राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर मानहानि मामला रद्द: UP सरकार ने केस चलाने की मंजूरी ही नहीं दी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- परमिशन नहीं तो केस यहीं खत्म
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राहुल गांधी ने 4 साल पहले सावरकर के खिलाफ एक टिप्पणी की थी। इसके खिलाफ दर्ज हुई शिकायत पर चल रहा केस अब खत्म हो गया है।
नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (14 अगस्त) को विनायक दामोदर सावरकर को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान से जुड़े केस को खत्म कर दिया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने की जरूरी मंजूरी नहीं दी थी। इसी के चलते कोर्ट ने यह मामला खारिज कर दिया।
लखनऊ के रहने वाले नृपेंद्र पांडे की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि राहुल गांधी ने 2022 में महाराष्ट्र में अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं।
कोर्ट ने पूछा- सरकार ने मंजूरी दी या नहीं?
जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि क्या इसके लिए सरकार की ओर से मंजूरी मिली है? इस पर जवाब मिला कि मंजूरी नहीं दी गई है।
इसके बाद कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे मामले में सरकार की मंजूरी जरूरी है। जब मंजूरी ही नहीं दी गई, तो केस आगे नहीं चल सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद नृपेंद्र पांडे की शिकायत और लखनऊ मजिस्ट्रेट की ओर से राहुल गांधी को जारी समन, दोनों को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
राहुल गांधी ने 2022 में महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर पर टिप्पणी की थी। आरोप था कि उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों का सेवक बताया और कहा कि उन्हें अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी।
इसी बयान को लेकर नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी करते हुए कहा था कि उनके भाषण से समाज में नफरत और आपसी दुश्मनी बढ़ सकती है। राहुल गांधी पर उस वक्त IPC की धारा 153A और 505 के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई थी।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने भी दी थी चेतावनी
इस मामले में जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को जारी समन पर रोक लगा दी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल गांधी के सावरकर को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी टिप्पणी की थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा था कि आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को भविष्य में ऐसे बयान देने से बचने की भी सलाह दी थी।
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कोर्ट ने यहां तक कहा था कि अगर राहुल गांधी आगे इस तरह की टिप्पणी करते हैं तो सुप्रीम कोर्ट खुद मामले का संज्ञान ले सकता है। उस स्थिति में मुकदमा शुरू करने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
राहुल गांधी ने क्या दलील दी थी?
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई बेवजह और परेशान करने वाली है। उनका कहना था कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) हर नागरिक को बोलने और अपनी बात रखने की आजादी देता है।
उन्होंने यह भी कहा था कि इस तरह की कार्रवाई का इस्तेमाल उन्हें डराने और एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के तौर पर अपनी बात रखने से रोकने के लिए किया जा रहा है।
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