प बंगाल में 6 महीने में 60 हजार नाबालिग मां बनी: अब घर-घर बाल विवाह की पड़ताल करेगी सरकार, पति से लेकर पंडित-काजी तक पर कार्रवाई होगी
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यह तस्वीर सांकेतिक है।
नेशनल डेस्क। पश्चिम बंगाल में बाल विवाह को लेकर सामने आए आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इस साल जनवरी से जून के बीच राज्य के अस्पतालों में 18 साल से कम उम्र की करीब 60 हजार लड़कियों ने बच्चों को जन्म दिया। आंकड़ों के सामने आने के बाद अब राज्य सरकार ने बाल विवाह के मामलों की तलाश के लिए घर-घर जांच शुरू करने का फैसला किया है।
सरकार अब अस्पतालों में दर्ज डिलीवर के रिकॉर्ड के जरिए उन लड़कियों की पहचान करेगी, जिनकी उम्र 18 साल से कम है। इसके बाद प्रशासन उनके घर तक पहुंचेगा और यह पता लगाएगा कि उनकी शादी कब और किससे हुई थी। नाबालिग से शादी करने वाले पति के साथ-साथ शादी करवाने या इसमें मदद करने वाले लोगों पर भी केस दर्ज किया जाएगा।
नाबालिग से संबंध बनाए तो POCSO में केस
सरकार ने साफ किया है कि अगर किसी नाबालिग लड़की के पति ने उसके साथ यौन संबंध बनाए हैं तो उसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। कानून के तहत नाबालिग के साथ यौन संबंध के मामले में दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल की जेल हो सकती है। गंभीर मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
सिर्फ पति ही नहीं, बल्कि बाल विवाह कराने में मदद करने वाले लोगों पर भी कार्रवाई होगी। शादी कराने वाले पंडित, काजी, माता-पिता और दूसरे मददगारों पर बाल विवाह रोकने वाले कानून के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। इसमें दो साल तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा है कि बाल विवाह में शामिल पाए जाने वाले परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाले फायदे से भी बाहर किया जा सकता है।
सबसे ज्यादा केस मुर्शिदाबाद में
हेल्थ डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद जिले में 12,847 नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी हुई। इसके बाद साउथ 24 परगना में 4 हजार से ज्यादा और पूर्व बर्धमान में करीब 3800 मामले सामने आए। डायमंड हार्बर में ऐसी 1806 डिलीवरी का रिकॉर्ड मिला।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले
मई 2026 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल में 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों का रेशियो सबसे ज्यादा है। राज्य में 6% से ज्यादा लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है, जबकि देश का औसत करीब 2% है।
15 से 19 साल की लड़कियों के मां बनने के मामले में भी पश्चिम बंगाल सबसे आगे है। राज्य में इस उम्र की हर 1000 लड़कियों में करीब 23 मां बन जाती हैं। राष्ट्रीय औसत करीब 11 है। यानी राज्य में यह दर देश के औसत से दोगुनी से भी ज्यादा है।
सरकार का दावा- सभी समुदायों में एक जैसा कानून लागू होगा
राज्य सरकार ने कहा है कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई किसी धर्म या समुदाय को देखकर नहीं, बल्कि कानून के हिसाब से होगी। सरकार की ओर से दावा किया गया कि इस साल के पहले छह महीनों में नाबालिग माताओं के रिकॉर्ड में आधे से ज्यादा मामले मुस्लिम समुदाय से जुड़े थे। सरकार ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर बाल विवाह की समस्या को नजरअंदाज करने और इससे जुड़े आंकड़े केंद्र सरकार के साथ साझा नहीं करने का आरोप भी लगाया है।

2030 तक बाल विवाह खत्म करने का लक्ष्य
पश्चिम बंगाल में यह अभियान ऐसे वक्त में शुरू हो रहा है, जब भारत ने दुनिया से 2030 तक बाल विवाह खत्म करने की दिशा में काम करने का कमिटमेंट किया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बाल, कम उम्र और जबरन होने वाली शादियों को खत्म करने के लिए एक प्रपोजल को को-स्पॉन्सर किया है। इसके तहत 27 नवंबर को इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ चाइल्ड, अर्ली एंड फोर्स्ड मैरिज के तौर पर मनाने का फैसला हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि 27 नवंबर 2024 को ही भारत ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था। इस अभियान का लक्ष्य 2026 तक बाल विवाह के मामलों में 10% कमी लाना और 2030 तक देश को बाल विवाह से मुक्त करना है।
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