तेल कंपनियों को हर दिन 1600 करोड़ का नुकसान: एक्साइज ड्यूटी हटा दें तो भी 36 अरब डॉलर घाटे में सरकार; इस परेशानी की वजह हालिया जंग
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क्रूड ऑयल की कीमत कब स्थिर होंगी, यह कहना मुश्किल है। लेकिन अगर कीमत ऊंची बनी रहीं तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। (फोटो सोर्स- एएनआई)
बिजनेस डेस्क। मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट का असर अब पूरी दुनिया पर दिख रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। ऐसे में ऑयल महंगा हो रहा है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम लंबे समय से नहीं बदले हैं। इसका सीधा असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है, जो भारी नुकसान झेल रही हैं।
तेल कंपनियों को हर लीटर पर कितना नुकसान हो रहा है?
भारत की सरकारी तेल कंपनियां 'इंडियन ऑयल', 'भारत पेट्रोलियम' और 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम' पेट्रोल और डीजल बेचकर नुकसान उठा रही हैं। इन कंपनियों ने अप्रैल 2022 से अब तक रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम काफी ऊपर-नीचे होते रहे हैं।
मैक्वैरी ग्रुप (Macquarie Group) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती है, तो कंपनियों को पेट्रोल पर 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर का नुकसान होता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से नुकसान करीब 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु सहित 5 राज्य चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

क्रूड ऑयल की दाम में कितना उतार-चढ़ाव आया?
हाल ही में क्रूड ऑयल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पहले यह 100 डॉलर से ऊपर गया। फिर इस साल की शुरुआत में करीब 70 डॉलर तक गिरा। मिडिल ईस्ट युद्ध के बाद फिर से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। कीमतें लगातार बदल रही हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट स्थिर हैं।
ऑयल कंपनियों को रोजाना कितना नुकसान?
हाल ही में एक दौर ऐसा भी था जब ऑयल कंपनियां मिलकर रोजाना करीब 2400 करोड़ का नुकसान उठा रही थीं। इसके बाद सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की, जिससे नुकसान घटकर लगभग 1600 करोड़ प्रतिदिन रह गया, लेकिन यह राहत ज्यादा दिन टिक नहीं पाई।
मार्च महीने में कंपनियों को फिर से भारी नुकसान हुआ, जिससे जनवरी और फरवरी में हुई कमाई भी खत्म हो गई। अब उम्मीद है कि जनवरी-मार्च क्वार्टर में ये कंपनियां घाटे में रहेंगी।
भारत कितना ऑयल इम्पोर्ट करता है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है। यह तेल मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, रूस और अमेरिका से आता है। वहीं, हाल ही में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी भी घटाई है, लेकिन अभी भी पेट्रोल पर करीब 11.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 7.8 रुपए प्रति लीटर टैक्स है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये टैक्स पूरी तरह हटा भी दिए जाएं। तब भी कंपनियों को पूरा नुकसान कवर नहीं होगा। इसके अलावा, अगर सरकार और टैक्स घटाती है, तो इससे सरकारी खजाने पर असर पड़ेगा। अनुमान है कि पूरी तरह एक्साइज ड्यूटी हटाने से 36 अरब डॉलर (लगभग 3.35 लाख करोड़) का नुकसान हो सकता है और फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है।
देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
महंगा क्रूड ऑयल सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। इसका असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ता है। अनुमान है कि 2026 के पहले क्वार्टर में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.86 लाख करोड़) तक पहुंच सकता है। अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 10 डॉलर और बढ़ती है तो यह घाटा और बढ़ सकता है।
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