डेढ़ महीने में दो बार डीजल-जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी : प्राइवेट रिफाइनरीज पर सख्ती क्यों; सरकारी ऑयल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए अब तक दाम
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इसके पहले सरकार ने 27 मार्च को डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क लगाया था। (फाइल फोटो)
बिजनेस डेस्क। सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिर बढ़ा दी है। डीजल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 21.50 रुपए से बढ़ाकर 55.50 रुपए प्रति लीटर कर दी। जबकि ATF यानी जेट फ्यूल पर ड्यूटी 29.50 रुपए से बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर की गई है। इसके चलते ये डेढ़ महीने में दूसरी बार है जब सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है। इसके पहले 27 मार्च ड्यूटी बढ़ाई गई थी।
किस वजह से बढ़ाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियां विदेश में इन प्रोडक्ट को महंगे दामों पर बेचकर बहुत ज्यादा मुनाफा (विंडफॉल गेन) कमा रही थीं। इस वजह से सरकार ने ये कदम उठाया है। लेकिन घरेलू बाजार में वे जानबूझकर कम सप्लाई कर रही थीं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बेचने पर उन्हें घाटा हो रहा था।
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने शनिवार को एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें कहा गया कि मौजूदा हालात को देखते हुए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। इसलिए डीजल और ATF पर लगने वाले चार्ज तुरंत प्रभाव से बढ़ा दिए गए हैं।
27 मार्च को भी बढ़ाई गई थी एक्सपोर्ट ड्यूटी
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण सरकार ने 27 मार्च को पहले डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क लगाया था। उस समय डीजल पर 21.50 प्रति लीटर और ATF पर 29.50 प्रति लीटर ड्यूटी कर दी गई थी। इसकी मुख्य वजह थी देश में इन फ्यूल की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहे। अब सरकार ने इन दोनों फ्यूल पर ड्यूटी और बढ़ा दी है।
ग्लोबल बाजारों में ऑयल की कीमतें बढ़ना इसकी सबसे बड़ी वजह है। इससे विदेश में एक्सपोर्ट करना बहुत ज्यादा फायदेमंद हो गया है। प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियां विदेश में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए एक्सपोर्ट कर रहीं थीं।

सरकारी ऑयल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम
दूसरी तरफ, IOC, BPCL, HPCL जैसी देश की बड़ी सरकारी ऑयल कंपनियों ने घाटे के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें पंप पर नहीं बढ़ाईं। उन्होंने आम लोगों को महंगा न देने के लिए पुरानी कीमतें ही रखीं। इस वजह से प्राइवेट कंपनियों को घरेलू बाजार में फ्यूल बेचने में कोई फायदा नहीं हो रहा था। वे घरेलू बाजार में कम बेच रही थीं और जितना माल बनता था, उसे विदेश भेजकर ज्यादा मुनाफा कमा रही थीं।
सरकार ने इसे रोकने के लिए ही ड्यूटी और बढ़ा दी है, ताकि प्राइवेट कंपनियों को अब विदेश भेजने में पहले जितना फायदा न रहे और वे ज्यादा फ्यूल देश के अंदर ही बेचें। हालांकि सरकारी ऑयल कंपनियां देश के अंदर पेट्रोल और डीजल के सेलिंग मार्केट पर कब्जा जमाए हुए हैं। इनका मार्केट शेयर करीब 90% है।
प्राइवेट पेट्रोल पंप ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्राइवेट पेट्रोल पंप रिटेलर्स ने पेट्रोल और डीजल के दाम 3 से 5 रुपए प्रति लीटर के बीच बढ़ा दिए। इसके अलावा कुछ प्राइवेट कंपनियों ने एक दिन में हर कस्टमर को लिमिटेड क्वांटिटी में फ्यूल खासकर डीजल देने शुरू कर दिया, ताकि उन्हें नुकसान कम हो। जबकि ज्यादातर निजी रिफाइनरी कंपनियों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट कर रही हैं। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है।
दावा- सरकारी तेल कंपनियां नुकसान उठा रहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 2 अप्रैल को बताया था कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल बेचने पर हर लीटर पर 24.40 का नुकसान उठा रही हैं। वहीं डीजल पर तो हर लीटर 104.99 का नुकसान हो रहा था। ये नुकसान अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत के मुकाबले कैलकुलेट किया जाता है। इसी तरह सरकारी कंपनियों ने एयरलाइंस को दिए जाने वाले ATF के दाम भी बहुत बढ़ा दिए थे।
1 अप्रैल को घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत 114.55% बढ़ाकर 96,638 से 2,07,341 रुपए प्रति किलो लीटर कर दी थी। विदेशी एयरलाइंस के लिए भी 107% बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि बाद में घरेलू उड़ानों के लिए ATF सिर्फ 8.6% बढ़ाकर कीमत 1,04,927 प्रति किलो लीटर कर दी गई।

