4 नए श्रम कानून लागू: हर कर्मचारी के लिए मिनिमम सैलरी तय, सोशल सिक्योरिटी और ग्रेच्युटी भी मिलेगी; फ्री हेल्थ चेकअप की भी सुविधा
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भारत में चार नए श्रम कानून लागू हुए। जिससे न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार मिलेगा। (फोटो सोर्स- कैनवा)
बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश में चार नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं। ये कानून 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुके हैं। इनका सीधा फायदा करीब 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों को मिलेगा। इस नए कानूनों ने पुराने 29 लेबर कानूनों को हटाकर आसान, आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। ताकि हर कर्मचारी को सही वेतन, सुरक्षा और सामाजिक लाभ मिले।
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया हैंडल X पर नए लेबर कोड्स लागू करने का ऐलान किया। उन्होंने लिखा कि ये बदलाव साधारण नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाया गया बड़ा कदम है। ये 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति देंगे।
नए लेबर कोड्स कौन से हैं
सरकार ने जिन चार लेबर कोड्स को लागू किया है। इनका मकसद मजदूरों को बेहतर सुरक्षा देना और कंपनियों के लिए नियमों को सरल बनाना है।
- कोड ऑन वेजेस 2019
- इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड
- कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी
- ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन 2020 (OSHWC Code)
क्यों जरूरी थे नए लेबर कोड्स
देश के ज्यादातर श्रम कानून 1930 से 1950 के बीच बने थे। उस समय न तो गिग जॉब्स थीं, न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और न ही मॉर्डन वर्क कल्चर। ऐसे में पुराने नियम आज की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
इस नए कानून के लागू होने पर बीजेपी नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया आ रही हैं। अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है।
नए लेबर कोड्स से क्या बदलेगा
- अब सभी कर्मचारियों को जॉइनिंग के समय अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी होगा।
- हर मजदूर को मिनिमम सैलरी मिलना कानूनी अधिकार होगा, चाहे वह किसी भी सेक्टर में काम करता है।
- कंपनियों को तय समय पर वेतन देना होगा। देर करने पर कार्रवाई हो सकती है।
- डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर को PF, इंश्योरेंस और सरकारी योजना का फायदा मिलेगा।
- 40 साल के ऊपर के कर्मचारियों के लिए हर साल फ्री हेल्थ चेकअप।
- महिलाएं सभी सेक्टरों में नाइट शिफ्ट कर सकेंगी।
- अब छोटे उद्योगों के कामगारों को ESIC का लाभ मिलेगा।
अलग-अलग सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा
फिक्स्ड टर्म कर्मचारी: अब इन्हें परमानेंट कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। 1 साल बाद ग्रेच्युटी का हक मिलेगा।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: पहली बार कानूनी पहचान मिलेगी। कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1-2% वेलफेयर फंड में देना होगा।
कॉन्ट्रैक्ट वर्कर: हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल चेकअप अनिवार्य होगा।
महिला कर्मचारी: समान वेतन, नाइट शिफ्ट और सुरक्षित कार्यस्थल का पूरा अधिकार मिलेगा।
MSME सेक्टर के कर्मचारी: उन्हें भी मिनिमम सैलरी, सेफ वर्किंग कंडीशन और फिक्स्ड वर्किंग आवर्स मिलेंगे।
खदान, बीडी और टेक्सटाइल उद्योग: सेफ्टी कमेटी, हेल्थ चेकअप और महिलाओं के लिए सुरक्षित नियम लागू होंगे।
IT और ITES सेक्टर: हर महीने की 7 तारीख तक सैलरी देनी होगी। शिकायत निवारण की व्यवस्था और महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट की व्यवस्था होगी।
ऑडियो-विजुअल और डिजिटल मीडिया वर्कर्स: अपॉइंटमेंट लेटर, समय पर सैलरी और ओवरटाइम पर डबल पे की सुविधा मिलेगी।
एक्सपोर्ट सेक्टर कर्मचारी: ग्रेच्युटी, PF, सोशल सिक्योरिटी और 180 दिन बाद छुट्टी लेने का अधिकार होगा।
अन्य बड़े बदलाव
अब कर्मचारी को तय स्तर से कम वेतन नहीं मिलेगा। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को सभी को समान वेतन और नौकरी के अवसर मिलेंगे। कंपनियों को अलग-अलग फाइलिंग की जरूरत नहीं होगी। एक ही रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और रिटर्न से काम हो जाएगा।
सभी सेक्टरों के लिए एक समान सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक तय करने के लिए नेशनल OSH बोर्ड बनाया गया है। 500 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों में सुरक्षा कमेटी अनिवार्य होगी।

