शोपियां मुठभेड़ में लश्कर का A++ कमांडर ढेर: सुरक्षाबलों ने जाकिर गनई को मार गिराया, लतीफ भट्ट की खोज जारी; सेब के बागानों में लगे खुफिया कैमरों से ट्रेस हुए थे आतंकी
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शोपियां में दो आतंकियों के छुपे होने के इनपुट मिलने के बाद बीते 5 दिन से सुरक्षा बल एक ज्वॉइंट मिशन चला रहे हैं।
नेशनल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में 5 दिन से जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का शीर्ष कमांडर जाकिर गनई मारा गया है। सुरक्षाबलों ने उसका शव बरामद कर लिया है।
जाकिर गनई को सुरक्षा एजेंसियों ने A++ कैटेगरी का आतंकी घोषित किया था। वह दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले का रहने वाला था और साल 2024 से लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था।
अब सुरक्षाबलों का पूरा फोकस दूसरे आतंकी लतीफ भट्ट की तलाश पर है। लतीफ भी कुलगाम का रहने वाला है और पिछले साल लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुआ है। उसके छिपे होने की संभावना वाले इलाके में लगातार तलाशी अभियान जारी है।
3 जुलाई को पहली बार कैमरों में दिखे थे आतंकी
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, 3 जुलाई को शोपियां के घने सेब के बागों में लगे निगरानी कैमरों में जाकिर गनई और लतीफ भट्ट पहली बार नजर आए थे। इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने जॉइंट मिशन शुरू किया, जो अब पांचवें दिन में पहुंच चुका है।

सात गांवों में घेराबंदी, सभी रास्ते सील
इस मिशन के तहत सुरक्षाबलों ने सात गांवों वाले पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी है और आतंकियों के भागने के सभी रास्तों को बंद कर दिया है। रात के वक्त निगरानी आसान बनाने के लिए पूरे इलाके में लाइट का अरेंजमेंट भी किया गया है।
घने बागों का उठा रहे थे फायदा
अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में सेब के बागों की घनी पत्तियां आतंकियों को छुपने का मौका देती हैं। इससे निगरानी करना मुश्किल हो जाता है और आतंकी सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ने के लिए ऐसे इलाकों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
शोपियां क्यों है अहम?
शोपियां लंबे समय से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र से जोड़ने वाला ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। इसी वजह से यह इलाका आतंकियों की आवाजाही के लिहाज से रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

