क्या महीने के आखिर में खाली हो जाता है वॉलेट: एक्सपर्ट्स की राय- कई बैंक अकाउंट रखें, खर्चे कम होंगे, पैसे बचाने के साथ इन्वेस्टमेंट भी कर सकेंगे; जानें फॉर्मूला
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(AI जनरेटेड इमेज)
बिजनेस डेस्क। सैलरीड पर्सन के लिए महीने के आखिरी दिन गुजारना बहुत मुश्किल होता है। हालांकि, जब महीने की शुरुआत में सैलरी आ जाती है, तो खर्च करने में आजादी महसूस होती है, लेकिन धीरे-धीरे अकाउंट से पैसा घटने लगता है। महीने के आखिर तक ऐसा हाल हो जाता है कि जरुरी खर्चों के लिए सोचना पड़ता है।
ये परेशानी सिर्फ कम इनकम वाले लोगों के साथ ही नहीं होती है, बल्कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी कई बार बिना प्लान के खर्च करने के कारण पैसा बचा नहीं पाते हैं। अब सवाल यह है कि आखिर पैसे को अच्छे तरीके से मैनेज कैसे करें।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जरुरत और अपनी सहुलियत के हिसाब से एक से ज्यादा बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करने से खर्च, सेविंग और इन्वेस्टमेंट को आसानी से अलग-अलग मैनेज किया जा सकता है।

कई बैंक अकाउंट रखने का क्या है मतलब?
इस तरीके का मतलब यह है कि, जैसे ही आपकी सैलरी या कोई अन्य रेगुलर इनकम अकाउंट में आए, तो उसे एक ही अकाउंट में रखने के बजाय जरुरत और खर्च के हिसाब से अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाए।
कितने बैंक अकाउंट रखने चाहिए, इसके लिए कोई नंबर नहीं तय किया गया है। यह किसी पर्सन की इनकम, खर्च और फाइनेंशियल गोल्स पर डिपेंड करता है। हालांकि पर्सनल फाइनेंस के हिसाब से तीन अलग-अलग कैटेगरी बनाने के लिए कहा जाता है।
पहली कैटेगरी में रोजाना होने वाले खर्चों को रख सकते हैं। दूसरी कैटेगरी में सेविंग और इमरजेंसी फंड के लिए बनाई जा सकती है। तीसरी कैटेगरी इन्वेस्टमेंट के लिए रखी जा सकती है।
इस सिस्टम को इसलिए बनाना है, ताकि आपका सारा पैसा एक ही अकाउंट में न हो। जब खर्चों के लिए एक तय रकम होगी, तो जाहिर है कि बिना जरुरी खर्चों को कंट्रोल करना आसान हो जाता है।
खर्च के लिए अलग अकाउंट कैसे काम करता है?
स्पेंडिंग या खर्च वाला अकाउंट आपकी रोजाना की जरुरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे कि घर का रेंट, बिजली-पानी के बिल, राशन, ट्रैवलिंग और अन्य रेगुलर एक्सपेंसेस को शामिल कर सकते हैं।
हर पर्सन की जरुरतें अलग-अलग होती हैं। इसलिए, इस अकाउंट में कितना पैसा रखना है, इसका फैसला अपने मंथली बजट के हिसाब से कर लेना चाहिए। पहले से ही अपने जरुरी खर्चों का एस्टीमेट (अनुमान) लगाने के बाद उसी के हिसाब से पैसे को अलग कर सकते हैं।
इससे आप अपने खर्चों की लिमिट को सही तरीके से समझ सकेंगे। जब आप अपनी पूरी सैलरी एक ही अकाउंट में रखते हैं तो जरुरत और इच्छा के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। अलग स्पेंडिंग अकाउंट रखने से आप देख सकेंगे कि महीने के लिए आपके पास असल में कितना पैसा है।
सेविंग्स अकाउंट से बन सकता है इमरजेंसी फंड
दूसरा अकाउंट सेविंग के लिए रख सकते हैं। इसमें वो पैसा रख सकते हैं, जिसका इस्तेमाल आप रोजाना के खर्चों के लिए नहीं करना चाहते हैं। यह पैसा इमरजेंसी फंड बनाने में मदद कर सकता है। अचानक मेडिकल एक्सपेंस, नौकरी बदलने पर या इनकम रुकने जैसे हालातों में सेविंग का फंड बहुत काम आ सकता है। इसके अलावा किसी बड़े फाइनेंशियल गोल के लिए भी इस अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे कि कार खरीदने के लिए डाउनपेमेंट करना हो, बच्चों की पढ़ाई या किसी और जरुरी काम के लिए रेगुलर सेविंग की जी सकती है।
हालांकि इसमें गौर करने वाली बात यह है कि सेविंग के लिए रखे गए पैसों को जनरल एक्सपेंसेस के लिए इस्तेमाल न किया जाए। शुरुआत में इस आदत को बनाने में मुश्किल होगी, लेकिन धीरे-धीरे डिसिप्लिन बन जाएगा।

