NEET प्रदर्शनकारियों को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गंभीर क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं तो राज्य FIR वापस ले सकते हैं
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20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान उपद्रव हुआ था।
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ कर दिया कि NEET पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों पर अगर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज नहीं है तो राज्य सरकारें उन पर दर्ज FIR वापस ले सकती हैं। दरअसल, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले प्रदर्शनकारियों को छोड़कर बाकी सभी स्टूडेंट्स को रिहा करने का आदेश दिया था।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने साफ किया कि क्रिमिनल बैकग्राउंड से उनका मतलब सिर्फ गंभीर और जघन्य अपराधों से था। इससे पहले सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले प्रदर्शनकारियों को छोड़कर बाकी सभी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने वाली।
मेहता ने बताया- गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले 2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएंगी।
वकीलों के बच्चों की भी पिटाई हुई- याचिकाकर्ता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा- वकीलों के बच्चों की भी पिटाई की गई। उन्होंने कहा- वीडियो बेहद चौंकाने वाले हैं। हमने कोर्ट को 300 वीडियो सौंपे हैं। बल प्रयोग करने के आदेश उच्च अधिकारियों से आए हैं, इसलिए पुलिस कमिश्नर को इन सभी मामलों पर गौर करना चाहिए। उन्होंने कहा- हमने ऐसे लोगों की भी पहचान की जो वर्दी नहीं पहने थे और पुलिस की तरह लाठीचार्ज कर रहे थे। पुलिस कमिश्नर और RAF डायरेक्टर से पूछा जाना चाहिए कि पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया?
इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहना की बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें दिल्ली समेत देशभर में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों और CAPF के जवानों पर कार्रवाई की मांग की गई है। एक याचिका बिहार में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 के इस्तेमाल के खिलाफ भी दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था
इससे पहले 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने CJP मार्च के दौरान पुलिस के कथित एक्शन के खिलाफ याचिका पर मंगलवार को स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत एक्शन लिया जाए।

'अगर जिम्मेदारी तय नहीं होती तो जांच बेमतलब'
सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पूरी तरह से स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जिसने भी अपराध किया है, कानून अपना काम करेगा। अगर जिम्मेदारी तय नहीं होती तो जांच का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने कहा- प्रदर्शन के दौरान पुलिस को प्रोटोकॉल फॉलो करना होता है। लेकिन पुलिस ने पहले से तय प्रोटोकॉल को फॉलो नहीं किया। इसलिए प्रदर्शन को लेकर नए प्रोटोकॉल की जरूरत है।
क्या है मामला
दरअसल, CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च बुलाया था। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे थे। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई थी। प्रदर्शनकारियों पर भी पथराव करने का आरोप है।

