US ने भारत पर 10% टैरिफ लगाया: चीन समेत 59 देशों पर 12.5% ड्यूटी; कहा- ये सभी देश फोर्स्ड लेबर रोकने में नाकाम रहे
Published:
4 min read

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स पर फोर्स्ड लेबर के बहाने नया टैरिफ लगा दिया है।- फाइल
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स पर फोर्स्ड लेबर (Forced Labour) के बहाने नया टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका ने भारत, चीन, जापान और यूरोपियन देशों समेत 60 देशों पर नई इम्पोर्ट ड्यूटी का ऐलान किया है। यह टैरिफ शुक्रवार से लागू होगा। सबसे बड़ी राहत भारत को मिली है। जहां पहले 12.5% टैरिफ की तैयारी थी, वहीं अब भारत को 10% वाली कैटेगरी में रखा गया है।
अमेरिका ने चीन और जापान समेत 59 देशों पर 12.5% तक की ड्यूटी लगेगी। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने सरकार ने कहा है कि ये सभी देश फोर्स्ड लेबर रोकने में नाकाम रहे हैं इसलिए इन पर टैरिफ लगाया गया है।
भारत को राहत कैसे मिली
अमेरिकी अफसरों के मुताबिक, शुरुआत में भारत पर भी 12.5% टैरिफ लगाने का प्रपोजल रखा गया था। हालांकि दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में ट्रेड प्रैक्टिस को लेकर हुई बातचीत के बाद भारत को 10% टैरिफ वाली कैटेगरी में रखा गया। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच हुई बातचीत का भारत को फायदा मिला। वहीं कनाडा, यूरोपियन यूनियन (EU) और ब्रिटेन भी 10% टैरिफ वाले ग्रुप में शामिल हैं।

किन देशों पर ज्यादा असर पड़ेगा
अमेरिका ने चीन और जापान समेत 59 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। हालांकि स्टील, एल्यूमिनियम और पहले से स्पेशल टैरिफ झेल रहे सेक्टर्स के प्रोडक्ट पर इसका असर नहीं पड़ेगा। वहीं, यूएस मैक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के तहत अमेरिका में आने वाले सामान को भी इस नई ड्यूटी से छूट दी गई है।
पुराना टैरिफ क्यों बदला
ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने इसी साल की शुरुआत में पूरी दुनिया पर 10% टैरिफ लगाया था। वह व्यवस्था गुरुवार रात खत्म हो गई। इसके बाद नए लीगल प्रोसेस के तहत यह नया टैरिफ सिस्टम लागू किया गया है। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का दावा है कि यह व्यवस्था कई महीनों की जांच के बाद तैयार की गई है। इसे कानूनी रूप से बेहद मजबूत बनाया गया है ताकि कोर्ट में चैलेंज किए जाने पर भी इसे कैंसिल नहीं करवाया जा सके।

US कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ को इनवैलिड बताया था
अमेरिकी फेडरल ट्रेड कोर्ट ने इसी साल मई में डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को लेकर अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था- ट्रम्प सरकार द्वारा लगाया गया 10% ग्लोबल टैरिफ कानूनी रूप से ठीक नहीं था।न्यूयॉर्क स्थित US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड की तीन जजों वाली बेंच ने 2-1 के फैसले में कहा कि ट्रम्प ने अपने अधिकारों से आगे जाकर फैसला लिया। कोर्ट ने कहा कि ये टैरिफ अवैध हैं। ये टैरिफ बिना कानून मंजूरी के लगाए गए हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिका के संविधान के मुताबिक टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार संसद के पास है। राष्ट्रपति को कुछ सीमित अधिकार दिए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी दुनिया पर अपनी मर्जी से टैरिफ लगा दें।
US सीनेट में पेश हुआ टैरिफ से जुड़ा बिल
16 जुलाई को अमेरिकी सीनेट में टैरिफ से जुड़ा एक बिल पेश किया गया। इस बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। भारत और चीन भी इस लिस्ट में हैं। हालांकि अभी यह सिर्फ एक बिल है। यह कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले सीनेट, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी जैसे कई प्रोसेस से गुजरना होगा। यानी अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है।
आगे क्या हो सकता है
अमेरिका फिलहाल 16 और देशों की अलग से जांच कर रहा है। जांच का फोकस इंडस्ट्रियल ओवरकैपेसिटी यानी जरूरत से ज्यादा इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर है। अगर इन जांचों में अमेरिका को नियमों के उल्लंघन के सबूत मिलते हैं तो आने वाले महीनों में इन देशों पर भी एडिशनल टैरिफ लगाया जा सकता है। यानी ट्रम्प का ट्रेड वॉर अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे भी कई देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है।

