वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल की कहानी: स्क्रैप मेटल से बिजनेस शुरू किया, अब 28 हजार करोड़ की संपत्ति; इकलौता बेटा खोया; 75% प्रॉपर्टी करेंगे दान
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वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया। अनिल ने अपनी निजी कमाई का 75% दान करने का फैसला लिया है। (फोटो सोर्स- वेदांता लिमिटेड)
बिजनेस डेस्क। भारत के मेटल्स, माइनिंग और नेचुरल रिसोर्सेज की बात हो और अनिल अग्रवाल का नाम न आए। ऐसा लगभग नामुमकिन है। वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल उन पावरफुल इंडस्ट्रियलिस्ट्स में से हैं, जिन्होंने जमीन से उठकर ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। पटना से एक साधारण शुरुआत से लेकर लंदन में लिस्टेड इंटरनेशनल कंपनी तक उनका सफर मेहनत और विजन की मिसाल है।
कौन है अनिल अग्रवाल
अनिल अग्रवाल का जन्म 24 जनवरी 1954 में बिहार की राजधानी पटना के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की स्थापना की, जो माइनिंग, मेटल्स, ऑयल और गैस जैसे सेक्टर में दुनिया की बड़ी कंपनियों में गिनी जाती है। वेदांता पर उनका कंट्रोल उनकी होल्डिंग कंपनी वोल्कोन इन्वेस्टमेंट के जरिए है। भारत के अलावा अफ्रीका और देशों में भी वेदांता की मौजदूगी मजबूत है।
अनिल अग्रवाल एजुकेशन क्वालिफिकेशन
उन्होंने की औपचारिक पढ़ाई पटना के मिलर हाई स्कूल तक रही। कॉलेज या यूनिवर्सिटी की डिग्री लेने के बजाय उन्होंने अपने पिता के एल्युमिनियम बिजनेस से जुड़ने का फैसला किया।
अनिल अग्रवाल फैमिली डिटेल्स
अनिल अग्रवाल की पत्नी का नाम किरण अग्रवाल है। वे ज्यादातर लाइमलाइट से दूर रहती हैं, लेकिन परिवार और सामाजिक कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही है। परोपकार और समाजसेवा से जुड़े कामों में वे हमेशा अनिल अग्रवाल के साथ खड़ी नजर आती हैं। अग्रवाल की एक बेटी हैं प्रिया अग्रवाल हेब्बर। उनके एक बेटे भी थे अग्निवेश अग्रवाल, जिनका हाल ही में हार्ट अटैक से निधन हो गया।
छोटे व्यापार से ग्लोबल साम्राज्य तक का सफर
- अनिल अग्रवाल ने 1970 के दशक में मुंबई में स्क्रैप मेटल के व्यापार से अपने करियर की शुरुआत की। 1976 में उन्होंने शमशेर स्टर्लिंग कॉरपोरेशन का अधिग्रहण किया और 1986 में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की नींव रखी।
- 1990 के दशक में भारत में पहली प्राइवेट कॉपर स्मेल्टर की शुरुआत कर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाया। इसके बाद बाल्को और हिंदुस्तान जिंक जैसी सरकारी कंपनियों के अधिग्रहण ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।
- 2011 में केयर्न इंडिया के एक्वीजीशन से ऑयल और गैस सेक्टर में उनकी स्ट्रांग एंट्री हुई। 2022 में उन्होंने गुजरात में फॉक्सकॉन के साथ सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत की है।
अनिल अग्रवाल की नेट वर्थ
फोर्ब्स के मुताबिक, 8 जनवरी 2026 तक अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति 3.1 बिलियन डॉलर (करीब 28 हजार करोड़) है। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा वेदांता से मिलने वाले डिविडेंड, शेयर बिक्री, बॉन्ड और इंडस्ट्रीयल इन्वेस्टमेंट से आता है। 2024 में ही वेदांता से उन्हें लगभग 44,000 करोड़ रुपए का डिविडेंड मिला था।
अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन, संपत्ति दान करेंगे
7 जनवरी 2026 को अनिल अग्रवाल के परिवार दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जब उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि स्कीइंग के दौरान घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था।
यह खबर न सिर्फ उनके फैमिली, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए एक भावनात्मक झटका थी। जिसने उनकी तमाम कारोबारी उपलब्धियों को कुछ समय के लिए पीछे छोड़ दिया। अब वे अपने बेटे अग्निवेश से किए वादे को निभाते हुए अपनी निजी कमाई का 75% हिस्सा दान करेंगे।
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