Vedanta की चार कंपनियों की शेयर मार्केट में एंट्री: 527 रुपए पर खुला वेदांता एल्युमिनियम, जानिए 3 शेयरों की कैसी रही लिस्टिंग
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नई कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग के साथ निवेशकों को अलग-अलग सेक्टर में सीधे निवेश करने का मौका मिला है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। वेदांता ग्रुप की चार नई कंपनियों ने सोमवार (15 जून) को शेयर मार्केट में एंट्री कर ली। डिमर्जर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 'वेदांता एल्युमिनियम मेटल', 'वेदांता पावर', 'वेदांता ऑयल एंड गैस' और 'वेदांता आयरन एंड स्टील' के शेयर BSE और NSE पर लिस्ट हुए। कंपनी के शेयरधारकों को 1:1 अनुपात में नई कंपनियों के शेयर दिए गए हैं।
शेयर बाजार में चारों कंपनियों की शुरुआत
मार्केट खुलते ही वेदांता की चारों कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। वेदांता एल्युमिनियम मेटल का शेयर BSE पर 527 रुपए के भाव पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के बाद इसमें तेजी आई। यह 538 रुपए के स्तर तक पहुंच गया।
वेदांता पावर ने 41.30 रुपए पर कारोबार शुरू किया और बढ़कर 43.35 रुपए तक पहुंच गया। वेदांता ऑयल एंड गैस का शेयर 39 रुपए पर लिस्टेड हुआ। वहीं, वेदांता आयरन एंड स्टील का शेयर 22.25 रुपए के भाव पर लिस्ट हुआ।
कंपनियों का मार्केट कैप कितना रहा?
लिस्टिंग के बाद निवेशकों की नजर कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी रही। वेदांता एल्युमिनियम मेटल का मार्केट कैप लगभग 1.95 लाख करोड़ रहा। यह चारों कंपनियों में सबसे बड़ी कंपनी बनकर उभरी। वेदांता पावर का मार्केट कैप 16,736.46 करोड़, वेदांता पावर एंड गैस का 14,487.99 करोड़ और वेदांता आयरन एंड स्टील का मार्केट कैप 8,231.37 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।
वेदांता का डिमर्जर क्यों किया गया
वेदांता ग्रुप के डिमर्जर को पिछले साल दिसंबर में मंजूरी मिली थी। कंपनी की इस योजना के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने स्वीकृति दी थी। इसके बाद वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक शेयर पर निवेशकों को चारों नई कंपनियों का एक-एक शेयर मिला। यानी अगर किसी के पास वेदांता का एक शेयर था, तो उसे हर नई कंपनी का एक शेयर भी मिला।
डिमर्जर से कंपनी और निवेशकों को क्या फायदा होगा
वेदांता का कहना है कि डिमर्जर के बाद ग्रुप की कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर पहले से अधिक सरल और स्पष्ट हो जाएगी। हर कंपनी अपने-अपने सेक्टर पर फोकस कर सकेगी। स्वतंत्र रूप से विकास की रणनीति बना पाएगी।
कंपनी के अनुसार, इससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स, सॉवरेन वेल्थ फंड, रिटेल इन्वेस्टर्स और स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर्स को सीधे उन कारोबार में निवेश करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा अलग-अलग कंपनियां अपने ग्राहकों, निवेश योजनाओं और बाजार की जरूरतों के अनुसार फैसले ले सकेंगी।

