युवाओं की बात सुनिए, जवाब हिंसा से दोगे तो हालात बिगड़ेंगे: स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- पुलिस-प्रशासन को संयम बरतना चाहिए था
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सुप्रीम कोर्ट में स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं। कोर्ट अब इन सभी पर एक साथ सुनवाई करेगा।
नेशनल डेस्क। देशभर में स्टूडेंट प्रोटेस्ट और हिंसा की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अगस्त) को बड़ा मैसेज दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रोटेस्ट को संभालने का सबसे अच्छा तरीका प्रदर्शनकारियों की बात सुनना है, न कि सिर्फ बल का इस्तेमाल करना। कोर्ट ने साफ कहा कि लोकतंत्र में पुलिस और प्रशासन को संयम बरतना चाहिए, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह बात उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कही, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर हाल में दिल्ली समेत कई राज्यों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और पत्थरबाजी के लिए कार्रवाई की मांग की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।
'सबसे ताकतवर तरीका है लोगों की बात सुनना'
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा- लोकतंत्र में जब शांतिपूर्ण मार्च या प्रदर्शन हो रहे हों तो पुलिस और प्रशासन को बहुत सावधानी से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युवा नाराज हैं तो पहले यह समझना जरूरी है कि वे क्या कह रहे हैं और क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं।
कोर्ट ने कहा- ‘सुनना’ सबसे ताकतवर तरीका होता है। युवाओं की बात सुनिए। अगर जवाब भी हिंसा से दिया जाएगा तो हालात और खराब होंगे।
याचिका में CJP पर गंभीर आरोप
एक रिटायर्ड एयरफोर्ट अफसर मनीष कुमार सोलंकी ने यह याचिका लगाई है। उनकी ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि प्रोटेस्ट करने वाले लोगों ने देश में अशांति फैलाई। वे टीवी चैनलों पर जाकर माहौल भड़काते रहे। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी जैसी घटनाओं के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वकील ने यह भी दावा किया कि CJP कोई रजिस्टर्ड संगठन नहीं है और उसे संसद तक मार्च निकालने की परमिशन भी नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी संसद परिसर तक पहुंच जाते तो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
कोर्ट बोला- हर पक्ष की बात सुनेंगे
इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी पक्षों की बात सुनने के लिए तैयार है। कोर्ट ने दोहराया कि पत्थरबाजी जैसी घटनाएं बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकतीं और दोषियों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्रशासन की प्रतिक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे तनाव और बढ़ जाए।
कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार का पक्ष भी सुनेगी और उसके बाद आगे फैसला करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को छात्र प्रदर्शनों में हुई हिंसा से जुड़े पहले से पेंडिंग मामलों के साथ जोड़ दिया है। अब इन सभी मामलों की सुनवाई अगली तय तारीख पर एक साथ होगी।
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