान देश के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और सुरक्षित बनाने पर है, न कि इस बात पर कि इसका खर्च कौन उठाएगा।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर सरकार कानून में क्या बदलाव करने जा रही है, RBI का इस पर क्या रुख है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा।
कानून में क्या बदलाव होने की तैयारी
मौजूदा नियम के मुताबिक, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के सेक्शन 10A के तहत बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर ये रोक है कि वे BHIM-UPI, UPI QR कोड और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई भी MDR चार्ज नहीं वसूल सकते। इसमें Income-tax Act के सेक्शन 269SU का सीधा जिक्र किया गया था।
नए बिल में सरकार इस फिक्स रेफरेंस को हटाकर ये जोड़ना चाहती है:
केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के जरिए तय कर सकती है कि कौन-कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स लागू होंगे।
मतलब: पहले कानून में साफ लिखा था कि UPI फ्री रहेगा। अब केंद्र सरकार कानून में ये बदलाव कर रही है, कि वह समय-समय पर नोटिफिकेशन जारी कर तय करेगी कि कौन-सा डिजिटल पेमेंट मोड फ्री रहेगा और किससे ये छूट वापस ली जाएगी। इससे सरकार को आगे चलकर फैसला लेने में फ्लेक्सिबिलिटी मिल जाएगा।

क्या अभी से UPI पेमेंट्स पर चार्ज लगेगा
बिल्कुल नहीं, इस बिल के आने का ये बिल्कुल मतलब नहीं है कि आज या कल से आपके UPI पेमेंट पर पैसे कटने लगेंगे। बिल सिर्फ लीगल फ्रेमवर्क बदल रहा है, तुरंत कोई चार्ज नहीं लगा रहा। अगर आगे चलकर कभी चार्ज लगा भी, तो उसके लिए केंद्र सरकार को अलग से एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करना पड़ेगा।
जब तक ऐसा कोई नोटिफिकेशन नहीं आता, तब तक आम जनता और दुकानदारों के लिए UPI पहले की तरह बिल्कुल फ्री रहेगा। जो लोग यह कह रहे हैं कि UPI पर चार्ज लगना शुरू हो गया है, वह खबर पूरी तरह गलत है।
सरकार आखिर ये बदलाव क्यों करना चाहती है
भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जनवरी 2020 से सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR जीरो कर दिया था, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटल पेमेंट करें। लेकिन इस सिस्टम को ऑपरेट करने के लिए बैंकों और पेमेंट कंपनियों जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay को सर्वर, इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्रॉड कंट्रोल और सेटलमेंट पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।
इंसेंटिव स्कीम की लिमिट: सरकार बैंकों को इसके बदले कुछ कॉम्पन्सेशन जरूर देती है, लेकिन वह ज्यादातर 2,000 रुपए तक के छोटे मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही मिलता है। बड़े मर्चेंट्स इससे बाहर हैं।
फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी: पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बिना किसी कमाई के पूरे UPI सिस्टम को चलाना लंबे वक्त तक पॉसिबल नहीं है, क्योंकि सरकार से मिलने वाली सब्सिडी कंपनियों के खर्च को पूरा करने के लिए काफी कम है। इसी वजह से सरकार कानून में बदलाव करने का सोच रही है।

क्या बड़े बिजनेस पर असर पड़ेगा
प्रपोज्ड अमेंडमेंट के बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही है, सरकार आगे चलकर MDR लगाती भी है, तो शुरुआत में ये सिर्फ उन कारोबार पर लागू हो सकता है, जिनका सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
ऐसा इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि इस टर्नओवर सीमा से ऊपर वाले कारोबार पहले से ही Income-tax Act के Section 269SU के दायरे में आते हैं। इस सेक्शन के तहत तय किए गए डिजिटल पेमेंट मोड्स को एक्सेप्ट करना अनिवार्य है।
बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे अमेजन, Flipkart और बड़े रिटेल चेन्स इस दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, इस बिल में किसी कंपनी का नाम या टर्नओवर लिमिट नहीं लिखी है। ये सब बातें फ्यूचर में आने वाले नोटिफिकेशन में ही साफ होंगी।
क्या आम ग्राहक को पैसे देने होंगे
नहीं। MDR का चार्ज ग्राहकों से नहीं, बल्कि मर्चेंट्स से लिया जाता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने और पेमेंट सेटल करने के बदले बैंक ये फीस मर्चेंट्स से लेते हैं। अगर फ्यूचर में MDR लागू होता है, तो मर्चेंट्स इस खर्च को खुद उठाएंगे या प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की कीमतों के जरिए कस्टमर्स पर डालेंगे। ये मर्चेंट्स के बिजनेस डिसीजन और सरकार की ओर से जारी होने वाले नियमों पर डिपेंड करेगा। फिलहाल इस बिल में UPI पेमेंट करने वाले आम ग्राहकों से किसी भी तरह की फीस लेने का कोई प्रपोजल नहीं है।
आम कस्टमर्स के लिए काम की बात
आम UPI यूजर्स के लिए फिलहाल कुछ भी नहीं बदला है। आप पहले की तरह बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के UPI ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। जब तक संसद से यह बिल पास होने के बाद सरकार कोई नया नोटिफिकेशन नहीं लाती, तब तक UPI आपके लिए बिल्कुल फ्री है।

