NSE ने IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल किए: 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे, भारत की टॉप 10 सबसे महंगी लिस्टेड कंपनियों में शामिल होगा
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NSE ने IPO के लिए SEBI के पास पहली बार 2016 में डॉक्यूमेंट्स जमा किए थे। (फाइल फोटो)
बिजनेस डेस्क। भारत का IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) मार्केट अब तेजी से एक्टिव होने वाला है। बुधवार को कई रिपोर्ट्स में बताया गया था कि रिलायंस जियो पब्लिक ऑफरिंग के लिए जल्द ही ड्राफ्ट पेपर फाइल करने वाली है। अब 18 जून (गुरुवार) को अपडेट आया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ब्लॉकबस्टर IPO भी जल्द आने वाला है। एक्सचेंज ने इसके लिए प्रोसेस शुरू कर दी है। बुधवार को IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल कर दिए हैं। इससे 2016 से चल रही अनिश्चितता अब खत्म हो गई है। NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। दुनिया का सबसे एक्टिव डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है।
टॉप 10 महंगी लिस्टेड कंपनियों में शामिल होगा
NSE की ये लिस्टिंग इतिहास में सबसे बड़े IPO में से एक हो सकती है। अनलिस्टेड मार्केट में हो रही ट्रेडिंग एक्टिविटी के आधार पर NSE की मौजूदा वैल्यू करीब 55 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस वैल्यू के साथ NSE भारत की टॉप 10 सबसे महंगी लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो जाएगा। इसके अलावा ये लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप की वैल्यू (58 अरब डॉलर) के बहुत करीब पहुंच जाएगा।
IPO में 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे
इस IPO में कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे, जो NSE के कुल शेयरों का करीब 6% है। ये IPO फ्रेश इश्यू नहीं है, बल्कि ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसमें कंपनी नया शेयर जारी करके पैसे नहीं जुटाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपना कुछ हिस्सा यानी शेयर बेचेंगे।
पहली बार 2016 में डॉक्यूमेंट्स जमा किए थे
NSE ने IPO के लिए SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के पास पहली बार 2016 में डॉक्यूमेंट्स जमा किए थे। लेकिन रेगुलेटरी प्रॉब्लम और लीगल मामलों की वजह से ये प्रोसेस रुक गई और IPO करीब 10 साल तक अटका रहा। इस दौरान इसका कॉम्पीटीटर BSE 2017 में ही शेयर बाजार में लिस्ट हो गया था। इस साल की शुरुआत में SEBI ने NSE को IPO लाने की मंजूरी दी।
NSE का IPO मार्केट में क्यों नहीं आ पाया था
NSE पर SEBI ने 2019 में जुर्माना लगाया था। NSE पर आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को ट्रेडिंग में तेजी से ऑर्डर देने की सुविधा दी गई थी। लेकिन बाकी ब्रोकर्स को बराबर मौका नहीं दिया गया। NSE ने अब इस मामले को सुलझाने के लिए तैयार है। करीब 158 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने का प्रस्ताव रखा है। अब ड्राफ्ट पेपर जमा हो जाने के बाद IPO की फॉर्मली प्रोसेस शुरू हो गई है। हालांकि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद असली IPO आने में अभी भी 3 से 4 महीने का समय लग सकता है।

