नौकरी छोड़ने से बंद नहीं होता EPF अकाउंट: जानिए कब खाता होता है इनऑपरेटिव, 36 महीने का नियम समझें
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EPFO का कहना है कि पुराने EPF बैलेंस को नजरअंदाज न करें। समय-समय पर अपना UAN और रोजगार से जुड़ी जानकारी अपडेट रखें। (सिम्बॉलिक इमेज)
बिजनेस डेस्क। अगर आपने नौकरी छोड़ दी है या कंपनी बदल ली है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका EPF अकाउंट बंद हो गया है। या उस पर ब्याज मिलना रुक जाएगा। EPFO ने साफ किया है कि EPF अकाउंट सिर्फ जॉब छोड़ने से इनऑपरेटिव नहीं होता ब्याज बंद होने का नियम रिटायरमेंट और 36 महीने की अवधि से जुड़ा है।
EPF अकाउंट इनऑपरेटिव कब होता है
EPFO के नियम के मुताबिक, अगर कोई सदस्य 55 साल या उसके बाद रिटायर होता है, तो रिटायरमेंट की तारीख से 36 महीने (3 साल) पूरे होने पर उसका EPF अकाउंट इनऑपरेटिव हो जाता है। इसके बाद उस बैलेंस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।
वहीं, 55 साल से पहले रिटायर होने वाले लोगों के लिए नियम अलग है। उनका खाता तुरंत इनऑपरेटिव नहीं होता, बल्कि 58 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रहता है। इसके बाद ही 36 महीने की गिनती लागू होती है।
अलग-अलग उम्र में रिटायरमेंट पर क्या होगा
रिटायरमेंट की उम्र | EPF खाता कब इनऑपरेटिव होगा |
50 साल | 58 साल तक ब्याज मिलेगा। अकाउंट 58 साल पर इनऑपरेटिव माना जाएगा। |
55 साल | 58 साल की उम्र में खाता इनऑपरेटिव होगा। |
58 साल | रिटायरमेंट के 3 साल बाद इनऑपरेटिव होगा। |
70 साल | रिटायरमेंट के 3 साल बाद यानी 73 साल में खाता इनऑपरेटिव होगा। |
अगर 55 साल से पहले रिटायर हुए तो क्या होगा
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 50 साल की उम्र में नौकरी छोड़ दी। ऐसे में उसका EPF अकाउंट अगले ही दिन बंद नहीं होगा। EPFO के नियम के अनुसार उसे 58 साल की उम्र तक लगातार ब्याज मिलता रहेगा। यानी जल्दी रिटायर होने वालों को भी ब्याज का फायदा मिलता है।
नौकरी बदलने पर पुराना EPF अकाउंट बंद होता है क्या
नहीं। कंपनी बदलने या कुछ समय तक नौकरी न करने से EPF अकाउंट इनऑपरेटिव नहीं होता। आपका पुराना बैलेंस UAN के जरिए नए EPF अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसलिए पुराने खाते को बिना अपडेट छोड़े रखना सही नहीं माना जाता।
EPFO की सलाह: इन बातों का रखें ध्यान
EPFO का कहना है कि पुराने EPF बैलेंस को नजरअंदाज न करें। समय-समय पर अपना UAN और रोजगार से जुड़ी जानकारी अपडेट रखें, जरूरत पड़ने पर बैलेंस ट्रांसफर करें और पात्र होने पर समय पर निकासी का दावा करें। इससे आपका पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज का नुकसान भी नहीं होगा।
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