कमाल…उफ्फ ये क्या कर दिया : पंत के मामले में यही शब्द इस्तेमाल हुए, ईशान किशन को इन गलतियों से सीखने की जरूरत
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स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया में कुछ बैट्समैन ऐसे होते हैं जो मैदान पर आते ही खेल की रफ्तार बदल देते हैं। ऋषभ पंत और ईशान किशन इसी किस्म के प्लेयर हैं। दोनों बेहद फियरलेस हैं, जोखिम लेने से नहीं डरते और अपने दिन पर किसी भी बाॅलिग को खेल सकते हैं। लेकिन यही अंदाज कभी-कभी उनके लिए परेशानी भी बन जाता है। ऋषभ पंत के हालिया अनुभव से ईशान किशन और आने वाली पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
पंत का गेम जोखिम से भरा
ऋषभ पंत एक ऐसे बैट्समैन हैं जो हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं। उनका खेल कभी शानदार लगता है तो कभी लापरवाह। कई बार दर्शक और कोच एक ही शॉट पर कहते हैं – कमाल!” और कभी ये क्या कर दिया!”
साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पंत ने कुछ ऐसे शॉट खेले, जिन्हें क्रिकेट की भाषा में “ब्रेन-फेड” कहा जाता है। नतीजा यह हुआ कि टीम मैनेजमेंट नाराज हुआ और इसका असर उनके चयन पर पड़ा। उन्हें घरेलू T20I वर्ल्ड कप टीम में जगह नहीं मिली और वनडे टीम में भी उनका स्थान खतरे में बताया जाने लगा।

एग्रेसिव बैटिंग का नतीजा
आज की क्रिकेट में कई यंग खिलाड़ी आक्रामक खेल रहे हैं। इंग्लैंड के हैरी ब्रूक, ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ी और भारत के नए टैलेंट इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
14 साल के वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी इस “केयरफ्री क्लब” के पोस्टर बॉय बनते जा रहे हैं। हालांकि हर जोखिम का एक गलत नतीजा होता है। जब टीम जीत रही हो, तब एग्रेसिव इंटेंट अच्छा लगता हैं। जब हालात मुश्किल हों, तब वही अंदाज नुकसान पहुंचा सकता है। ऋषभ पंत के साथ भी यही हुआ।
किशन की एंट्री
पंत की जगह T20I वर्ल्ड कप टीम में ईशान किशन को मौका मिला। ईशान भी पंत जैसे ही हैं – आक्रामक, निडर और जोखिम लेने वाले। फर्क बस इतना है कि हाल के समय में ईशान घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म में थे, जबकि पंत का प्रदर्शन गिर रहा था। इसे ही “रीसेंसी बायस” कहा जाता है – जो हाल में अच्छा खेले, उसी को मौका मिलता है।
सबक क्या है?
पंत का करियर यह सिखाता है कि सिर्फ तलवार चलाना काफी नहीं होता, ढाल भी साथ रखनी पड़ती है। लंबे समय तक खेलने वाले महान बैटर जानते हैं कि कब तेज खेलना है और कब संभलकर खेलना है। वीरेंद्र सहवाग भी फियरलेस खेलते थे। हालांकि जरूरत पड़ने पर उन्होंने खुद को रोका। एडम गिलक्रिस्ट जैसे विकेटकीपर-बल्लेबाज ने एग्रेसिव और समझदारी का बेहतरीन संतुलन बनाया।

