होर्मूज खुलना दुनिया के लिए राहत की बात: BRICS मीटिंग में डोभाल बोले- उम्मीद है US-Iran डील सफल होगी; नए खतरों से भारत सावधान
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NSA) अजित डोभाल मंगलवार को BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग में शामिल हुए।
इंटरनेशनल डेस्क। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजित डोभाल ने अमेरिका- ईरान में हुए समझौते को दुनिया के लिए राहत की बात बताई है। डोभाल ने BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं मीटिंग में ये बात कही। डोभाल ने कहा कि उम्मीद है कि इस समझौते के बाद दुनिया में एनर्जी सप्लाई चेन फिर से पटरी पर लौटेगी। खास तौर पर होर्मूज स्ट्रैट दोबारा खुलना बेहद अहम है। भारत इसे लेकर सावधान है, लेकिन उम्मीदों से देख रहा है। हमें नए खतरों और चुनौतियों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, अगर यह समझौता सफल रहता है तो मिडिल ईस्ट में स्थिरता आ सकती है।
होर्मूज खुलना दुनिया के लिए बड़ी राहत
अजित डोभाल ने कहा कि भारत के लिए सबसे अच्छी खबर होर्मूज स्ट्रैट का दोबारा खुलना है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कई महीनों से अमेरिका-ईरान टेंशन की वजह से इस रूट के दोबारा नॉर्मल होने को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो रही है। यहां से जहाजों की आवाजाही बहाल होने से ना सिर्फ एनर्जी सप्लाई दुरुस्त होगी बल्कि ग्लोबल ट्रेड के लिए भी यह राहत की बात होगी।

खाद और केमिकल सप्लाई पर पड़ेगा असर
डोभाल ने कहा कि इस समझौते का असर सिर्फ क्रूड मार्केट तक ही नहीं होगा।सप्लाई चेन में आई रुकावटें दूर होने से खाद, केमिकल और दूसरे जरूरी प्रोडक्ट्स भी आसानी से मिल सकेंगे। जंग और टेंशन की वजह से कई देशों को जरूरी रॉ प्रोडक्ट की कमी का सामना करना पड़ रहा था। अब हालात नॉर्मल होने की उम्मीद बढ़ी है।
दुनिया मुश्किल दौर से गुजर रही
BRICS मीटिंग में डोभाल ने दुनिया में पैदा हुए हालातों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई मोर्चों पर दिक्कतों का सामना कर रही है। एक तरफ मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर इकोनॉमिक प्रेशर और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। फिलहाल स्थिति ऐसी है कि ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स और नेटवर्क भी इन चुनौतियों से निपटने में पहले जितने असरदार साबित नहीं हो रहे।

BRICS की भूमिका पर दिया जोर
अपने स्पीच में डोभाल ने BRICS देशों की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि BRICS की शुरुआत एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी जो उभरती इकोनॉमीज की आवाज को मजबूत करे। यह गुप मल्टीलैटरल ग्लोबल ऑर्डर, इकोनॉमिक कोऑपरेशन और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। BRICS लगातार मजबूत हो रहा है और इसकी भूमिका आने वाले समय में और बढ़ेगी।
मोदी भी कर चुके हैं समझौते का स्वागत
इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर असर डाला है। इस लड़ाई भारत समेत कई देशों के लोगों की जान गई है। उम्मीद है कि यह समझौता मिडिल ईस्ट में शांति कायम करने और स्थिरता लाने में मदद करेगा। साथ ही मरीन ट्रेड को सुरक्षित बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
क्या है BRICS, इस मीटिंग में कौन-कौन शामिल हुए
ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसकी शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। हालांकि अब BRICS अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हो चुका है। दिल्ली में हुई BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बैठक में भारत के NSA अजीत डोभाल, चीन विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी सर्गेई शोइगु और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामीपोर समेत सदस्य देशों के टॉप सिक्योरिटी ऑफिसर्स शामिल हुए।