इन्वेस्टमेंट के लिए अलग अकाउंट
तीसरी कैटेगरी में इन्वेस्टमेंट को रखा जा सकता है। हर महीने अपनी इनकम का एक हिस्सा इन्वेस्टमेंट के लिए अलग कर सकते हैं। इन पैसों का इस्तेमाल SIP, म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट या कहीं दूसरी जगह इन्वेस्ट करने में कर सकते हैं।
यह जरुरी नहीं है कि इन्वेस्टमेंट की शुरुआत बड़ी रकम से की जाए। कई लोग छोटी रकम से इन्वेस्ट करना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे इन्वेस्टमेंट बढ़ाते जाते हैं। हालांकि इन्वेस्टमेंट का फैसला सिर्फ सोशल मीडिया पर सलाह देखकर ही नहीं करना है। इन्वेस्ट करने से पहले रिस्क, समय और अपने फाइनेंशियल गोल्स को समझना जरुरी है। हालांकि, आप फाइनेंशियल एडवाइजर की हेल्प भी ले सकते हैं।
क्या ज्यादा बैंक अकाउंट रखना हर किसी के लिए सही है?
कई बैंक अकाउंट रखना आपके लिए सही हो सकता है, लेकिन हर पर्सन के लिए जरुरी नहीं है। कुछ लोग ही मल्टीपल अकाउंट्स के साथ बेहतर मैनेजमेंट कर सकते हैं। कई अकाउंट रखने का मतलब पैसे का सही मैनेजमेंट करना है। अर मल्टीपल अकाउंट रखने के बाद भी आप सेविंग के पैसों को खर्च कर रहे हैं तो सिर्फ अकाउंट बढ़ाने से कोई खास फायदा नहीं होता है।
मिनिमम बैलेंस का ध्यान रखना होगा
कई बैंक अकाउंट रखने से पहले कुछ नियमों को समझना जरुरी है। कुछ सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेटेंन करना पड़ता है। अगर नियमों का पालन नहीं होता है तो बैंक की शर्तों के मुताबिक चार्ज लग सकता है। ऐसे में कई अकाउंट खोलने से पहले यह जरुर चेक कर लें कि हर अकाउंट को एक्टिव रखने के लिए किन शर्तों को मानना होगा।
ज्यादा अकाउंट में पैसे रखने से इंटरेस्ट पर पड़ सकता है असर
हर बैंक में सेविंग्स अकाउंट का इंटरेस्ट रेट औक नियम अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में अगर बड़ी रकम कई अकाउंट्स में बांट दी जाए, तो आपको अपने पैसे पर एक जैसा इंटरेस्ट रेट नहीं मिलेगा।
कई अकाउंट खोलने से ट्रैक करना मुश्किल
अगर कई बैंक अकाउंट होते हैं, तो उनका रिकॉर्ड भी रखना होता है। किस अकाउंट में कितनी रकम है, कौन सा ऑटो डेबिट चालू है और किस अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना पड़ेगा, इन सभी बातों पर ध्यान रखना पड़ सकता है। अगर उनका रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखा गया, तो अकाउंट को मैनेज करने में परेशानी हो सकती है।

सैलरी आते ही कैसे बनाएं प्लान
1- सैलरी आने के बाद सबसे पहले मंथली खर्चों का हिसाब तैयार करें। जो पैसा महीने भर के खर्चों के लिए निकाला है, उतने में ही पूरे महीने के खर्चों को चलाने की कोशिश करें।
2- इसके बाद सेविंग और इन्वेस्टमेंट के लिए अपनी सैलरी के हिसाब से पैसा निकालें। इन पैसों में से एक हिस्सा सेविंग के लिए रख दें। दूसरा हिस्सा इन्वेस्टमेंट के लिए रख दें।
3- आप शुरुआत में आसान नियम बना सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक फॉलो कर सकें। समय के साथ इनकम बढ़ने या खर्चे बढ़ने पर अपने प्लान में कुछ बदलाव कर सकते हैं।
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