8th Pay Commission-17125: सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगा इजाफा, जानिए 6वें और 7वें वेतन आयोग के मुकाबले कितना बढ़ेगा बेसिक पे
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बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। 23 मार्च 2026 को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया, 'सरकार ने 3 नवंबर 2025 को ही इसके गठन का प्रस्ताव नोटिफाइड कर दिया है।' अब आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस खबर के बाद से ही सरकारी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है। आखिर 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ेगी।
7वें वेतन आयोग से 8वां वेतन आयोग कितना अलग होगा
सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है। आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग में सरकार ने 'पे बैंड' और 'ग्रेड पे' सिस्टम को खत्म कर 'पे मैट्रिक्स' पेश किया था। तब 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था, जिससे कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 18,000 रुपए हो गई है। अब 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी संगठन की मांग 3 से 3.25 तक फिटमेंट फैक्टर की है।

6वां से 7वां वेतन आयोग का अब तक का सफर
सैलरी के इस कैलकुलेशन को समझने के लिए पिछले दो वेतन आयोग को समझना जरूरी है।
- 6वां वेतन आयोग (6th Pay Commission): यहां मिनिमम सैलरी 6600 रुपए थी। अधिकतम कैबिनेट सचिव स्तर पर 90,00 रुपए थी। इसमें फिटमेंट फैक्टर 1.86 के आसपास था।
- 7वां वेतन आयोग (7th Pay Commission): यहां बेसिक सैलरी बढ़कर 18,000 रुपए हो गई और अधिकतम 2.50 लाख रुपए है। इसमें 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया गया।
6वें वेतन आयोग का सैलरी स्ट्रक्चर
पे बैंड | वेतनमान | ग्रेड पे |
पीबी-1 | 5200-20,200 | 1800/1900/2000/2400/2800 |
पीबी-2 | 9300-34,800 | 4200/4600/4800 |
पीबी-3 | 15,600-39,100 | 5400/6600/7600 |
पीबी-4 | 37,400-67,000 | 8700/8900/10,000 |
एपेक्स | 80,000 (फिक्स्ड) | - |
कैबिनेट सेक्रेटरी | 9,000 (फिक्स्ड) | - |
7वां वेतन आयोग का सैलरी स्ट्रक्चर
पे लेवल | मिनिमम बेसिक पे (मंथली) |
लेवल-1 | 18,000 रुपए |
लेवल-2 | 19,000 रुपए |
लेवल-3 | 21,700 रुपए |
लेवल-4 | 25,500 रुपए |
लेवल-5 | 29,200 रुपए |
लेवल-6 | 35,400 रुपए |
लेवल-7 | 44,900 रुपए |
लेवल-8 | 47,600 रुपए |
लेवल-9 | 53,100 रुपए |
लेवल-10 | 56,100 रुपए |
लेवल-11 | 67,700 रुपए |
लेवल-12 | 78,800 रुपए |
लेवल-13 | 1,23,100 रुपए |
लेवल-13A | 1,31,100 रुपए |
लेवल-14 | 1,44,200 रुपए |
लेवल-15 | 1,82,200 रुपए |
लेवल-16 | 2,05,400 रुपए |
लेवल-17 | 2,25,000 रुपए |
लेवल-18 | 2,50,000 रुपए |

8वें वेतन आयोग में सैलरी कितनी बढ़ सकती है
अगर सरकार अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो सैलरी पर इसका असर कुछ इस तरह होगा।
अगर फिटमेंट फैक्टर 3 रहा
अगर सरकार संगठनों की मांग मान लेती है, तो सैलरी में काफी उछाल आएगा।
- लेवल 1 (शुरुआती स्तर)- 18,000 रुपए से बढ़कर 54,000 रुपए हो जाएगी।
- लेवल 18 (उच्चतम स्तर)- 2.50 लाख से बढ़कर 7.50 लाख रुपए हो जाएगी।
8वां वेतन आयोग का सैलरी स्ट्रक्चर (3.00 फिटमैट फैक्टर)
पे लेवल | बेसिक पे 7वां वेतन आयोग | एक्सपेक्टेड पे | हर महीने का अंतर |
लेवल-1 | 18,000 रुपए | 54,000 रुपए | 36,000 रुपए |
लेवल-2 | 19,900 रुपए | 59,700 रुपए | 39,800 रुपए |
लेवल-3 | 21,700 रुपए | 65,100 रुपए | 43,400 रुपए |
लेवल-4 | 25,500 रुपए | 76,500 रुपए | 51,000 रुपए |
लेवल-5 | 29,200 रुपए | 87,600 रुपए | 58,400 रुपए |
लेवल-6 | 35,400 रुपए | 1,06,200 रुपए | 70,800 रुपए |
लेवल-7 | 44,900 रुपए | 1,34,700 रुपए | 89,800 रुपए |
लेवल-8 | 47,600 रुपए | 1,42,800 रुपए | 95,200 रुपए |
लेवल-9 | 53,100 रुपए | 1,59,300 रुपए | 1,06,200 रुपए |
लेवल-10 | 56,100 रुपए | 1,68,300 रुपए | 1,12,200 रुपए |
लेवल-11 | 67,700 रुपए | 2,03,100 रुपए | 1,35,400 रुपए |
लेवल-12 | 78,800 रुपए | 2,36,400 रुपए | 1,57,600 रुपए |
लेवल-13 | 1,23,100 रुपए | 3,69,300 रुपए | 2,46,200 रुपए |
लेवल-13A | 1,31,100 रुपए | 3,93,300 रुपए | 2,62,200 रुपए |
लेवल-14 | 1,44,200 रुपए | 4,32,600 रुपए | 2,88,400 रुपए |
लेवल-15 | 1,82,200 रुपए | 5,46,600 रुपए | 3,64,400 रुपए |
लेवल-16 | 2,05,400 रुपए | 6,16,200 रुपए | 4,10,800 रुपए |
लेवल-17 | 2,25,000 रुपए | 6,75,000 रुपए | 4,50,000 रुपए |
लेवल-18 | 2,50,000 रुपए | 7,50,000 रुपए | 5,00,000 रुपए |
अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा
अगर केंद्र सरकार पुराने फॉर्मूले पर ही चलती है। ऐसे में लेवल 1 की सैलरी बढ़कर 46,260 रुपए और लेवल 18 की सैलरी 6.42 लाख हो जाएगी।
8वां वेतन आयोग का सैलरी स्ट्रक्चर (2.57 फिटमैट फैक्टर)
पे लेवल | बेसिक पे 7वां वेतन आयोग | एक्सपेक्टेड पे | हर महीने का अंतर |
लेवल-1 | 18,000 रुपए | 46,260 रुपए | 28,260 रुपए |
लेवल-2 | 19,900 रुपए | 51,143 रुपए | 31,243 रुपए |
लेवल-3 | 21,700 रुपए | 55,769 रुपए | 34,069 रुपए |
लेवल-4 | 25,500 रुपए | 65,535 रुपए | 40,035 रुपए |
लेवल-5 | 29,200 रुपए | 75,044 रुपए | 45,844 रुपए |
लेवल-6 | 35,400 रुपए | 90,978 रुपए | 55,578 रुपए |
लेवल-7 | 44,900 रुपए | 1,15,393 रुपए | 70,493 रुपए |
लेवल-8 | 47,600 रुपए | 1,22,332 रुपए | 74,493 रुपए |
लेवल-9 | 53,100 रुपए | 1,36,467 रुपए | 83,367 रुपए |
लेवल-10 | 56,100 रुपए | 1,44,177 रुपए | 88,077 रुपए |
लेवल-11 | 67,700 रुपए | 1,73,989 रुपए | 106289 रुपए |
लेवल-12 | 78,800 रुपए | 2,02,516 रुपए | 1,23,716 रुपए |
लेवल-13 | 1,23,100 रुपए | 3,16,367 रुपए | 1,93,267 रुपए |
लेवल-13A | 1,31,100 रुपए | 3,36,927 रुपए | 2,05,827 रुपए |
लेवल-14 | 1,44,200 रुपए | 3,70,594 रुपए | 2,26,394 रुपए |
लेवल-15 | 1,82,200 रुपए | 4,68,254 रुपए | 2,86,054 रुपए |
लेवल-16 | 2,05,400 रुपए | 5,27,878 रुपए | 3,22,478 रुपए |
लेवल-17 | 2,25,000 रुपए | 5,78,250 रुपए | 3,53,250 रुपए |
लेवल-18 | 2,50,000 रुपए | 6,42,500 रुपए | 3,92,500 रुपए |
कैसे तय होता है फिटमेंट फैक्टर
अक्सर लोग पूछते हैं कि यह नंबर आता कहां से है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के मुताबिक, इसे तय करने के लिए कई चीजों को देखा जाता है।
- महंगाई भत्ता (DA): फिलहाल महंगाई भत्ता 58% है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने तक इसमें 12% की वृद्धि होती है, तो 70% तक पहुंच सकता है।
- फैमिली यूनिट्स: पिछली बार तीन यूनिट्स के आधार पर कैलकुलेशन हुआ था। इस बार पांच यूनिट्स की मांग की गई है। अगर इसे माना गया तो सैलरी में 66% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
- एकरॉयड फॉर्मूला: यह फॉर्मूला कर्मचारियों की बेसिक जरूरतों (खाना, कपड़ा, मकान) के खर्च के आधार पर मिनिमम सैलरी तय करता है।

कब से लागू होगा 8वां वेतन आयोग
7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है। नियम के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होना चाहिए। आयोग को रिपोर्ट सौंपने में 18 महीने लगेंगे। उसके बाद केंद्र को लागू करने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि कर्मचारियों को इसका लाभ एरियर के साथ मिलता है। इसका फायदा न सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा, बल्कि राज्य सरकारों के कर्मचारी और पेंशनर्स भी लाभान्वित होंगे, क्योंकि ज्यादातर प्रदेश केंद्र के मॉडल को फॉलो करते हैं।
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